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Monday, 4 June 2012

ना इंडस्ट्री ना प्लांट, फिर भी प्रदूषण से मुक्ति नहीं, No industry, no plant, still no relief from pollution


पर्यावरण दिवस आज
 जिस नदी अथवा ख्वाजा की पूजा करते बुजुर्ग करते थे उसमें सीवरेज डाल दिया गया

-शहर के फैंफड़े कहे जाने वाली बारांदरी के दुर्लभ पेड़ों की जड़ों में पेस्टीसाइड डाल सांस की नली में छेद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी
फोटो: 1 से 3
भूपेश चट्ठा, पटियाला
उत्तर भारत के दूसरे सबसे कम प्रदूषित शहर का दर्जा रखने वाले पटियाला शहर में ना तो जालंधर की तरह लेदर की इंडस्ट्री है और ना ही लुधियाना की तरह इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री और ना ही बठिंडा की तरह कोई थर्मल प्लांट ही लगा है जिससे सोचा जा सके कि 'विकास का पहिया घूमेगाÓ तो थोड़ा बहुत 'साइड इफेक्टÓ बर्दाश्त करना भी पड़ेगा। लेकिन ऐसा कुछ विकासोन्मुखी कारण ना होने के बावजूद शहर को प्रदूषण से मुक्ति नहीं मिल पाई है।
दिलचस्प है कि शहर के सबसे पुराने औद्योगिक क्षेत्र फैक्ट्री एरिया में अब फैक्ट्री तो कोई रही नहीं और प्लाट कट कर रिहायशी मकान बन पड़े हैं और कुछ यहां ना हुआ तो लोगों ने अपने घरों ा कूड़ा कचरा ही छोटी नदी में उड़ेलना शुरु कर दिया। शुरु में तो सड़क चौड़ी होती रही पर अब लगातार बनी रहने वाली दुर्गंध का कारण बन गई है।
वर्तमान में इंडस्ट्री का हब बनाए गए फोकल प्वाइंट में मार्बल व टाइलों के गोदाम ज्यादा है और उत्पादन करने वाली ईकाइयां कम हैं ऐसे में इंडस्ट्री से होने वाला प्रदूषण कम और वाहनों का धुआं यहां पर ज्यादा दिखाई देता है।
शहर भर के अस्पतालों व सेहत संस्थानों से निकलने वाली बायो मेडिकल वेस्ट को तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दुरुस्त र दिया पर घरेलू कचरा उठवाने में नगर निगम के दावे ठुस्स ही रहें हैं। हालांकि सनौरी अड्डा के पास के डंपिंग ग्राउंड के आसपास के लोगों को राहत जरूर मिल गई है।
शहर की जिस नदी को बुआ का दर्जा प्राप्त था और जिसे समय समय पर यहां के महाराजा 'नत्थ व चूड़ाÓ चढ़ा कर शान्त रहने की गुहार लगाई जाती थी और जिसके  किनारे पर पटियाला बसा था, वो 'पटियाला की रावÓ अब पूरी तरह से गंदा नाला बन गई है। कारण एकमात्र है कि जिस नदी अथवा ख्वाजा की पूजा करते बुजुर्ग करते थे उसमें सीवरेज डाल दिया गया है।
शहर के फैंफड़े कहे जाने वाली बारांदरी में नए पेड़ लगाने के नाम पर अशोका गाड़ दिया गया जबकि आसपास रहने वाले रईसों पेड़ों के गिरे पत्ते पसंद नहीं है या कोई पेड़ कथित रूप से वास्तु दोष उत्पन्न करता है, तो इस शहर में ऐसे लोग भी हुए हैं जिन्होंने दुर्लभ पेड़ों की जड़ों में पेस्टीसाइड डाल कर एतिहासिक बारांदरी अथवा सांस की नली में छेद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

