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Wednesday, 31 August 2011

एडजस्ट हुआ स्व. टोहड़ा का गुट!, sgpc, politics, tohra,

भूपेश चट्ठा, पटियाला
शिरोमणि अकाली दल बादल में पंथ रत्न स्व. गुरचरण सिंह टोहड़ा के नेतृत्व में सर्व हिंद शिरोमणि अकाली दल के विलय के बाद एक हुए शिरोमणि अकाली दल में स्व. टोहड़ा के वफादारों को पूरा 'मान सम्मान' नहीं मिला तो प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के नेतृत्व में अकाली दल लोंगोवाल का गठन हो गया। लेकिन हर चुनाव में पंथ रत्न के समर्थकों को महसूस होता रहा कि उन्हें दोयम दर्जे का ही समझा जा रहा है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के होने जा रहे चुनावों में पहली बार स्व. टोहड़ा गुट को पूरी तरह एडजस्ट किया गया है। एसजीपीसी की पटियाला जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में दस सीटें हैं। सन्नौर की दो सीटों में से महिला के लिए आरक्षित पर पंथ रत्न की पुत्री कुलदीप कौर चुनाव लड़ रही हैं, तो दूसरी सीट पर जसमेर सिंह लाछड़ू प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के समर्थक हैं।
इसी प्रकार भादसों से सतविंदर सिंह टोहड़ा भी इसी गुट से हैं, तो स्व. टोहड़ा के ही वफादारों में से एक सुरजीत सिंह कोहली ने पटियाला शहर से शविंदर सिंह सभ्रवाल को उम्मीदवार बनवा लिया है। नाभा की दो सीटों में से एक कुलदीप नसूपुर को सुरजीत रखड़ा के कोटे से कहा जा सकता है, पर बात यहां पर भी पंथ रत्‍‌न के करीबियों की ही है। इसी क्रम में नाभा से महिला के लिए आरक्षित पर हरदीप कौर खाक व समाना से निर्मल सिंह हरिआउ और डकाला से जरनैल सिंह के नाम भी हैं, हालांकि डकाला से लाल सिंह देवीनगर के संपर्क सीधे हाईकमान से हैं। यही स्थिति राजपुरा से सुरजीत सिंह गढ़ी की है।
दिलचस्प है कि अकाली दल में पिछले चुनावों तक बैलेंस रखने के आधार पर ही शक्तियों का बंटवारा होता आया है पर सीधे हाईकमान से संपर्क रखने वालों की संख्या मात्र दो पर अटक जाने ने यह तय कर दिया है कि अब पार्टी गुटों से ज्यादा जीत को महत्व दे रही है।
भूपेश चट्ठा, पटियाला
शिरोमणि अकाली दल बादल में पंथ रत्न स्व. गुरचरण सिंह टोहड़ा के नेतृत्व में सर्व हिंद शिरोमणि अकाली दल के विलय के बाद एक हुए शिरोमणि अकाली दल में स्व. टोहड़ा के वफादारों को पूरा 'मान सम्मान' नहीं मिला तो प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के नेतृत्व में अकाली दल लोंगोवाल का गठन हो गया। लेकिन हर चुनाव में पंथ रत्न के समर्थकों को महसूस होता रहा कि उन्हें दोयम दर्जे का ही समझा जा रहा है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के होने जा रहे चुनावों में पहली बार स्व. टोहड़ा गुट को पूरी तरह एडजस्ट किया गया है। एसजीपीसी की पटियाला जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में दस सीटें हैं। सन्नौर की दो सीटों में से महिला के लिए आरक्षित पर पंथ रत्न की पुत्री कुलदीप कौर चुनाव लड़ रही हैं, तो दूसरी सीट पर जसमेर सिंह लाछड़ू प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के समर्थक हैं।
इसी प्रकार भादसों से सतविंदर सिंह टोहड़ा भी इसी गुट से हैं, तो स्व. टोहड़ा के ही वफादारों में से एक सुरजीत सिंह कोहली ने पटियाला शहर से शविंदर सिंह सभ्रवाल को उम्मीदवार बनवा लिया है। नाभा की दो सीटों में से एक कुलदीप नसूपुर को सुरजीत रखड़ा के कोटे से कहा जा सकता है, पर बात यहां पर भी पंथ रत्‍‌न के करीबियों की ही है। इसी क्रम में नाभा से महिला के लिए आरक्षित पर हरदीप कौर खाक व समाना से निर्मल सिंह हरिआउ और डकाला से जरनैल सिंह के नाम भी हैं, हालांकि डकाला से लाल सिंह देवीनगर के संपर्क सीधे हाईकमान से हैं। यही स्थिति राजपुरा से सुरजीत सिंह गढ़ी की है।
दिलचस्प है कि अकाली दल में पिछले चुनावों तक बैलेंस रखने के आधार पर ही शक्तियों का बंटवारा होता आया है पर सीधे हाईकमान से संपर्क रखने वालों की संख्या मात्र दो पर अटक जाने ने यह तय कर दिया है कि अब पार्टी गुटों से ज्यादा जीत को महत्व दे रही है।

