भूपेश चट्ठा, पटियाला
शिरोमणि अकाली दल बादल में पंथ रत्न स्व. गुरचरण सिंह टोहड़ा के नेतृत्व में सर्व हिंद शिरोमणि अकाली दल के विलय के बाद एक हुए शिरोमणि अकाली दल में स्व. टोहड़ा के वफादारों को पूरा 'मान सम्मान' नहीं मिला तो प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के नेतृत्व में अकाली दल लोंगोवाल का गठन हो गया। लेकिन हर चुनाव में पंथ रत्न के समर्थकों को महसूस होता रहा कि उन्हें दोयम दर्जे का ही समझा जा रहा है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के होने जा रहे चुनावों में पहली बार स्व. टोहड़ा गुट को पूरी तरह एडजस्ट किया गया है। एसजीपीसी की पटियाला जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में दस सीटें हैं। सन्नौर की दो सीटों में से महिला के लिए आरक्षित पर पंथ रत्न की पुत्री कुलदीप कौर चुनाव लड़ रही हैं, तो दूसरी सीट पर जसमेर सिंह लाछड़ू प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के समर्थक हैं।
इसी प्रकार भादसों से सतविंदर सिंह टोहड़ा भी इसी गुट से हैं, तो स्व. टोहड़ा के ही वफादारों में से एक सुरजीत सिंह कोहली ने पटियाला शहर से शविंदर सिंह सभ्रवाल को उम्मीदवार बनवा लिया है। नाभा की दो सीटों में से एक कुलदीप नसूपुर को सुरजीत रखड़ा के कोटे से कहा जा सकता है, पर बात यहां पर भी पंथ रत्न के करीबियों की ही है। इसी क्रम में नाभा से महिला के लिए आरक्षित पर हरदीप कौर खाक व समाना से निर्मल सिंह हरिआउ और डकाला से जरनैल सिंह के नाम भी हैं, हालांकि डकाला से लाल सिंह देवीनगर के संपर्क सीधे हाईकमान से हैं। यही स्थिति राजपुरा से सुरजीत सिंह गढ़ी की है।
दिलचस्प है कि अकाली दल में पिछले चुनावों तक बैलेंस रखने के आधार पर ही शक्तियों का बंटवारा होता आया है पर सीधे हाईकमान से संपर्क रखने वालों की संख्या मात्र दो पर अटक जाने ने यह तय कर दिया है कि अब पार्टी गुटों से ज्यादा जीत को महत्व दे रही है।
भूपेश चट्ठा, पटियाला
शिरोमणि अकाली दल बादल में पंथ रत्न स्व. गुरचरण सिंह टोहड़ा के नेतृत्व में सर्व हिंद शिरोमणि अकाली दल के विलय के बाद एक हुए शिरोमणि अकाली दल में स्व. टोहड़ा के वफादारों को पूरा 'मान सम्मान' नहीं मिला तो प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के नेतृत्व में अकाली दल लोंगोवाल का गठन हो गया। लेकिन हर चुनाव में पंथ रत्न के समर्थकों को महसूस होता रहा कि उन्हें दोयम दर्जे का ही समझा जा रहा है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के होने जा रहे चुनावों में पहली बार स्व. टोहड़ा गुट को पूरी तरह एडजस्ट किया गया है। एसजीपीसी की पटियाला जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में दस सीटें हैं। सन्नौर की दो सीटों में से महिला के लिए आरक्षित पर पंथ रत्न की पुत्री कुलदीप कौर चुनाव लड़ रही हैं, तो दूसरी सीट पर जसमेर सिंह लाछड़ू प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के समर्थक हैं।
इसी प्रकार भादसों से सतविंदर सिंह टोहड़ा भी इसी गुट से हैं, तो स्व. टोहड़ा के ही वफादारों में से एक सुरजीत सिंह कोहली ने पटियाला शहर से शविंदर सिंह सभ्रवाल को उम्मीदवार बनवा लिया है। नाभा की दो सीटों में से एक कुलदीप नसूपुर को सुरजीत रखड़ा के कोटे से कहा जा सकता है, पर बात यहां पर भी पंथ रत्न के करीबियों की ही है। इसी क्रम में नाभा से महिला के लिए आरक्षित पर हरदीप कौर खाक व समाना से निर्मल सिंह हरिआउ और डकाला से जरनैल सिंह के नाम भी हैं, हालांकि डकाला से लाल सिंह देवीनगर के संपर्क सीधे हाईकमान से हैं। यही स्थिति राजपुरा से सुरजीत सिंह गढ़ी की है।
दिलचस्प है कि अकाली दल में पिछले चुनावों तक बैलेंस रखने के आधार पर ही शक्तियों का बंटवारा होता आया है पर सीधे हाईकमान से संपर्क रखने वालों की संख्या मात्र दो पर अटक जाने ने यह तय कर दिया है कि अब पार्टी गुटों से ज्यादा जीत को महत्व दे रही है।
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