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Friday, 13 April 2012

पंजाब को मिली नई स्टोरेज क्षमता पर...punjab, got, new, storage, capacity, but...


पनग्रेन के हवाले हुई 11 लाख टन की अतिरिक्त क्षमता

भूपेश चट्ठा, पटियाला
लंबी जदोजहद के बाद आखिरकार पंजाब को अनाज भंडारण की अतिरिक्त क्षमता मिल गई है, लेकिन ये 'अतिरिक्तÓ कही जाने वाली क्षमता प्रदेश में सड़ रहे अनाज को बचाने के लिए काफी नहीं है। हालांकि अनाज की स्टोरेज समस्या को हल करने के लिए पंजाब मंडी बोर्ड की सिफारिश पर राच्य सरकार ने एक बार फिर केंद्र को ढुलाई तेज करने को लिख भेजा है।
वहीं पंजाब को मिली 11 लाख टन की अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता को राच्य सरकार की खरीद एजेंसी पनग्रेन के हवाले कर दिया गया है। इस साल एक अप्रैल से पनग्रेन राच्य भर में फैले इन गोदामों में नए खरीदे जाने वाले गेहूं अथवा होने वाली धान की मिलिंग के बाद बने चावल को स्टोर कर सकेगा।
दिलचस्प है कि प्रदेश में केंद्र सरकार के संस्थान फूड कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड के मजदूर विशेष रूप से पल्लेदार यूनियन इन दिनों हड़ताल पर चल रहे हैं। गेहूं का खरीद सीजन शुरु होने से पहले शुरु हुई हड़ताल के चलते एफसीआई के गोदामों से ढुलाई लगभग बंद पड़ी है। यहां तक कि मिलिंग किए गए चावल को भी शेलरों से गोदाम तक नहीं पहुंचाया जा रहा। इसके बाद से ही केंद्र रेलवे के माध्यम से अन्य राच्यों तक अनाज की ढुलाई करता है।
पंजाब में अनाज भंडारण की कुल क्षमता करीब करीब 200 लाख टन है। इसमें खुली प्लींथ और कवर्ड दोनों ही क्षेत्र शामिल हैं। इन गोदामों में 31 मार्च तक 51 लाख टन गेहूं और 67 लाख टन चावल मौजूद है। मंडी बोर्ड का मानना है कि सीजन में गेहूं की कुल खरीद का आंकड़ा 115 लाख टन तक पहुंचना तय है। ऐसे में 32 लाख टन गेहूं को रखने के लिए खुले में भी जगह नहीं बचने वाली अगर यहां से अनाज की ढुलाई तेज नहीं की जाती।
याद रहे कि कुछ साल पहले धान की स्टोरेज के समय में ऐसे ही हालात बने थे। तब स्कूल से लेकर स्टेडियम तक और धर्मशाला से लेकर मंडियों की फड़ तक धान से ही अटे रखे गए। हालांकि इससे चावल की क्वालिटी को भारी नुकसान पहुंचा और निर्यात किया गया चावल कई जगहों से वापिस आया था।

'गेहूं भंडारण में कोई दिक्कत नहीं...हम चाहें इसे फसल को शैड में स्टोर करें या खुले में प्लींथ पर, अभी मामला चल जाएगा... धान की फसल आने के बाद चावल मुसीबत बन सकता है, प्रदेश से अनाज की मूवमेंट तेज करने को एक बार फिर लिखा गया हैÓ रविंदर सिंह चीमा, वाइस चेयरमैन मंडी बोर्ड

Sunday, 20 November 2011

सोने के रखवालों का शरीर हुआ मिट्टी, food, storage, grain, employee, fci, wheat,

-एफसीआई के गोदामों में काम करने वाले मजदूरों-कर्मियों का स्नायू तंत्र प्रभावित
-धरती पर, गेहूं की बोरी में, बोरियों के उपर, हवा में एयर चार्जिंग के लिए छिड़के रसायनों का असर

-मैलाथीन महीने में दो बार, डीडीवीपी 21 दिनों पर, डेल्टा मैथलीन तीन महीने पर और सल्फास सदा के लिए

भूपेश चट्ठा, पटियाला

अनाज के गोदामों में रखे गए सोने को संजोए रखने होने वाले रसायनों के छिड़काव ने इसके रखवालों का शरीर मिट्टी का बना दिया है। फूड कारपोरेशन आफ इंडिया सहित हर खरीद एजेंसी के गोदामों में रखी गई गेहूं से होने वाले प्रभाव से अंजान कोई नहीं है पर ईलाज के नाम पर भी च्यादा कुछ नहीं है।

