-बाढ़, बांध और बिजली-
-पौंग बांध से 49 करोड़ यूनिट बिजली बहा कर सुधारी भूल
-मामला केंद्रीय ऊर्जा सचिव के पास, बांध खाली करने पर सवाल
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब में एक ओर नदियों की बाढ़ लोगों को सता रही है, वहीं दूसरी ओर से बाढ़ रोकने के लिए बनाए गए बांध पानी को व्यर्थ बहा रहे हैं। भाखड़ा बांध के फ्लड गेटों से कुल कितना बहुमूल्य पानी बहा, इसका अनुमान तो सीजन के बाद ही लगेगा, लेकिन जितना पानी बह रहा है उससे हर रोज 20 लाख यूनिट पनबिजली के बन सकते हैं वो भी औने पौने दाम पर।
पंजाब राज्य बिजली बोर्ड के पूर्व सलाहकार और आल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन के चेयरमैन इंजीनियर पदमजीत सिंह बताते हैं कि बांध को यदि 1680 फीट पर ही रखा जाता है तो इसकी क्षमता को हम चार फीसदी कम कर रहे हैं और चार हजार क्यूसिक पानी आज दूसरे दिन भी बहाया जा रहा है। इससे हर रोज 20 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हो सकता है। सिंचाई अथवा राजस्थान जैसे राज्य में पीने के लिए इस पानी का प्रयोग होना था, सो अलग।
आल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन के चेयरमैन की ओर से केंद्रीय ऊर्जा सचिव को सोमवार को लिखे गए एक और पत्र में भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए हस्तक्षेप की मांग की गई है। पत्र में कहा गया है जब मौसम विभाग कह रहा है कि पांच दिनों में मानसून लौट जाएगा तो अब बांध खाली क्यों किए जा रहे हैं? अगर पिछले साल का स्तर 1681.53 रखा गया था तो इस साल बांध की सुरक्षा को कौन सा खतरा हो गया है? कौन सी कमजोरी है?
इतना ही नहीं, बीबीएमबी की ओर से जारी की गई विज्ञप्ति में खतरे का निशान 1680 फीट बता दिया जाता है, जबकि डिजाइन अनुसार बांध में 1690 फीट तक पानी भरा जा सकता है। ऐसे में बांध की क्षमता चार फीसदी क्यों कम कर दी गई है?
याद रहे कि इससे पहले भी पौंग बांध के मामले में बीबीएमबी ने इसी सीजन में 1400 फीट के पौंग बांध के ऊपरी निशान से काफी पहले पानी छोड़ दिया और फिर रोककर 'भूल सुधार' की गई।
पौंग बांध से छोड़े गए पानी के आंकड़े बताते हैं कि भराव के पिछले इतिहास क ो देख थोड़ा संयम बरता होता तो न केवल पौंग बांध से बही 49 करोड़ यूनिट बिजली बची होती अपितु सिंचाई के लिए पानी भी। वहीं अनावश्यक रूप से पानी छोड़े जाने से बाढ़ आई सो अलग।
दिलचस्प है कि बांध के स्पिल-वे गेटों को 14 अगस्त को खोला गया और 31 अगस्त तक इन्होंने 5.4 लाख क्यूसिक पानी नदी में उड़ेल दिया। इस पानी के साथ ही 396 मेगावाट क्षमता के बांध से करीब 27 करोड़ बिजली के यूनिट भी बह गए। पौंग पावर प्लांट से पानी नहीं गुजरा तो मुकेरियां हाइड्रो प्रोजेक्ट से भी 22 करोड़ यूनिट बनने थे।
भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) की ओर से भाखड़ा व पौंग बांध से छोड़े जा रहे अतिरिक्त पानी और खतरे के निशान को लेकर बने विरोधाभास पर बीबएमबी के सदस्य ऊर्जा इंजीनियर अशोक थापर कहते हैं कि पानी छोड़े जाने का निर्णय सभी पक्षों की सहमति से लिया गया है। थापर के मुताबिक अभी मानसून का सीजन चल रहा है। बांधों में भराव का सीजन सितंबर अंत तक रहता है। ऐसे में पानी छोड़ने पर किसी को ऐतराज नहीं होना चाहिए
।
।
No comments:
Post a Comment