पर्यावरण दिवस पर संकल्प, environment day, resolution


 जिले का पर्यावरण दुरुस्त करना है: डिप्टी कमिश्नर जीके सिंह
फोटो: 40
पटियाला के डिप्टी कमिश्नर और पर्यावरण पर अक्सर लिखते रहने वाले जीके सिंह इस साल पर्यावरण दिवस पर बधाई देने के साथ ही कहते हैं कि जिले की हवाओं को जहर मुक्त करना है, जिले के दरियाओं  और धरती को पूरी तरह से सुरक्षित करने की दिशा में पेस्टिसाइड मुक्त खेती को बढ़ावा देना और पौधारोपण के अभियान चलाए जाएंगे।

शहर को डंपिंग ग्राउंड से मुक्त करवाना है: मेयर अजीतपाल सिंह कोहली
फोटो: 41
शहर को डंपिंग ग्राउंड से मुक्त करवाना है और शहर के हर नागरिक को प्रदुषण मुक्त स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध करवाना है। मेयर अजीतपाल सिंह कोहली कहते हैं कि अगले पर्यावरण दिवस से काफी पहले ही कूड़ा कचरा हटा दिया जाएगा। हर घर के बाहर से कूड़ा कचरा हटा कर शहर से बाहर ले जाया जाएगा। मेयर कहते हैं कि हम हर चीज पर्यावरण से लेते हैं ऐसे में हमारा भी फर्ज बनता है कि आसपास का पर्यावरण ठीक रखें और मेयर होने की स्थिति में उनकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

यूनिवर्सिटी कैंपस को स्मोक फ्री बनाना है: वाइस चांसलर डा. जसपाल सिंह
फोटो: 39

पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के वाइस चांसलर डा. जसपाल सिंह कहते हैं कि उनका संकल्प है कि इस साल में वे यूनिवर्सिटी कैंपस को स्मोक फ्री बना दें। पर्यावरण की दिशा में कैंपस को और अधिक हरा भरा बनाने के प्रयास के अलावा पाठयक्रम में वे पर्यावरण को हिस्सा बनाना चाहते हैं। बताते हैं कि जूलोजी विभाग को अब जूलोजी व पर्यावरण विभाग करने के अलावा एमए पर्यावरण नाम से इस साल नया पाठयक्रम से शुरु किया गया है। इसी विषय पर सेमीनार इत्यादि भी करवा कर जागरुकता लाने का प्रयास करेंगे।

छप्पड़ों से प्रदूषित हो रहे भूमिगत जल को बचाना है: पंचायती राज मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा
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गांवों में छप्पड़ों अथवा दूषित पानी के तालाबों से प्रदूषित हो रहे भूमिगत जल को बचाने का सपना संजोए पंचायती राज व ग्रामीण विकास राच्य मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा कहते हैं कि इन तालाबों का पानी प्रदूषण मुक्त कर सिंचाई के काम लाने तक के प्रयास करने है और पंचायतों को साथ लेकर इसी मानसून में पौधे लगाने का कार्यक्रम है इससे ना केवल अच्छा लेंड स्केप होगा अपितु पर्यावरण भी बेहतर करने में सहयोग मिलेगा है। वे कहते हैं कि साढ़े बारह हजार गांव हैं एक में 50 पेड़ भी लग गए तो पंजाब हरा भरा हो जाएगा।


थर्मल प्लांटों में उपाय किए जा रहे हैं पौधारोपण भी करेंगे: चेयरमैन पावरकाम इंजी. केडी चौधरी
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 पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी कहते हैं कि पावरकाम थर्मल प्लांटों में से प्रदूषण कम से कम करने के उपाय कर रहा है और आसपास के क्षेत्रों में पौधरोपण करवाया गया है। पिछले साल पावरकाम के विभिन्न कार्यालयों में एक लाख से अधिक पौधे लगाए थे। इस बार इससे भी सघन अभियान चलाया जाएगा। व्यक्तिगत संकल्प के नाम पर वे कहते हैं कि पर्यावरण का वे सदैव ख्याल रखते हैं और जीवन में अपनाया है।