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Saturday, 19 March 2011

लोकां ने पीती तुपका तुपका मैं तां...हुण उतरुं किंवे festival, holi, trends, whisky,


भूपेश चट्ठा, पटियाला
लोकां ने पीती तुपका तुपका मैं तां पीती बाटे नाल... मै क्हया चड़ गई ओए छराटे नाल...विवाह शादी की पार्टी हो या किसी खास के साथ शाम का समां तो बब्बू मान की ये पंक्तियां खासी लुभावनी हो थिरकने को कहती है। बात होली की हो तो सुबह-शाम का बंधन नहीं रहता, हर आम खास हो जाता है। ऐसे में पीने पिलाने के नाप तौल दर किनार हो जाते है या फिर कर दिए जाते है पर इसके बाद का वक्त होली के मतवालों और घरवालों दोनों के लिए मुसीबत लाया होता है।
होली पर शराब से भाग और अफीम से गंजा तक का सेवन होता है और  दिलचस्प तथ्य है कि इनमें से कुछ तो एक दूसरे के लिए दवा का काम भी  करते है पर यह भी  सही है कि जो खुद को शिव भक्त बताते है वो मां काली के पुजारी नहीं हो पाते। फाईव ऐलीमेंट हैल्थ एंड एजूकेशनल सोसायटी के डा. जोगिंदर टाईगर बताते है कि भाग या अफीम ज्यादा हो जाए तो एक या दो पैग पिलाने से उनका नशा उतर जाता है ऐसे ही शराब ज्यादा हो जाए तो अफीम कारगर होती है लेकिन किसी तरह की दवा लेने से बचना चाहिए। आम तौर पर नशा ज्यादा होने पर  नीबूं पिलाने लग जाते है जो गलत है। भाग के नशे को तो यह कई गुणा बढ़ा देता है। शराब और नींबू दोनों में ही एसिड है ऐसे में ये उछल पड़ती है और कई बार ब्लड प्रैशर बहुत कम कर देता है। इसकी बजाए ज्यादा पानी पिला बाहर निकालनी ज्यादा ठीक है।
शराबी हालात होने पर ताजा कच्चे दूध के दो गिलास हों यदि ना मिले तो फ्रिज का ठंडा दूध कारगर है पर बिना चीनी के। अक्सीजन मॉस्क के चार बड़े सांस भी  शराब उतार देते है। एंटासीड के दो-दो च मच एक एक घंटे के अंतराल पर दिए जा सकते है।
अगर व्यक्ति मदहोशी की हालत में आ जाए तो दोनों नाक के दोनों नथुनों के बीच के स्थान को दबाने से होश आ जाता है और उपर के दोनों बीच के दांतों के बीच से शुरू होने वाली नस यहीं से गुजरती है।
दूसरी ओर शराबी को पंजाब में प्यास लगने आधा रिड़का हुआ दही और टोपी तोड़ दांत में दबाए हुए दो लौंग तेजाबीपन कम करने और हिचकी रोकने में कारगर माने जाते है। उल्टी आने पर काले नमक की चुटकी या फिर सिर्फ सोडे में नींबू नमक बर्फ के साथ पिलाने का नुस्खा  चलन में है। जबकि भाग चढऩे पर साधारण चने सर्वश्रेष्ठ उपाय है। गला तेजी से सूखता है पर कुछ ही मिनट में व्यक्ति कैलाश पर्वत से उतर आता है।
वहीं फार्माकालोजी क्षेत्र के जाने माने नाम डा. पीपी खोसला कहते है किसी तरह का टोटका नहीं आजमाना चाहिए। यह बहुत ही रिस्की होता है। ये लोग कई तरह के जुगाड़ करते है हर आदमी नुक्ते समझा रहा होता है। लेकिन बेहतर तो अस्पताल में भर्ती करवाना और मेडीकल केयर उपलब्ध करवाना ही है। हालांकि ले ाक केएस धलीवाल इससे इत्तेफाक नहीं करते वे कहते है कि ड्रिंक्स के साथ डाइट जरूरी है। नशा ठीक ठाक भी हो तो हैंग ओवर उतारने बर्फ बराबर ठंडे पानी के साथ रेस्ट इज बेस्ट।
लेकिन बेहतर तो ये है की पीने से पहले मखन या नारियल खा ले


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Tuesday, 8 February 2011

अपणा पंजाब होवे.. पर न शराब होवे

अपणा पंजाब होवे पर दारू दी दुकान ना होवे
-71 गांवों की पंचायतों ने आबकारी विभाग को प्रस्ताव भेजा हमारे यहां ठेका बंद हो
-विभाग ने पूछा आखिर ऐतराज क्या है, हर्ज क्या है?

