भूपेश चट्ठा, पटियाला
प्रदेश से गुजरने वाली नदियों की बाढ़ को किसी तरह नियंत्रित करने के मद्देनजर बनाए गए बांध ही अच्छा मानसून आने की स्थिति में सितंबर में बाढ़ का खतरा बन जाते हैं। दिलचस्प है कि बांधों से अक्सर तेज बारिश के दौरान घबराहट में पानी छोड़ा जाता है। रविवार दोपहर को एक फिट खोले गए भाखड़ा बांध के फ्लड गेट एक बार फिर वही इतिहास दोहराया गया है। बांध की गोबिंद सागर झील में 1680 फीट को खतरे का निशान बताकर पानी छोड़ दिया गया है, जबकि बांध का ऊपरी स्तर करीब दस फुट दूर है।
डिजाइन के अनुसार आधिकारिक रूप से बांध का खतरे का निशान 1690 फीट पर रखा गया है, जबकि व्यवहारिक रूप से अब भी इसे 1687 फीट तक भरा जा सकता है। दिलचस्प है कि एक ओर मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे पंजाब व हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के बताए हैं और पंजाब में नदियां पहले से ही उफान पर हैं। वहां फ्लड गेट खोलना खासा खतरनाक साबित हो सकता है। हालांकि बांधों पर नियंत्रण रखने वाले भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड(बीबीएमबी) ने इसी सीजन में 1400 फीट के पौंग बांध के ऊपरी निशान से काफी पहले पानी छोड़ दिया और फिर रोककर 'भूल सुधार' की गई। यह सब कुछ हुआ भी कुछ उन दिनों में जब बारिश थी तो पानी छोड़ा, जब बंद हुई तो रोक दिया गया।
भाखड़ा बांध में भराव का इतिहास बताता है कि दस बार पहले भी 1680 फीट के ऊपर भरा गया है और इसका उच्चतम स्तर 1687.55 फीट तक गया भी है। आल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन के चेयरमैन इंजी.पदमजीत सिंह ने केंद्रीय ऊर्जा सचिव से मामले में हस्तक्षेप कर पानी की बर्बादी रोकने और बाढ़ से बचाने की गुहार लगाई है। भाखड़ा बांध का खतरे का निशान 1690 से घटाकर 1680 फीट करने के ब्योरे को भी सामने रखा है।
साल उच्चतम स्तर
2010 1681.53
2008 1680.69
2005 1681.40
1998 1682.67
1995 1683.49
1994 1682.55
1988 1687.55
1983 1686.01
1978 1685.96
1975 1687.36
इंजी.पदमजीत ने मौसम विभाग का हवाला देते हुए बताया है कि अगले पांच दिनों में मानसून वापस होने वाला है और तय मापदंड के अनुसार 20 सितंबर को भाखड़ा का जलस्तर 1685 फीट और 26 सितंबर को 1687 फीट तक किया जा सकता है।
पांच दिनों में-जीरो जीरो आवर पर
सात सितंबर को-1677.38 फीट
आठ सितंबर को-1677.11 फीट
नौ सितंबर को-1677.98 फीट
10 सितंबर को-1679.10 फीट
11 सितंबर को-1679.7 फीट
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