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Friday, 18 May 2012

ओपन एक्सेस की बिजली हुई मंहगी, आम को राहत, Industry has to pay more for open access electricity


-पीएसईआरसी ने सीधी बिजली लेने वाले उपभोक्ताओं पर ट्रांसमिशन व विलिंग चार्ज लगाया
-आम उपभोक्ताओं पर 17 पैसे का अतिरिक्त वजन पड़ रहा था
-एक साल में 411 करोड़ का चूना लगा
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब में ओपन एक्सेस के रास्ते बाहर से ली जाने वाली बिजली अब मंहगी हो गई है, हालांकि इससे प्रदेश के आम उपभोक्ता को खासी राहत मिली है। संभावित रूप से इस साल बढऩे वाली बिजली की दरें इस बार ना बढ़े या फिर होने वाली बढ़ोतरी में से कम से कम 17 पैसे प्रति यूनिट की कटौती हो जाए।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड पावरकाम की याचिका पर पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन ने सीधी बिजली लेने वाले उपभोक्ताओं पर ट्रांसमिशन व विलिंग चार्ज लगा दिया है। इससे पहले ये शुल्क आम व अन्य सभी उपभोक्ताओं के बिल में तो लग कर आते हैं लेकिन ओपन एक्सेस के माध्यम से सीधी बिजली लेने वालों को इससे तकनीकि रूप से छूट मिली हुई थी।
पीएसईआरसी ने ओपन एक्सेस रेग्यूलेशन एक्ट में संशोधन करते हुए छोटे व मध्यम उपभोक्ताओं को तो राहत दी है पर एक मेगावाट व इससे अधिक लोड वाले अन्य पर 127 पैसे प्रति यूनिट का अतिरिक्त शुल्क लगाया है। इसमें 11 पैसे ट्रांसमिशन शुल्क और 116 पैसे का विलिंग शुल्क लगाया है।
ओपन एक्सेस वाले उपभोक्तओं से ये शुल्क अलग से लिए जाएंगे। वर्तमान में 132 केवीए से 220 केवीए के ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं से विलिंग चार्जेज नहीं लिया जा रहा था जबकि 33 व 66 केवीए लोड वाले उपभोक्ताओं से 15 फीसद अथवा 17.4 पैसे प्रति यूनिट, 11 केवीए के उपभोक्ताओं से नार्मल विलिंग चार्जेज का 30 फीसद वसूला जाता था। अब प्रदेश का नेटवर्क प्रयोग करने वालों पर समान रूप से शुल्क लगेगा। अभी तक ऐसी बड़ी इंडस्ट्री आम उपभोक्ता से कम शुल्क दे रही थी।
पावरकाम ने पीएसईआरसी के एक याचिका दायर कर बताया था कि एक साल में 411 करोड़ रूपये का नुकसान हो चुका है और आम उपभोक्ता पर 17 पैसे प्रति यूनिट का भार पड़ रहा है। ऐसे में बिजली बिलों में 17 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी सिर्फ इसी वजह से भी करनी पड़ सकती है। दलील यह भी दी गई कि आम उपभोक्ता पर लोड ना डाला जाए। इस पर पीएसईआरसी ने चार मई को उक्त आदेश जारी कर दिए।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 315 उपभोक्ता ओपन एक्सेस के तहत 15 सौ मेगावाट बिजली उस समय भी लेते हैं जब पावरकाम के पास अतिरिक्त बिजली होती है। 15 मिनट के सलाट में पावरकाम से ली जाने वाली सस्ती बिजली बाद में पावरकाम को लौटानी पड़ती है। उपभोक्ताओं के रवैये से पावरकाम को चूना लगता रहा है।

Tuesday, 29 November 2011

16 नवंबर को सजा, 25 को बरी और हर्जाना भी, electricity, open access, pserc, pspcl,