भूपेश चट्ठा, पटियाला
अपणा पंजाब होवे, घर दी शराब होवे, मूली नाल गंडा (प्याज) होवे, बाण वाला मंजा होवे..।
गुरूदास मान के इस लोकप्रिय हिट का पंजाब के गांवों विशेष रूप से मालवा क्षेत्र की पंचायतों ने नकारना शुरू कर दिया है। आबकारी नीति आने से पहले 71 गांवों की पंचायतों ने आबकारी विभाग को प्रस्ताव पारित कर दिया है कि उनके यहां शराब का ठेका ना खोला जाए और विभाग ने आज कुछ पंचायतों के प्रतिनिधियों को बुलवा कर सुनवाई भी की है कि आखिर उन्हें 'एतराज क्या है?Ó, 'हर्ज ही क्या है?Ó
पंजाब का डोमोसाइल बनते ही पैग के साथ नाता या तो जुड़ जाता है या फिर जोड़ दिया जाता है और आबकारी आयुक्त के मुख्यालय वाले शहर पटियाला में यह नाता कुछ ज्यादा ही गहरा और करीब का है। एक ओर जहां गांव की पंचायतों में शराब के ठेके बंद करवाने प्रति जागरूकता बढ़ी है वहीं विभाग ने भी 'गहराई से छानबीनÓ शुरू कर दी है कि कहीं इस सादगी के पीछे अफीम तस्करों या अवैध शराब बेचने वालों का हाथ तो नहीं है।
प्रदेश में पिछले साल ऐसी पंचायतों की संख्या 55 थी और अब बढ़ कर 71 हो गई है। सबसे अधिक जागरुकता लाने वालों में संगरूर जिला है जहां सेे 44 पंचायतों ने ऐसे आवेदन किए है। दिलचस्प है कि पिछले साल आबकारी विभाग ने कुछ पंचायतों का यह आवेदन विभिन्न तर्क दे कर रद्द कर दिया था।
संगरूर के ही एडवोकेट कमल आनंद बताते है कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत गांव की पंचायत प्रस्ताव पारित करे तो गांव में से ठेका हटाया जा सकता है या फिर खुलने से ही रोका जा सकता है। पर ज्यादातर को पता ही नहीं है कि लोकतंत्र में जन प्रतिनिधियों को क्या अधिकार है। संगरूर के कुछ एनजीओ ने लोगों को बताया तो इस दिशा में प्रगति हुई है, पिछले साल कि तुलना में इस बार संख्या भी बढ़ी है।
वहीं सकरोदी गांव के सरपंच हरिंदर सिंह कहते है कि अभी तो उनके पंच को आबकारी कमीश्नर ने 'देखते हैÓ का ही आश्वासन मिला है। हम से पूछा गया कि आप गांव का शराब का ठेका क्यों बंद करवाना चाहते हो। तुम्हारे गांव में तो अवैध शराब पकड़ी गई थी मामला भी दर्ज है, लेकिन हमने उन्हें बताया कि ऐसा कुछ भी नही हुआ हम तो बस इस बीमारी को ही दूर रखना चाहते है।
उधर आबकारी कमीश्नर वैणु प्रसाद बताते है कि इस साल अभी तक उनके पास 71 आवेदन आए है और कुछ पंचायतों के प्रतिनिधियों से बुलवा कर बात की गई है लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। वे मामला देख रहे है।

पंजाब में वर्ष 2009-10 में अंग्रेजी व देशी शराब की करीब 29 करोड़ बोतलें बिकीं। सरकार को शराब बिक्री से वर्ष 2007-08 में शराब से 1800 करोड़ रुपये, 2008-09 में 2000 करोड़ व वर्ष 2010 में 2500 करोड़ रुपये का टैक्स प्राप्त हुआ। (स्रोत : विभागीय आंकड़े