-भाखड़ा में पिछले साल से 75 फीट और पौंग में 40 फीट ज्यादा है पानी
- एक अप्रैल से शुरू हुए भराव सीजन में दोगुना दिया जा रहा है पानी-डेहर व रणजीत सागर में पानी बीते साल के आसपास
भूपेश चट्ठा, पटियाला
गर्मी की दस्तक चाहे राजस्थान से पंजाब या हिमाचल प्रदेश ना भी पहुंची हो लेकिन हिमाचल के बांधों से पंजाब होते हुए राजस्थान-दिल्ली-हरियाणा जाने वाले पानी की मांग यहां जरूर पहुंच गई है। लेकिन वर्षों बाद उत्तर भारत के चार बड़े बांधों में से दो की स्थिति ऐसी है कि कम से कम इस साल गर्मियों में मानसून आने तक पानी की किल्लत नहीं होने वाली है।
बांधों के पानी से पन बिजली उत्पादन करने वाले पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के पास आ रही सूचनाएं बताती है कि उत्तर के सबसे बड़े भाखड़ा बांध में तो पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में 75 फीट ज्यादा है और राजस्थान को पानी भेजने वाले पौंग बांध में जल स्तर बीते साल की तुलना में 40 फीट से भी ज्यादा है।
बांधों में जल भराव का सीजन अप्रैल से शुरू हो कर सितंबर अंत तक चलता है। वर्ष 2010 में मानसून के रूप में प्राकृति खूब मेहरबान रही तो खेतों में भी सिंचाई को नहरी पानी की जरूरत कम ही रही तो बांधों में आवक 50 हजार क्यूसिक का आंकड़ा काफी समय तक पार किए रखी। भाखड़ा बांध में खतरे भराव क्षमता के निकट और खतरे के निशान तक भी आया और फ्लड गेट टेस्ट भी हुए और खोल भी दिए गए।
पावरकाम के आंकड़े बताते है कि सतलुज व व्यास नदियों पर बने बांधों में एक अप्रैल से तकनीकि रूप से शुरू हुए भराव सीजन के पांचवें दिन भाखड़ा का जल स्तर 1592.44 फीट पर है, जबकि पिछले साल इसी दिन ये 1517.00 फीट पर था। इसी प्रकार पौंग में पानी का स्तर 1345 फीट पर है तो पिछले साल यहां पर 1297 फीट पर पानी था। हालांकि डेहर में पानी पिछले साल से दो फीट कम 2922 फीट पर है जबकि रावी नदी पर बने रणजीत सागर बांध में पानी पिछले साल से छह मीटर ज्यादा है यहां स्तर 504 मीटर से उपर है।
दिलचस्प है कि भाखड़ा बांध से इस साल पानी छोड़े जाने का सिलसिला भी बीते साल से करीब दोगुना है। पानी की आवक जहां आठ हजार क्यूसिक पर है तो डिसचार्ज 16 हजार के पार। याद रहे कि इन दिनों में पिछले सा भी पानी की आवक सात हजार क्यूसिक के पास ही थी। पंजाब में ही प्रयोग होने वाले रणजीत सागर बांध से हालांकि पानी काफी कम छोड़ा जा रहा है यहां सात हजार की आवक पर डिसचार्ज चार हजार क्यूसिक से उपर रखा गया है। याद रहे कि पंजाब में पानी की जरूरत दस जून से धान की रोपाई के बाद ही पड़ती है और मानसून में भी जारी रहती है जबकि दिल्ली-राजस्थान में पानी की मांग मानसून आने तक सबसे ज्यादा रहती है। क्षेत्र में सामान्य मानसून जून अंत में आ जाता है।