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Thursday, 1 September 2011

बाढ़ रोकने बने बांध से निकली बाढ़, बिजली गई बेकार, dam, flood protection, reservior , pong, hydel,


-पौंग बांध से बहा दिए 49 करोड़ बिजली यूनिट, बाढ़ आई सो अलग
-बांध 1430 फीट का, अधिकतम भराव क्षमता 1421 फीट, रिजरवायर 1400 फीट पर पानी छोड़ दिया 1380.4 फीट पर
-बीते साल बांध को 1394.5 फीट तक भरा गया था
भूपेश चट्ठा, पटियाला
मानसून के दिनों में उफनती ब्यास नदी की बाढ़ को रोकने बना पौंग बांध ही इस सीजन में बाढ़ का कारण बना है। बांध से छोड़े गए पानी के आंकड़े बताते हैं और कहते हैं कि भराव के पिछले इतिहास को  देख थोड़ा संयम बरता होता तो ना केवल पौंग बांध से बही 49 करोड़ यूनिट बिजली बची होती अपितु सिंचाई के लिए पानी भी। वहीं अनावश्यक रूप से पानी छोड़े जाने से बाढ़ आई सो अलग।
दिलचस्प है कि बांध के स्पिल-वे गेटों को 14 अगस्त को खोला गया और 31 अगस्त तक इन्होंने 5.4 लाख क्यूसिक पानी नदी में उड़ेल दिया। इस पानी के साथ ही 396 मेगावाट क्षमता के बांध से करीब 27 करोड़ बिजली के यूनिट भी बह गए। पौंग पावर प्लांट से पानी नहीं गुजरा तो मुकेरिंयां हाइड्रो प्रोजेक्ट से भी 22 करोड़ यूनिट बनने थे।
भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड का यह पौंग बांध का उपरी हिस्सा 1430 फीट पर है जबकि इसके डिजाइन अनुसार अधिकतम भराव क्षमता 1421 फीट रखी गई है जबकि पूर्ण रिजरवायर 1400 फीट पर है। सभी छह यूनिट पूरी क्षमता पर चलाने इससे 17500 क्यूसिक पानी छोड़ा जाता है, पूरी क्षमता पर बिजली उत्पादन लेने वाला स्तर 1480 फीट पर आता है, जबकि 207 मेगावाट क्षमता के मुकेरिंयां हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए डिसचार्ज 11500 क्यूसिक चाहिए।
आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फैडरेशन के इंजी. पदमजीत सिंह की ओर केंद्रीय ऊर्जा सचिव सहित सभी संबंधित पक्षों को भेजे गए श्वेत पत्र में लिखा गया है कि वर्ष 2010 में बांध को 1394.5 फीट तक भरा गया और 15 से 18 सितंबर के बीच बहुत कम पानी छोड़ा गया, जबकि इस साल ये शुरुआत ना केवल अगस्त मध्य में ही 1480 के आंकड़े से पहले ही रिलीज करना शुरू कर दिया गया। जबकि बांध का भराव सीजन 21 सिंतबर तक है, इसके बाद पानी बहुत कम रिलीज किया जाता रहा है।
बाक्स : मापदंड 
महीना,   मिलीयन यूनिट,  लोड, स्तर
-अक्टूबर 10 को,140, 52 फीसदी, 1388 फीट
-नवंबर, 172, 66 फीसदी, 1379 फीट
-दिसंबर, 170, 63 फीसदी, 1368 फीट
-जनवरी 11 को, 114, 43 फीसदी, 1361 फीट
-फरवरी, 165, 68 फीसदी, 1351 फीट
-मार्च,    103,38 फीसदी, 1345 फीट
-अप्रैल,  12,  पांच फीसदी, 1349 फीट
-मई,     71,  27 फीसदी,  1350 फीट
-जून,    135, 52 फीसदी,  1351 फीट

पौंग बांध का न्यूनतम जल स्तर 1260 फीट है इसके अब तक के सबसे कम जल स्तरों में 26 अप्रैल 1982 में 1311 फीट, 25 जून 1978 में 1315 फीट रहा है। इसके बाद मानसून के दिनों में बांध फिर से भरने लगता है। इस साल जुलाई में प्लांट 81 फीसदी लोड फैक्टर पर चला, जबकि एक से 12 अगस्त के बीच इसे 65 फीसदी कर दिया। 14 अगस्त को सुबह नौ बजे गेट खोलने के बाद दोपहर तीन बजे 100 फीसदी लोड पर चलाया गया। 
बांध से 70 हजार क्यूसिक तक पानी छोड़े जाने ने भारी तबाही मचाई। 15 से 19 अगस्त के बीच प्रदेश भर में भारी बारिश हुई और 17 अगस्त से 21 अगस्त के बीच जल स्तर 1388.02 फीट से गिरता हुआ 1386.83 फीट पर आ गया। जबकि 1400 फीट तक का गैप भविष्य की बाढ़ की संभावनाएं रोकने के लिए होता है। इंजी. पदमजीत कहते हैं कि उन्होंने लगातार ऊर्जा मंत्रालय के अलावा बीबीएमबी को 22, 23, 25, 29, 30 अगस्त को ईमैल किए हैं कि बांध को पिछले साल के स्तर तक भरने दो पर नहीं हुआ। कम से कम चार रूपये यूनिट की 50 करोड़ यूनिट बिजली के अलावा बहुमूल्य पानी बह गया। 