गोदामों में रखी गई बोरियों में दवा डालने के अलावा इसकी जमीन व हवा को भी 'सुरक्षितÓ रखने के चक्कर में पूरा वातावरण जहरीला किया जाता है। एफसीआई के वीके बत्ता बताते हैं कि बोरी रखते ही इस पर डेल्टा मैथलीन का स्प्रे कर दिया जाता है। हर तीन महीने पर यह प्रक्रिया दोहराई जाती है। इसके तुरंत बाद खाली जगह में डीडीवीपी का छिड़काव होता है, एयर चार्जिंग के नाम पर किसी पतंगे को भी ना फटकने देने वाला यह स्प्रे 21 दिनों के अंतराल पर रिपीट होता है। हवा में उड़ती 'भुंडीÓ, 'भमक्कड़Ó इस वायु के संपर्क में आते ही जमीन पर ऐसे गिरते हैं मानों किसी ने एंटी एयरक्राफ्ट गन से गिराया हो।

इन सबके बावजूद यदि कीड़ा लगने की संभावना होने पर एल्मोनियम फास्फेट का प्रयोग होता है। ये वो गेहूं की बदनाम गोली है जिसे सल्फास कहते हैं और पंजाब में खुदकुशी करने वालों में प्रचलित रही है। वीके बत्ता बताते हैं कि इससे बीमारी की बात ना करें ये तो जान लेती है, गोली पानी के संपर्क में आते ही जहरीली गैसें छोड़ती है।

बात यहीं समाप्त नहीं धरती के नीचे से कार्रवाई करने वाले दीमक अथवा दाने में पैदा होने वाली 'सुसरीÓ के लिए मैलाथीन का स्प्रे महीने में दो बार जरूरी है, तभी गेहूं को बचाया जा सकता है कीट पतंगों और कीड़े मकौड़ों की जान लेने वाले ये रसायन इंसानों के लिए भी कम घातक नहीं हैं।

इसी क्रम में जतिंदरवीर सिंह कहते हैं कि कर्मियों को नियमित खांसी आम है, दमा और हाईपर टेंशन से शायद ही कोई बचा हो, लंबा समय रहने पर अस्थमा व सांस के रोग घेर लेते हैं। सरकार के पास दस्ताने व मास्क देने से च्यादा कुछ नहीं है। जबकि जालंधर जैसे मुख्य शहरों को छोड़ दें तो अन्य जगहों पर ऐसे अस्पतालों से ही कोई समझौते नहीं किए गए हैं जिसके तहत कर्मी जा कर चिक्तिसा जांच करवा सकें।

वहीं कम्यूनिटी मेडिसीन में एमडी और एपिडमोलोजिस्ट डा. अमर सिंह आजाद कहते हैं कि इन रसायनों से इंसान की बीमारी से लडऩे की क्षमता ही खत्म हो जाती है। जुकाम से लेकर कैंसर तक की हर बीमारी की पकड़ में ऐसा व्यक्ति जल्दी आता है। प्राकृति से हमें तोहफे में मिले इम्यून सिस्टम में कमजोरी आती जाती है। जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता क्षीण हो जाती है।

