Tuesday, 20 September 2011

बांधों का भराव सीजन समाप्त, नीचे आने लगा जल स्तर, dam reservior, season is over,



भूपेश चट्ठा, पटियाला
मानसून की लगभग वापसी के साथ बांधों का भराव सीजन मंगलवार को समाप्त हो गया। इसके साथ ही कम हुई पानी की आवक से बांधों के जल स्तर के नीचे आने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
उत्तर भारत के सबसे बड़े भाखड़ा बांध में पानी की आवक कम हो कर 29 हजार 352 क्यूसिक रह गई है, जबकि एक दिन पहले तक यह 32 हजार 108 क्यूसिक थी। बांध से बिजली बनाने के लिए रोजाना 32हजार 300 क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा है। और बांध का जलस्तर 24 घंटों में 1680.94 फीट से कम हो 1680.80 फीट पर आ गया है।
पौंग बांध में पानी की आवक 19 हजार 34 क्यूसिक से गिरकर 15हजार 911 क्यूसिक रह गई है। हालांकि यहां से बिजली बनाने के लिए प्रतिदिन छोड़े जा रहे 11 हजार क्यूसिक पानी के चलते जल स्तर 1390.54 फीट पर बना हुआ है।
इसी प्रकार रावी पर बने रणजीत सागर बांध की क्षमता 527.91 मीटर है लेकिन इससे काफी नीचे 525.06 मीटर पर रहा जलस्तर बीते 24 घंटों में घटकर 524.93 मीटर पर आ गया है। यहां भी रोजाना की आवक 23 हजार क्यूसिक से गिर कर 14 हजार क्यूसिक रह गई है जबकि यहां से हररोज 18 हजार क्यूसिक से अधिक पानी छोड़े जाने की वजह से इस बांध का जलस्तर नीचे आने लगा है।
दिलचस्प है कि 11 से 18 सितंबर के बीच भाखड़ा बांध से हर रोज चार हजार क्यूसिक पानी बिना बिजली बनाए फ्लड गेट खोल कर छोड़ा गया। आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन इंजी. पदमजीत सिंह ने आज यहां इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि इन सात दिनों में जितना पानी बहाया गया है उससे 350 लाख यूनिट बिजली बननी थी और न्यूनतम दरों पर इसका मूल्य सात करोड़ रुपये बनता है, जबकि पानी की कीमत नहीं लगाई जा सकती।
बकौल इंजी. पदमजीत सिंह अगर पिछले साल का भाखड़ा का जल स्तर 1681.53 फीट पर रखा गया था तो इस साल बांध की सुरक्षा को कौन सा खतरा हो गया है? कौन सी कमजोरी है? इतना ही नहीं बीबीएमबी की ओर से जारी की गई विज्ञप्ति में खतरे का निशान 1680 फीट बता दिया जाता है जबकि डिजाइन के अनुसार बांध में 1690 फीट तक पानी भरा जा सकता है।
याद रहे कि इससे पहले भी पौंग बांध के मामले में बीबीएमबी ने इसी सीजन में 1400 फीट के पौंग बांध के ऊपरी निशान से काफी पहले पानी छोड़ दिया और फिर रोककर 'भूल सुधार' की गई। पौंग बांध से छोड़े गए पानी के आंकड़े बताते हैं कि यदि थोड़ा संयम बरता होता तो न केवल पौंग बांध से बही 49 करोड़ यूनिट की बिजली बची होती अपितु सिंचाई के लिए पानी की भी बचत होती। पौंग बांध के स्पिल-वे गेटों को 14 अगस्त को खोला गया और 31 अगस्त तक 5.4 लाख क्यूसिक पानी नदी में उड़ेल दिया गया। इस पानी के साथ ही 396 मेगावाट क्षमता के बांध से बिजली के करीब 27 करोड़ यूनिट भी बह गए। पौंग पावर प्लांट से पानी नहीं गुजरा तो मुकेरियां हाइड्रो प्रोजेक्ट से भी 22 करोड़ यूनिट बनने से रह गए।

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