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Wednesday, 9 May 2012

गरीबों का निवाला, अमीरों के प्याले में, Rotten wheat means cheap vodka or sugar free whisky


 -सड़े अनाज से बनेगी वोदका और शूगर फ्री व्हीस्की
-धान से भी बीयर बनाने का आया था विचार
-हिमाचल प्रदेश में सड़ते फलों का उपयोग हुआ है वाइन बनाने में
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब के गोदामों और अनाज भंडारण के लिए खुले में बनाई गई प्लींथों पर रखे हुए अनाज का एक हिस्सा अब देश में गरीब का निवाला नहीं बन पाएगा। इस पर 'नॉट फिट फॉर हयूमन कन्जंपशन' का ठप्पा लग चुका है। लेकिन निराश होने वाली बात नहीं है, केंद्र सरकार की 'भंडारण नीति' और रेलवे की अनाज 'ढुलाई गति' इस सड़े अनाज को अमीर के प्याले में डालने वाली है वो भी भारी सब्सिडी  के साथ।

शराब  पर चाहे जितना आबकारी कर लग रहा हो पर शराब बनाने वाली कंपनियों को पंजाब में सड़ चुका करीब 47 हजार टन अनाज इस साल सब्सिडी के साथ अथवा बाजार भाव स एक तिहाई दामों पर मिलने वाला है। अगले साल भी ग्रेन बेस शूगर फ्री व्हीस्की अथवा सस्ती वोदका  बनाने वाली किसी कंपनी को 'कच्चे मालÓ की कमी ना आए इसका प्रबंध भी सरकार ने कर दिया है। उक्त मात्रा से चार से पांच हजार टन सड़ा अनाज अगले साल भी नीलाम किया जाएगा। संभव है तब तक हमारी व्यवस्था प्राकृति की आड़ में कुछ ऐसे और 'इंतजामÓ कर दे कि फिर आने वाले सालों में भी कमी ना आने पाए।

राज्य सरकार की अनाज खरीद एजेंसियों की तालमेल कमेटी के चेयरमैन भुपिंदर सिंह कहते हैं कि खराब होने वाली गेहूं का आंकड़ा आधा से एक फीसद ही है। इसे बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जा रहा है, लेकिन अगर अनाज खराब हुआ है, तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए पर आप इसे सिर्फ कर्मियों के सिर पर नहीं थोप सकते। केंद्र सरकार के मापदंड अनुसार गेहूं की सेल्फ लाइफ नौ महीने है पर पंजाब के गोदामों में 2009 का गेहूं भी पड़ा है। 2005 में मामला स्र्वोच्च न्यायालय तक जाने के बाद एएफसीआई ने एक साल में ही गेहूं उठवाने की बात स्वीकार की थी पर अब फिर हालात वहीं के वहीं आ गए हैं।  

वहीं पंजाब में एकबारगी सड़कों पर खराब होते धान को ठिकाने लगाने 'नई तकनीकि' की तलाश कर सस्ती बीयर बनाने का विचार भी यहां के नेता दे चुके हैं। वर्ष 2002 के बाद चलाए गए 'डाइवरसीफिकेशन' अभियान के दौरान कहा गया कि द्वी फसलीय चक्र ने जौ व गन्ने की खेती अधीन रकबा खत्म कर दिया है। और हम धान की पैदावार इतनी बढ़ा चुके हैं कि संभल नही रहा। तर्क दिया गया कि हिमाचल प्रदेश के दूर दराज के पहाड़ी क्षेत्रों में फल उगते ज्यादा हैं पर मैदानों तक लाना खासा मंहगा हो जाता है। ऐसे में वहां की सरकारों ने 'वाइन पालिसी' बनाई और राजस्व बढ़ाने के साथ रोजगार भी उपलब्ध करवा दिया। हाल ही के वर्षों का उदाहरण दे उक्त खुलासे के साथ सोशल साइंसेज एंड हेल्थ फोरम के डा. पीपी खोसला कहते हैं कि पंजाब के अनाज और देश के हालात का आप इस तरह से नहीं देख सकते। आपको अनाज सडऩे से रोकने के ही उपाय करने होंगे। या तो आप जमीन की कीमत के आधार पर गोदामों का किराया बढ़ाएं या फिर जहां सस्ते गोदाम हैं वहां मानसून आने से पहले गेहूं ले जाएं। डा. खोसला कहते हैं कि गेहूं और धान ही क्यों खराब होता है? केंद्र के संस्थान एफसीआई का चावल तो कभी नहीं सड़ता?  