Thursday, 15 September 2011

गोदाम ठसाठस, धान न जाए फंस, storage, rice, in punjab,


नहीं हुए गोदाम खाली, कहीं चावल ना बन जाए मुसीबत
-शैलर मालिकों से एफसीआई नहीं लेगा, विवादित पीएयू-201 किस्म के दो लाख टन धान के चावल
भूपेश चट्ठा, पटियाला
न्यूनतम समर्थन पर धान की सरकारी खरीद शुरू होने से ठीक दो सप्ताह पहले भी पंजाब के गोदाम खाली नहीं हो पाए हैं। गेहूं की बात अलग भी रख दें तो राच्य में 58 लाख टन चावल से गोदाम अटे पड़े हैं और करीब डेढ़ सौ लाख टन धान आने को है।
दिलचस्प है कि केंद्र सरकार के संस्थान फूड कारपोरेशन आफ इंडिया ने शैलर मालिकों से धान की विवादित रही किस्म पीएयू-201 से बनने वाला चावल लेने से ही इंकार कर दिया है। पंजाब के शैलरों में पड़े साल 2009-10 सीजन के दो लाख टन धान के चावल के एवज में 1905 रूपये प्रति क्विंटल की दर से पैसे भरवाने का आदेश जारी कर दिया है। अब ये पुराना चावल, नए चावल में मिल कर एफसीआई के खाते में एक बार फिर पिछले रास्ते से जाएगा या बाजार के रास्ते निर्यात होगा इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन राच्य में
अभी वर्ष 2010-11 सीजन के 18 लाख टन धान से बना 11 लाख टन चावल अगले महीने तक एफसीआई के पास जरूर जा पहुंचेगा।
उल्लेखनीय है कि पंजाब में अनाज के सडऩे की खबरों से तंग केंद्र ने जहां गेहूं और चावल के मामले में 20-20 लाख टन के निर्यात की अनुमति दी है लेकिन मानसून के पहले तक के हालात और अब के हालात में कोई बदलाव नहीं आया है। एफसीआई ने बाढ़ से सबसे च्यादा प्रभावित हो सकने वाले निचले क्षेत्रों से अनाज निकालना शुरू किया। जून जुलाई में गेहूं की ढुलाई को प्राथमिकता दी तो अब चावल मुसीबत बन गया। प्रदेश में भंडारण के आंकड़ों अनुसार मानसून से ठीक पहले 135 लाख टन गेहूं था, इसमें एक चौथाई बंद गोदामों में तो 102 लाख टन खुले में था जबकि चावल की मात्रा 26 लाख टन थी। रेलवे की ओर से आठ-नौ लाख टन की ढुलाई की गई तो मिलिंग के बाद चावल की मात्रा लगातार बढ़ती रही। अब ये 58 लाख टन पर आ गया है।

'बठिंडा, मानसा और बरनाला के राइस शैलर मालिक पीएयू-201 किस्म के धान से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। एफसीआई को चाहिए कि नया चावल आने से पहले ही पुराने का भली प्रकार निपटारा कर ले, साथ ही रेलवे की ओर से ढुलाई को तेज करना चाहिए तभी अनाज को सडऩे से रोका जा सकता है। अन्यथा विदेशी बाजारों में हमें उचित दाम मिलना तो दूर कंसाइनमेंट वापिस तक आने का अंदेशा बना रहता हैÓ
फैडरेशन आफ आल इंडिया राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान तरसेम सैणी

' राच्य में धान की फसल के शैलरों में जाने के बाद नवंबर के पहले सप्ताह तक उनके पास नया चावल आना शुरू होगा और एफसीआई पंजाब से हर महीने करीब 15 लाख टन आनाज उठवा रही है। ऐसे में किसी तरह की परेशानी नहीं आनी चाहिए। रही बात धान के स्टोरेज की, वो राच्य सरकार की खरीद एजेंसियों ने करवा कर रखवानी है। इसमें एफसीआई की कोई भूमिका नहीं हैÓ
फूड कारपोरेशन आफ इंडिया के डिप्टी जनरल मैनेजर असीम छााबड़ा

Tuesday, 5 July 2011

लापरवाही न निगल ले निवाला., storage, rain, damage, grain

राज्य में 102 लाख टन अनाज पड़ा है खुले में संकट :
भूपेश चट्ठा, पटियाला
मानसून दस्तक दे चुका है, पर पंजाब के अनाज गोदामों और खेतों में खुले में बनाई गई प्लींथों से अनाज को इस साल भी मुक्ति नहीं मिल पाई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य में कहां और कितना अनाज सड़ेगा, इस बात की केंद्र से लेकर राज्य के अधिकारियों को पूरी खबर भी है। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार के संस्थान फूड कारपोरेशन आफ इंडिया (एफसीआई) ने पंजाब में संभावित रूप से खराब होने वाले अनाज पर गहन सर्वेक्षण जून से पहले ही कर लिया था कि राज्य सरकार की कौन सी एजेंसी के पास क्षमता से ज्यादा अनाज है और उचित तरीके से भंडारण नहीं किया गया है।
 इस बारे में एफसीआई के डिप्टी जनरल मैनेजर स्टोरेज असीम छाबड़ा ने बताया कि एफसीआई ने जिन स्थानों को चिन्हित किया है, वहां से अनाज की ट्रांसपोर्टेशन शुरू कर दी गई है। यह कार्य जून से ही चल रहा है। बाढ़ प्रभावित और निचले क्षेत्रों में स्टोर किए गए गेहूं को पहले हटाया जा रहा है, पर यह कार्य जुलाई अंत तक ही मुकम्मल हो पाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में कुल 135 लाख टन गेहूं आज भी मौजूद है। इसमें से एक चौथाई हिस्सा बंद गोदामों में है, जबकि 102 लाख टन खुले में स्टोर किया गया है। खुले में रखे करीब आठ लाख टन अनाज को बरसात से ज्यादा खतरा है। इसी प्रकार 26 लाख टन चावल को भी ढुलाई का इंतजार है। राइस शैलर मिलर्स के पास मिलिंग के लिए पड़ा धान इससे अलग है। एफसीआई रेलवे के माध्यम से एक महीने में आठ से नौ लाख टन की ढुलाई कर पा रही है। उन्होंने बताया कि एफसीआई की कस्टडी में दस लाख टन अनाज है, जो पूरी तरह से सुरक्षित है। इसे फिलहाल हटाने की जरूरत नहीं है। चिंता खुले में रखे अनाज की है जिसे अगली फसल आने तक निपटा लिया जाएगा, यदि वर्तमान गति को थोड़ा और बल मिल जाए।