Tuesday, 5 April 2011

प्राकृति: भाखड़ा में पानी भरपूर, मानसून तक नहीं किल्लत, nature, dam, save rain water, mansoon,


-भाखड़ा में पिछले साल से 75 फीट और  पौंग में 40 फीट ज्यादा है पानी
- एक अप्रैल से शुरू हुए भराव सीजन में दोगुना दिया जा रहा है पानी
-डेहर व रणजीत सागर में पानी बीते साल के आसपास
भूपेश चट्ठा, पटियाला
गर्मी की दस्तक चाहे राजस्थान से पंजाब या हिमाचल प्रदेश ना भी पहुंची हो लेकिन हिमाचल के बांधों से पंजाब होते हुए राजस्थान-दिल्ली-हरियाणा जाने वाले पानी की मांग यहां जरूर पहुंच गई है। लेकिन वर्षों बाद उत्तर भारत के चार बड़े बांधों में से दो की स्थिति ऐसी है कि कम से कम इस साल गर्मियों में मानसून आने तक पानी की किल्लत नहीं होने वाली है।

बांधों के पानी से पन बिजली उत्पादन करने वाले पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के पास आ रही सूचनाएं बताती है कि उत्तर के सबसे बड़े भाखड़ा बांध में तो पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में  75 फीट ज्यादा है और राजस्थान को पानी भेजने वाले पौंग बांध में जल स्तर बीते साल की तुलना में 40 फीट से भी ज्यादा है।

 बांधों में जल भराव का सीजन अप्रैल से शुरू हो कर सितंबर अंत तक चलता है। वर्ष 2010 में मानसून के रूप में प्राकृति खूब मेहरबान रही तो खेतों में भी सिंचाई को नहरी पानी की जरूरत कम ही रही तो बांधों में आवक 50 हजार क्यूसिक का आंकड़ा काफी समय तक पार किए रखी। भाखड़ा बांध में खतरे भराव क्षमता के निकट और खतरे के निशान तक भी आया और फ्लड गेट टेस्ट भी हुए और खोल भी दिए गए।

पावरकाम के आंकड़े बताते है कि सतलुज व व्यास नदियों पर बने बांधों में एक अप्रैल से तकनीकि रूप से शुरू हुए भराव सीजन के पांचवें दिन भाखड़ा का जल स्तर 1592.44 फीट पर है, जबकि पिछले साल इसी दिन ये 1517.00 फीट पर था। इसी प्रकार पौंग में पानी का स्तर 1345 फीट पर है तो पिछले साल यहां पर 1297 फीट पर पानी था। हालांकि डेहर में पानी पिछले साल से दो फीट कम 2922 फीट पर है जबकि रावी नदी पर बने रणजीत सागर बांध में पानी पिछले साल से छह मीटर ज्यादा है यहां स्तर 504 मीटर से उपर है।

दिलचस्प है कि भाखड़ा बांध से इस साल पानी छोड़े जाने का सिलसिला भी बीते साल से करीब दोगुना है। पानी की आवक जहां आठ हजार क्यूसिक पर है तो डिसचार्ज 16 हजार के पार। याद रहे कि इन दिनों में पिछले सा भी पानी की आवक सात हजार क्यूसिक के पास ही थी। पंजाब में ही प्रयोग होने वाले रणजीत सागर बांध से हालांकि पानी काफी कम छोड़ा जा रहा है यहां सात हजार की आवक पर डिसचार्ज चार हजार क्यूसिक से उपर रखा गया है। याद रहे कि पंजाब में पानी की जरूरत दस जून से धान की रोपाई के बाद ही पड़ती है और मानसून में भी जारी रहती है जबकि दिल्ली-राजस्थान में पानी की मांग मानसून आने तक सबसे ज्यादा रहती है। क्षेत्र में सामान्य मानसून जून अंत में आ जाता है।

