-पौंग बांध से बहा दिए 49 करोड़ बिजली यूनिट, बाढ़ आई सो अलग
-बांध 1430 फीट का, अधिकतम भराव क्षमता 1421 फीट, रिजरवायर 1400 फीट पर पानी छोड़ दिया 1380.4 फीट पर
-बीते साल बांध को 1394.5 फीट तक भरा गया था
भूपेश चट्ठा, पटियाला
मानसून के दिनों में उफनती ब्यास नदी की बाढ़ को रोकने बना पौंग बांध ही इस सीजन में बाढ़ का कारण बना है। बांध से छोड़े गए पानी के आंकड़े बताते हैं और कहते हैं कि भराव के पिछले इतिहास को देख थोड़ा संयम बरता होता तो ना केवल पौंग बांध से बही 49 करोड़ यूनिट बिजली बची होती अपितु सिंचाई के लिए पानी भी। वहीं अनावश्यक रूप से पानी छोड़े जाने से बाढ़ आई सो अलग।
दिलचस्प है कि बांध के स्पिल-वे गेटों को 14 अगस्त को खोला गया और 31 अगस्त तक इन्होंने 5.4 लाख क्यूसिक पानी नदी में उड़ेल दिया। इस पानी के साथ ही 396 मेगावाट क्षमता के बांध से करीब 27 करोड़ बिजली के यूनिट भी बह गए। पौंग पावर प्लांट से पानी नहीं गुजरा तो मुकेरिंयां हाइड्रो प्रोजेक्ट से भी 22 करोड़ यूनिट बनने थे।
भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड का यह पौंग बांध का उपरी हिस्सा 1430 फीट पर है जबकि इसके डिजाइन अनुसार अधिकतम भराव क्षमता 1421 फीट रखी गई है जबकि पूर्ण रिजरवायर 1400 फीट पर है। सभी छह यूनिट पूरी क्षमता पर चलाने इससे 17500 क्यूसिक पानी छोड़ा जाता है, पूरी क्षमता पर बिजली उत्पादन लेने वाला स्तर 1480 फीट पर आता है, जबकि 207 मेगावाट क्षमता के मुकेरिंयां हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए डिसचार्ज 11500 क्यूसिक चाहिए।
आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फैडरेशन के इंजी. पदमजीत सिंह की ओर केंद्रीय ऊर्जा सचिव सहित सभी संबंधित पक्षों को भेजे गए श्वेत पत्र में लिखा गया है कि वर्ष 2010 में बांध को 1394.5 फीट तक भरा गया और 15 से 18 सितंबर के बीच बहुत कम पानी छोड़ा गया, जबकि इस साल ये शुरुआत ना केवल अगस्त मध्य में ही 1480 के आंकड़े से पहले ही रिलीज करना शुरू कर दिया गया। जबकि बांध का भराव सीजन 21 सिंतबर तक है, इसके बाद पानी बहुत कम रिलीज किया जाता रहा है।
बाक्स : मापदंड
महीना, मिलीयन यूनिट, लोड, स्तर
-अक्टूबर 10 को,140, 52 फीसदी, 1388 फीट
-नवंबर, 172, 66 फीसदी, 1379 फीट
-दिसंबर, 170, 63 फीसदी, 1368 फीट
-जनवरी 11 को, 114, 43 फीसदी, 1361 फीट
-फरवरी, 165, 68 फीसदी, 1351 फीट
-मार्च, 103,38 फीसदी, 1345 फीट
-अप्रैल, 12, पांच फीसदी, 1349 फीट
-मई, 71, 27 फीसदी, 1350 फीट
-जून, 135, 52 फीसदी, 1351 फीट
पौंग बांध का न्यूनतम जल स्तर 1260 फीट है इसके अब तक के सबसे कम जल स्तरों में 26 अप्रैल 1982 में 1311 फीट, 25 जून 1978 में 1315 फीट रहा है। इसके बाद मानसून के दिनों में बांध फिर से भरने लगता है। इस साल जुलाई में प्लांट 81 फीसदी लोड फैक्टर पर चला, जबकि एक से 12 अगस्त के बीच इसे 65 फीसदी कर दिया। 14 अगस्त को सुबह नौ बजे गेट खोलने के बाद दोपहर तीन बजे 100 फीसदी लोड पर चलाया गया।
बांध से 70 हजार क्यूसिक तक पानी छोड़े जाने ने भारी तबाही मचाई। 15 से 19 अगस्त के बीच प्रदेश भर में भारी बारिश हुई और 17 अगस्त से 21 अगस्त के बीच जल स्तर 1388.02 फीट से गिरता हुआ 1386.83 फीट पर आ गया। जबकि 1400 फीट तक का गैप भविष्य की बाढ़ की संभावनाएं रोकने के लिए होता है। इंजी. पदमजीत कहते हैं कि उन्होंने लगातार ऊर्जा मंत्रालय के अलावा बीबीएमबी को 22, 23, 25, 29, 30 अगस्त को ईमैल किए हैं कि बांध को पिछले साल के स्तर तक भरने दो पर नहीं हुआ। कम से कम चार रूपये यूनिट की 50 करोड़ यूनिट बिजली के अलावा बहुमूल्य पानी बह गया।
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