Friday, 4 February 2011

टोहरा युग के साथ, सिखों के पोप की सत्ता का अंत?



-भोग से संगत गायब, सिर्फ नेताओं का जमावड़ा

-टोहरा काल की रबड़ी जला हुआ दूध रह गई

भूपेश चट्ठा, टोहरा पटियाला


आज से छह साल पहले जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा के देहांत पर उत्तर भारत की हर सड़क टोहरा गांव की ओर ही जा रही थी। राज्य में कांग्रेस और केंद्र में संयुक्त प्रगतीशील गठबंधन की सत्ता होने के बावजूद शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के 21 बार प्रधान रहे स्व. जत्थेदार टोहरा को सिखों का पोप कह उन्हें पंथ रत्न का दर्जा दे दिया गया। गांव में केंसर अस्पताल से लेकर युनिवर्सिटी और स्टेडियम तक की घोषणाएं हो गई। इसके बाद टोहरा गांव में अकालियों कांग्रेसियों के इतने चक्कर लगे कि एक तरह से गांव को वेंटिकन सिटी का दर्जा प्राप्त हो गया पर आज पंथ रत्न की पत्नि स्व. बीबी जोगिंदर कौर के पाठ पर साफ संदेश देने की कोशिश कर दी गई है कि एक युग का अंत हो गया है और सिखों के पोप की सत्ता का भी औपचारिक अंत हो गया है।

पंथ रत्न की बरसी पर हर बार शामिल होने वाले हरनेक सिंह कहते है कि पिछले सालों में हर बरस होने वाले कार्यक्रमों में संगत लगभग बीस फीसदी की दर से कम होती जा रही थी पर अब तो बिलकुल ही गायब है, सरकार है तो सरकारी अमला है, इंतजाम है पर देखो लंगर भी वापिस भेजा जा रहा है, दरियां पूरी बिछाई ही नहीं गई जबकि जगह सिंगोड़ दी गई है। फिर भी ये हाल है। भोग से संगत गायब, सिर्फ नेताओं का जमावड़ा है या फिर उनके साथ आई एक रंग विशेष की खुफिया पगडिय़ां दिखाई दे रही है।

ऐसे ही भादसों में तैनात सरकारी कर्मी कहते है कि टोहरा काल की रबड़ी आज जला हुआ दूध रह गई है, सड़कें टूट रही है पैच वर्क की जरूरत है पर होगा नहीं यह तय है। पहले लोग अपनी मर्जी से यहां लगंर लगाने जद्दोजहद करते थे आज एसजीपीसी पर निर्भरता है।