Wednesday, 15 December 2010

ਲਬਾਲਬ ਬੰਨ੍ਹ ਅਤੇ ਬਿਜਲੀ ਵੀ ਭਰਪੂਰ

ਭੂਪੇਸ਼ ਚੱਠਾ ਪਟਿਆਲਾ
ਮਾਨਸੂਨ ਦਾ ਸਿੱਧਾ ਅਸਰ ਹੁਣ ਚਾਹੇ ਖਤਮ ਹੋ ਗਿਆ ਹੋ ਉੱਤੇ ਬਾਂਧੋਂ ਵਿੱਚ ਰੁਕਿਆ ਹੋਇਆ ਪਾਣੀ ਪੰਜਾਬ ਸਟੇਟ ਪਾਵਰ ਕਾਰਪੋਰੇਸ਼ਨ ਲਿਮਿਟੇਡ ( ਪਾਵਰਕਾਮ ) ਲਈ ਹੁਣ ਵੀ ਇੱਕ ਖਜਾਨੇ ਦੇ ਸਮਾਨ ਹੈ । ਵਰਖਾ ਦੇ ਸੀਜਨ ਦੀ ਅੰਤ ਦੇ ਢਾਈ ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਵੀ ਭਾਖੜਾ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਖਤਰੇ ਦੇ ਨਿਸ਼ਾਨ ਤੋਂ ਸਿਰਫ 17 ਫੀਟ ਹੇਠਾਂ ਹੀ ਉਤੱਰਿਆ ਹੈ । ਕੁਦਰਤ ਦੀ ਦਇਆ ਇਸ ਬਰਸ ਕੁੱਝ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਬਣੀ ਹੋਈ ਹੈ ਕਿ ਬਾਂਧੋਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਆਵਕ ਸਰਦੀ ਤੇਜ ਹੋਣ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਜਾਰੀ ਹੈ । ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਇਸ ਪਾਣੀ ਤੋਂ ਹੋ ਰਿਹਾ ਇਲਾਵਾ ਪਨ ਬਿਜਲੀ ਉਤਪਾਦਨ ਕਿਸੇ ਥਰਮਲ ਪਲਾਂਟ ਦੀ ਦੋ ਯੂਨਿਟਾਂ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਕੁਦਰਤ ਤੋਂ ਮਿਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ।
ਪਾਵਰਕਾਮ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਆਂਕੜੇ ਦੱਸਦੇ ਹਨ ਕਿ ਭਾਖੜਾ ਬੰਨ੍ਹ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਪੱਧਰ 1663 ਫੀਟ ਉੱਤੇ ਬਣਾ ਹੋਇਆ ਹੈ । ਇਹ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਦੀ ਤੁਲਣਾ ਵਿੱਚ 43 ਫੀਟ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਆਵਕ ਗੁਜ਼ਰੇ ਸਾਲ ਦੇ ਛੇ ਹਜਾਰ ਕਿਊਸਿਕ ਦੀ ਤੁਲਣਾ ਵਿੱਚ ਇਸ ਸਾਲ 73 ਸੌ ਕਿਊਸਿਕ ਬਣੀ ਹੋਈ ਹੈ । ਪੌਂਗ ਬੰਨ੍ਹ ਵਿੱਚ ਵੀ ਪਾਣੀ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਨਾਲ 63 ਫੀਟ ਜਿਆਦਾ ਪਾਣੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 1378 ਫੀਟ ਉੱਤੇ ਚੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ । ਬੰਨ੍ਹ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਆਵਕ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਨਾਲ 30 ਫੀਸਦੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇੱਥੇ 2844 ਕਿਊਸਿਕ ਪਾਣੀ ਆ ਰਿਹਾ ਹੈ । ਸਤਲੁਜ - ਬਿਆਸ ਨਦੀਆਂ ਉੱਤੇ ਬਣੇ ਉਕਤ ਬਾਂਧੋਂ ਦੇ ਇਲਾਵਾ ਰਾਵੀ ਨਦੀ ਉੱਤੇ ਬਣੇ ਰਣਜੀਤ ਸਾਗਰ ਬੰਨ੍ਹ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦਾ ਪੱਧਰ 517 ਮੀਟਰ ਉੱਤੇ ਬਣਾ ਹੋਇਆ ਹੈ , ਇੱਥੇ ਪਾਣੀ ਪੱਧਰ 17 ਮੀਟਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੈ । ਇਸ ਬੰਨ੍ਹ ਵਿੱਚ ਵੀ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਦੀ ਤੁਲਣਾ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦਾ ਆਣਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੀ ਹੈ ।
ਪਨ ਬਿਜਲੀ ਉਤਪਾਦਨ ਤੋਂ ਜੁਡ਼ੇ ਤਕਨੀਕੀ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਗਿਆਵਾਂ ਨੇ ਮੰਗਲਵਾਰ ਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਵਿੱਚ ਪੁੱਛੇ ਜਾਣ ਉੱਤੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਪਹਾੜਾਂ ਉੱਤੇ ਬਰਫ ਤਾਂ ਡਿੱਗਣ ਲੱਗੀ ਹੈ ਉੱਤੇ ਹੁਣੇ ਸਭ ਕੁੱਝ ਫਰੀਜ ਹੋ ਜਾਣ ਜਿਵੇਂ ਹਾਲਾਤ ਨਹੀਂ ਬਣੇ ਹਨ ਅਜਿਹੇ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਆਵਕ ਹੁਣ ਵੀ ਤੇਜ ਬਣੀ ਹੋਈ ਹੈ ।
ਉਲੇਖਨੀਯ ਹੈ ਕਿ ਭਾਖੜਾ ਬੰਨ੍ਹ ਵਿੱਚ ਨਿੱਤ 88 ਲੱਖ ਯੂਨਿਟ ਪਨ ਬਿਜਲੀ ਉਤਪਾਦਨ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਜਦੋਂ ਕਿ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਇੱਥੇ ਇਸ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਰੋਜਾਨਾ ਸਿਰਫ 60 ਲੱਖ ਯੂਨਿਟ ਬਿਜਲੀ ਪੈਦਾ ਹੋ ਰਹੀ ਸੀ । ਭਾਖੜਾ ਬਿਆਸ ਮੈਨੇਜਮੇਂਟ ਬੋਰਡ ( ਬੀਬੀਏਮਬੀ ) ਤੋਂ ਪੰਜਾਬ ਨੂੰ 119 ਲੱਖ ਯੂਨਿਟ ਬਿਜਲੀ ਮਿਲ ਰਹੀ ਹੈ , ਇੰਨਾ ਹੀ ਪੰਜਾਬ ਦਾ ਆਪਣਾ ਪਨ ਬਿਜਲੀ ਉਤਪਾਦਨ ਹੈ । ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਦੋਨਾਂ ਹੀ ਜਗ੍ਹਾ ਉੱਤੇ 85 - 83 ਲੱਖ ਯੂਨਿਟ ਬਿਜਲੀ ਪੈਦਾ ਹੋ ਰਹੀ ਸੀ ।

