Thursday, 15 September 2011

गोदाम ठसाठस, धान न जाए फंस, storage, rice, in punjab,


नहीं हुए गोदाम खाली, कहीं चावल ना बन जाए मुसीबत
-शैलर मालिकों से एफसीआई नहीं लेगा, विवादित पीएयू-201 किस्म के दो लाख टन धान के चावल
भूपेश चट्ठा, पटियाला
न्यूनतम समर्थन पर धान की सरकारी खरीद शुरू होने से ठीक दो सप्ताह पहले भी पंजाब के गोदाम खाली नहीं हो पाए हैं। गेहूं की बात अलग भी रख दें तो राच्य में 58 लाख टन चावल से गोदाम अटे पड़े हैं और करीब डेढ़ सौ लाख टन धान आने को है।
दिलचस्प है कि केंद्र सरकार के संस्थान फूड कारपोरेशन आफ इंडिया ने शैलर मालिकों से धान की विवादित रही किस्म पीएयू-201 से बनने वाला चावल लेने से ही इंकार कर दिया है। पंजाब के शैलरों में पड़े साल 2009-10 सीजन के दो लाख टन धान के चावल के एवज में 1905 रूपये प्रति क्विंटल की दर से पैसे भरवाने का आदेश जारी कर दिया है। अब ये पुराना चावल, नए चावल में मिल कर एफसीआई के खाते में एक बार फिर पिछले रास्ते से जाएगा या बाजार के रास्ते निर्यात होगा इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन राच्य में
अभी वर्ष 2010-11 सीजन के 18 लाख टन धान से बना 11 लाख टन चावल अगले महीने तक एफसीआई के पास जरूर जा पहुंचेगा।
उल्लेखनीय है कि पंजाब में अनाज के सडऩे की खबरों से तंग केंद्र ने जहां गेहूं और चावल के मामले में 20-20 लाख टन के निर्यात की अनुमति दी है लेकिन मानसून के पहले तक के हालात और अब के हालात में कोई बदलाव नहीं आया है। एफसीआई ने बाढ़ से सबसे च्यादा प्रभावित हो सकने वाले निचले क्षेत्रों से अनाज निकालना शुरू किया। जून जुलाई में गेहूं की ढुलाई को प्राथमिकता दी तो अब चावल मुसीबत बन गया। प्रदेश में भंडारण के आंकड़ों अनुसार मानसून से ठीक पहले 135 लाख टन गेहूं था, इसमें एक चौथाई बंद गोदामों में तो 102 लाख टन खुले में था जबकि चावल की मात्रा 26 लाख टन थी। रेलवे की ओर से आठ-नौ लाख टन की ढुलाई की गई तो मिलिंग के बाद चावल की मात्रा लगातार बढ़ती रही। अब ये 58 लाख टन पर आ गया है।

'बठिंडा, मानसा और बरनाला के राइस शैलर मालिक पीएयू-201 किस्म के धान से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। एफसीआई को चाहिए कि नया चावल आने से पहले ही पुराने का भली प्रकार निपटारा कर ले, साथ ही रेलवे की ओर से ढुलाई को तेज करना चाहिए तभी अनाज को सडऩे से रोका जा सकता है। अन्यथा विदेशी बाजारों में हमें उचित दाम मिलना तो दूर कंसाइनमेंट वापिस तक आने का अंदेशा बना रहता हैÓ
फैडरेशन आफ आल इंडिया राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान तरसेम सैणी

' राच्य में धान की फसल के शैलरों में जाने के बाद नवंबर के पहले सप्ताह तक उनके पास नया चावल आना शुरू होगा और एफसीआई पंजाब से हर महीने करीब 15 लाख टन आनाज उठवा रही है। ऐसे में किसी तरह की परेशानी नहीं आनी चाहिए। रही बात धान के स्टोरेज की, वो राच्य सरकार की खरीद एजेंसियों ने करवा कर रखवानी है। इसमें एफसीआई की कोई भूमिका नहीं हैÓ
फूड कारपोरेशन आफ इंडिया के डिप्टी जनरल मैनेजर असीम छााबड़ा

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