Wednesday, 23 February 2011

...पर अभी और सड़ेगा अनाज

पिछले साल 94 लाख टन था इस साल एक अप्रैल को 87.4 टन होगा

-80 लाख टन भंडारण क्षमता बढ़ानी थी बढ़ी 4.97 लाख

-दोबारा नई नीति के तहत टेंडर आएंगे: एफसीआई

भूपेश चट्ठा, पटियाला

वर्ष 2008-09 का गेहूं पंजाब में पड़ा है, 2009-10 के गेहूं के साथ चावल और धान भी अभी तक यहीं है, और एक महीने बाद करीब 124 लाख टन गेहूं की फसल आ जानी है, लेकिन दिलचस्प है कि देश भर में जहां मंहगाई का कुचक्र चल रहा है वहीं पंजाब में अनाज को सडऩे से रोकने के उपाय करने की दिशा में रेंगने की गति से 'उपलब्धीÓ हासिल की गई है। ऐसे में आम आदमी के नाम खरीदा गया अनाज अभी और सड़ेगा और करदाता इसका भुगतान करेगा।

फूड कारपोरेशन आफ इंडिया और पंजाब के खाद्य एंव आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने पिछले साल किए एक संयुक्त अध्ययन में पाया कि राज्य में 80 लाख टन भंडारण क्षमता बढ़ाने जरूरत है। हालांकि राज्य में 106 लाख टन कवर्ड स्टोरेज क्षमता है तो करीब 90 लाख टन खुले आसमान में भंडार करने की व्यवस्था है। याद रहे कि पिछले साल टेंडर प्रक्रिया शुरू होते ही पंजाब को 71 लाख टन भंडारण करने को कह दिया, यह हिस्सा एक बार फिर कम कर 50 लाख टन कर दिया गया। पर अब 63 स्थानों पर होने वाला नया भंडारण 14 स्थानों पर होगा वो भी मात्र 4.97 लाख टन।

वहीं एफसीआई के डीजीएम असीम छाबड़ा ने 'दैनिक जागरणÓ को बताया कि पंजाब में पिछले साल एक अप्रैल को गेहूं व धान का भंडारण 94 लाख था और इस साल ये कुछ कम हो कर 87.5 लाख टन रहेगा। राज्य से हर महीने 17 लाख टन अनाज देश के अन्य 16 राज्यों को भेजा जा रहा है। पंजाब में भंडारण क्षमता ना बढ़ाने के सवाल पर वे कहते है कि केंद्र की नीति के तहत पांच रूपये प्रति टन से अधिक पर अलाट नहीं किया जा सकता। अब दोबारा 33 लाख टन के लिए दस साल की अवधि के टेंडर निकालने की प्रक्रिया चलाई जाएगी। प्रदेश में 13 लाख टन क्षमता बढ़ी है।

राज्य में आए ज्यादातर टेंडर 6.10 रूपये की दर से थे। इस दर पर क्षमता 40 लाख टन और बढ़ जाती, राज्य की ओर से ऐसी मांग भी रखी गई पर केंद्रीय नीति ने इसकी इजाजत नहीं दी।

स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के अलावा उपाय

राज्य की खरीद एजेंसियों की कोआर्डीनेशन कमेटी कहती है कि मामला एक राच्य या एक एजेंसी का नहीं है पूरे देश का है ऐसे में हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। स्टोरेज के लिए गांव में ही किसान व सरपंच को इंतजाम करने के अलावा आढ़ती की सेवाएं ली जा सकती है। इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य मासिक आधार पर तय हो जाए जिससे बिना कोई खर्च किए कालाबाजारी और जमाखोरी दोनों रूकेंगे भी और फायदा किसान को भी ले सकता है। बीपीएल और एपीएल परिवारों के लिए पहले हम गेहूं खरीद कर गोदाम में भेजते हैं फिर वहां से निकाल कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भेजा जाता है जबकि यह कार्य सीधा भी किया जा सकता है।

2007-08 में 2.90 लाख टन स्टोरेज क्षमता की प्लींथें तोड़ी
सरकार की एक नीति के तहत 2007-08 में वेयरहाउसिंग कारपोरेशन ने पंचायती जमीन पर बनी दो लाख टन स्टोरेज क्षमता की प्लींथें तोडऩे के आदेश जारी कर दिए। विभागीय सूत्र बताते हैं कि छहरटा में तो अगले ही साल 40 हजार टन क्षमता की प्लींथें फिर उसी स्थान पर बना भूल सुधार कर लिया गया। यही उपाय अब फिर किए जा रहे है, सूत्र बताते है कि प्रक्रिया शुरू की जा रही है।