Tuesday, 14 December 2010

लबालब बांध और बिजली भी भरपूर

भूपेश चट्ठा पटियाला

मानसून का सीधा असर अब चाहे खत्म हो गया हो पर बांधों में रुका हुआ पानी पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) के लिए अब भी एक खजाने के समान है। बरसात के सीजन की समाप्ति के ढाई महीने बाद भी भाखड़ा में पानी खतरे के निशान से मात्र 17 फीट नीचे ही उतरा है। प्रकृति की मेहरबानी इस बरस कुछ इस तरह से बनी हुई है कि बांधों में पानी की आवक सर्दी तेज होने के बावजूद जारी है। प्रदेश को इस पानी से हो रहा अतिरिक्त पन बिजली उत्पादन किसी थर्मल प्लांट की दो यूनिटों के बराबर कुदरत से मिल रहा है।

पावरकॉम से प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि भाखड़ा बांध में जल स्तर 1663 फीट पर बना हुआ है। यह पिछले साल की तुलना में 43 फीट ज्यादा है और पानी की आवक बीते साल के छह हजार क्यूसिक की तुलना में इस साल 73 सौ क्यूसिक बनी हुई है। पौंग बांध में भी पानी पिछले साल से 63 फीट अधिक पानी है और यह 1378 फीट पर चल रहा है। बांध में पानी की आवक पिछले साल से 30 फीसदी ज्यादा है और यहां 2844 क्यूसिक पानी आ रहा है। सतलुज-ब्यास नदियों पर बने उक्त बांधों के अलावा रावी नदी पर बने रणजीत सागर बांध में पानी का स्तर 517 मीटर पर बना हुआ है, यहां जल स्तर 17 मीटर ज्यादा है। इस बांध में भी पिछले साल की तुलना में पानी का आना ज्यादा ही है।

पन बिजली उत्पादन से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों ने मंगलवार को इस बारे में पूछे जाने पर बताया कि पहाड़ों पर बर्फ तो गिरने लगी है पर अभी सब कुछ फ्रीज हो जाने जैसे हालात नहीं बने हैं ऐसे में पानी की आवक अब भी तेज बनी हुई है।

उल्लेखनीय है कि भाखड़ा बांध में प्रतिदिन 88 लाख यूनिट पन बिजली उत्पादन हो रहा है जबकि पिछले साल यहां इन दिनों में रोजाना मात्र 60 लाख यूनिट बिजली पैदा हो रही थी। भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) से पंजाब को 119 लाख यूनिट बिजली मिल रही है, इतना ही पंजाब का अपना पन बिजली उत्पादन है। पिछले साल दोनों ही जगह पर 85-83 लाख यूनिट बिजली पैदा हो रही थी।