-नियमों के विपरीत बिजली कनेक्शन काटने के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी होगी
-18.45 रूपये जुर्माने की वापसी छह दिसंबर तक और एक लाख रूपया हर्जाना देने के आदेश
-'ओपन एक्सेसÓ के तहत बाहर से बिजली लेने और पावरकाम बनने के बाद पहला मामला
भूपेश चट्ठा, पटियाला
'बड़े नामों को अक्सर देर से सजा क्यों मिलती है...Ó भ्रष्टाचार व मानव अधिकारों को लेकर बने और न्यायपालिका से लेकर पूरे सिस्टम पर बने और  टेलीविजन पर चल रहे इस विज्ञापन में संभव एक कमी भी है कि 'नाम बड़ा हो तो सजा देना भी आसान नहीं होताÓ और अगर तंत्र में निजी व्यवस्था शामिल हो जाए और नियम कानून लागू करने में एक भी कमी रह जाए तो सारा दांव उलटा पड़ जाता है और वो भी चंद दिनों में।
मनमर्जी से बिजली बिल भेजने और बकाया ना भरने और यहां तक कि किसी बिजली कर्मी के बनते 'मान-सम्मानÓ में थोड़ी भी कसर रहने पर सख्त परिणाम भुगताने के लिए कुख्यात रहे पूर्व पंजाब राच्य बिजली बोर्ड के पुराने दिन भी उसके साथ ही लद चुके हैं। बिजली अधिनियम 2003 के लागू होने के बाद बने पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड और पंजाब स्टेट पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड बनने के बाद 'ओपन एक्सेसÓ के तहत अन्य राच्यों अथवा पंजाब के बाहर से इंडस्ट्री को सीधे बिजली लेने देने के निर्णय के बाद पहला मामला सामने आया है जब एक मामले में16 नवंबर को जालंधर की एक फैक्ट्री जेएमपी इंडस्ट्री को पीक लोड आवर में बिजली ड्रा करने पर 'सजाÓ के रूप में बिजली कनेक्शन से हाथ धोना पड़ा।
उक्त इंडस्ट्री पर 18.45 लाख रूपये का जुर्माना ठोकते हुए तीन किश्तों में जमा करवाने के आदेश भी जारी हो गए। इस पर कंपनी ने 6.15 लाख रूपये की एक किश्त जमा करवाने के साथ ही पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन के पास अपील करते हुए अपना केस दायर कर दिया।
दिलचस्प है कि पीएसईआरसी ने सारी सुनवाई के बाद 25 नवंबर को कंपनी को बरी करने के साथ ही ग्राहक को नाहक परेशान करने व अवैध तरीके से नियमों के विपरीत कार्रवाई करने पर हर्जाना देने के आदेश भी जारी कर दिए।
पीएसईआरसी ने पीएसटीसीएल के चीफ इंजीनियर आरके शर्मा और ओपन एक्सेस के सुपरीटेंडिंग इंजीनियर एके मठारू पर नियमों के विपरीत बिजली कनेक्शन काटने पर कार्रवाई करने को भी कहा है। इसके अलावा 18.45 रूपये जुर्माने की राशि में से दी गई पहली किश्त की वापसी छह दिसंबर तक सुनिश्चित करने और एक लाख रूपया हर्जाना देने के आदेश भी दिए हैं।
वहीं पावरकाम प्रवक्ता का कहना है कि पीएसईआरसी के आदेशों अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई उक्त दोनों अधिकारियों के खिलाफ की जाएगी। साथ ही अधिकारी ये भी बताते हैं कि सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन के नियम पीक लोड के दौरान फ्रिक्वेंसी गिरने की स्थिति में भी बिजली लेने पर खामोश हैं, जबकि प्रदेश में 'ओपन एक्सेसÓ के तहत किसी भी इंडस्ट्री को तय सीमा से अधिक बिजली लेने की अनुमति नहीं है।
याद रहे कि उक्त इंडस्ट्री ने अपनी अपील में कहा कि ओपन एक्सेस में किए गए समझौते में यह कहीं नहीं कहा गया कि पीक लोड समय तक ही बिजली ली जाएगी। ऐसे में उसने बिजली ले कर गलत नहीं किया है। हालांकि बिजली इंजीनियर यह भी कहते हैं कि अगर फ्रिक्वेंसी च्यादा गिरे और उपभोक्ता लगातार बिजली लेते रहें तो ग्रिड के फेल होने का खतरा बन पड़ता है। संभव है कार्रवाई इसी स्थिति में की गई।