Thursday, 19 May 2011

अनाज भंडारण: चुनावी गेहूं सबसे बड़ा सरदर्द? storage, wheat, food, rotton

2009 मई में खरीदी गई चार लाख 4187 टन गीली गेहूं कर चुकी है उम्र पूरी
-राच्य सरकार की चार एजेंसियों पर पड़ी सबसे च्यादा मार

भूपेश चट्ठा, पटियाला

चुनाव सर पर हों तो सत्ताधारी राजनीतिक दल को एंटी इंक्बेंसी फेक्टर की चिंता सबसे च्यादा सताती है मई 2009 में हुए लोकसभा चुनावों से ठीक पहले भी कुछ ऐसा ही हुआ गेहूं खरीद के दिनों में बारिश आई तो उपज खेत और मंडी दोनों जगहों पर भीग गई लेकिन वोटदाता किसान कहीं नाराज ना हो जाए इसका प्रबंध कर लिया गया और हर तरह का गेहूं खरीद लिया गया इसमें बारिश में भीगा हुआ गेहूं भी शामिल है।

कथित रूप से सरकारी अफसरों के दवाब तले अधिक नमी वाला ये चुनावी गेहूं आज पंजाब सरकार से लेकर केंद्र तक सभी के लिए बड़ा सरदर्द बन गया है। तकनीकि रूप से 12 फीसदी से ज्यादा नमी वाले गेहूं की खरीद नहीं की जा सकती। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्र बताते है कि चार लाख 4187 टन गेहूं गुणवत्ता के हिसाब से ठीक नहीं रहा। ठीकठाक से गेहूं की सेल्फ लाइफ दो साल से अधिक नहीं होती, खुले में या एक बार भीगने के बाद यह सीमा एक साल में सिमट जाती है।

दिलचस्प है कि घटिया गेहूं के लिए केंद्रीय खरीद एजेंसी एफसीआई राज्य की खरीद एजेंसियों पर अब एक ओर रिकवरी का दवाब बना रही है, जबकि राच्य की खरीद एजेंसियों की कोआर्डिनेशन कमेटी कह रही है कि वर्ष 2009 में 105 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी इस अनुसार ये साढ़े तीन फीसदी से भी च्यादा नहीं है। ऐसे में या तो एफसीआई इसे पूर्व में लाई गई ओपन मार्केट सेल्स की योजना के तहत इससे कुछ वसूली कर ले या फिर गेहूं से बिक्री कर वसूलने वाली राज्य सरकार इसकी कीमत वहन करे, लेकिन इसमें की जा रही देरी इसे जानवरों के खाने लायक भी नहीं छोडऩे वाली। अन्यथा वोदका बनाने अनाज सड़ा दिया के आरोप लगने तय है।

पंजाब फूडग्रेन एजेंसियों की संयुक्त तालमेल कमेटी के प्रधान भूपिंदर सिंह कहते है कि इस साल 31 मार्च तक पंजाब में 46 लाख टन गेहूं ढुलाई के इंतजार में है। इसमें दुत्कारा जाने वाला भीगा हुआ चुनावी गेहूं एफसीआई के एजेंडे पर बिलकुल नहीं आ रहा है।

भूपिंदर सिंह बताते है कि पनग्रेन के पास कुल छह लाख 43 हजार टन गेहूं है तो 2009 का 25 हजार टन है। इसी प्रकार मार्कफैड के पास कुल 14 लाख 71 हजार टन में से 2009 का एक लाख 62 हजार टन, पनसप के कुल 11 लाख 92 हजार टन में से 88147 टन, पंजाब वेयर हाउसिंग कारपोरेशन लिमिटेड के कुल छह लाख 13 हजार टन में से 51061 टन चुनावी गेहूं है तो पंजाब एग्रो का ये आंकड़ा कुल सात लाख 22 हजार टन में से 77286 टन भीगे हुए गेहूं का है।