Sunday, 18 September 2011

खास नहीं, आम हुआ पटियाला का मतदान, sgpc, election, voting

उप मुख्य संवाददाता, पटियाला
देश में लोकसभा के चुनाव हों या राज्य में विधानसभा के, पटियाला को प्रतिष्ठित चुनाव क्षेत्रों में रखा जाता रहा है। लेकिन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की दस सीटों वाले पटियाला में इस बार चुनाव वीवीआईपी न होकर पूरी तरह से आम होकर रह गया है।
शिअद महासचिव प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा का गांव चंदूमाजरा जिला फतेहगढ़ साहिब में चला गया तो उन्होंने भी पटियाला का रुख नहीं किया। राज्य सरकार में कभी नंबर दो की हैसियत रखने वाले तत्कालीन सहकारिता मंत्री कैप्टन कंवलजीत सिंह की मृत्यु के बाद जिले के इकलौते मंत्री भी एसजीपीसी चुनाव में मतदान नहीं कर पाए। अकाली दल के बनूड़ से विधायक जसजीत सिंह बन्नी अब डेराबस्सी के रास्ते मोहाली जिले के हो गए हैं।
पटियाला में अब सिख मतदाताओं के मामले में अकालियों के पास पूर्व मंत्री व पूर्व विधायक के रूप में पार्टी के विधानसभा क्षेत्र इंचार्ज ही रह गए हैं। इनकी फेहरिस्त हालांकि खासी लंबी है पर लाल बत्ती आधिकारिक रूप से न होने की स्थिति में वीवीआईपी की मुहर नहीं लग पाती।
राज्य में प्रदेश कांग्रेस के प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह और विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने गुरु नानक देव फाउंडेशन स्कूल स्थित पोलिंग स्टेशन में अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया। उनके अलग से बने मतपत्र 529 परनीत कौर और 530 कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों का ही स्याही लगने का इंतजार पूरा नहीं हुआ। पोलिंग बूथ नंबर 38 में मोतीबाग पैलेस से बनी चार वोटें एसजीपीसी चुनाव के लिए नोटीफिकेशन होने के बाद वोट बनवाई गई हैं। उनके पुत्र रणइंदर सिंह और राजमाता महिंदर कौर ने भी मतदान में भाग नहीं लिया।
कांग्रेस के दोनों दिग्गजों के मतदान से दूर रहने और इनमें से एक के नदारद तो दूसरे के शहर में रहने के बावजूद वोट न डालने के बाद कांग्रेसियों ने मानो अघोषित बायकाट ही कर दिया।

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