दिलचस्प है कि स्व. बीबी जोगिंदर कौर के भोग पर एक बार फिर जत्थेदार टोहरा की स्मृति में स्मारक बनाने और एक शानदार स्टडी सेंटर खोले जाने की घोषणा को उपहास की दृष्टि से देखा गया है, भोग पर ही दबी जुुबां से विधान सभा चुनावों में पंथ रत्न की गोद ली पुत्री को टिकट के लिए हो रही कवायद से ज्यादा जोड़ा गया। कहा गया कि बादल साहब बाकी घोषणाएं छोड़ ये कर दे तो सब शांत है। ना कोई मनप्रीत खेमे में अपने बंदे भेजेगा और ना ही कोई कांग्रेसियों के संपर्क में रहेगा।

Wednesday, 2 February 2011

टोहरा स्मारक जल्द बनाए राज्य सरकार: परनीत कौर

विदेश राज्य मंत्री पहुंची बीबी टोहरा के देहांत पर अफसोस करने

भूपेश चट्ठा, टोहरा, पटियाला

शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के 21 बार प्रधान रहे पंथ रत्न गुरचरण सिंह टोहरा की स्मृति में घोषित किए गए स्मारक का निर्माण राज्य सरकार को जल्द करवाना चाहिए। ये विचार आज विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने टोहरा गांव में पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में व्यक्त किए है।

स्व. बीबी जोगिंदर कौर टोहरा के देहांत पर अफसोस करने पहुंची परनीत कौर ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने बीबी टोहरा के लिए कई सुविधाओं की घोषणाएं की थी। इसमें पटियाला में एक घर को खाली भी रखा गया। 15 हजार रूपये मासिक पैंशन के अलावा कैबिनेट रैंक का दर्जा शामिल था। हालांकि अकाली होने का कारण बता कांग्रेस कार्यकाल में स्व. बीबी टोहरा ने उक्त सुविधाएं लेने से इंकार कर दिया था। जबकि वर्तमान सरकार ने सत्ता में आने के 36 महीने बाद पिछले साल अगस्त में बीबी टोहरा को कैबिनेट रैंक का दर्जा दिया है।

इससे पहले परनीत कौर ने स्व. जोगिंदर कौर टोहरा की बेटी कुलदीप कौर टोहरा से मिल कर अफसोस प्रकट किया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री व पंथ रत्न के जंवाई हरमेल टोहरा और जिला परिषद सदस्य व नाती हरिंदरपाल सिंह टोहरा भी मौजूद रहे। याद रहे कि स्व. बीबी जोगिंदर कौर टोहरा का वृद्धा अवस्था की एक बीमारी के बाद 82 साल की उम्र में 26 जनवरी को देहांत हो गया था।

उल्लेखनीय है कि पंजाब सरकार ने हाल ही में बहादुर पुर गांव में जत्थेदार टोहरा की स्मृति में स्मारक बनाने की घोषणा की है, हालांकि एसजीपीसी के दो पूर्व प्रधान बीबी जागीर कौर और प्रो. कृपाल सिंह बडूंगर और वर्तमान प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ भी ऐसी ही घोषणाएं कर चुके है। लेकिन सिरे कोई भी नहीं चढ़ी। छह साल पहले बीबी जागीर कौर ने 2004 में मोहाली के गुरूद्वारा अंब साहिब में 'जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा इंस्टीटयूट आफ एडवांस सिख स्टडीजÓ बनाने की घोषणा की तो प्रो. बडूंगर ने पंथ रत्न की याद में चंडीगढ़ के सेक्टर 44 में आईएएस व आईपीएस ट्रेनिंग इंस्टीटयूट की घोषणा की। जबकि जत्थेदार मक्कड़ ने चपड़चिड़ी में एक शैक्षिक संस्थान की घोषणा कर रखी है। यह भी कागजों में ही है।

इतना ही नहीं मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी 10 नवंबर 2005 को ऐसा ही शिलान्यास किया लेकिन बात आज भी वहीं पर रुकी है जहां से शुरू हुई थी।