राज्य में 102 लाख टन अनाज पड़ा है खुले में संकट :
भूपेश चट्ठा, पटियाला
मानसून दस्तक दे चुका है, पर पंजाब के अनाज गोदामों और खेतों में खुले में बनाई गई प्लींथों से अनाज को इस साल भी मुक्ति नहीं मिल पाई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य में कहां और कितना अनाज सड़ेगा, इस बात की केंद्र से लेकर राज्य के अधिकारियों को पूरी खबर भी है। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार के संस्थान फूड कारपोरेशन आफ इंडिया (एफसीआई) ने पंजाब में संभावित रूप से खराब होने वाले अनाज पर गहन सर्वेक्षण जून से पहले ही कर लिया था कि राज्य सरकार की कौन सी एजेंसी के पास क्षमता से ज्यादा अनाज है और उचित तरीके से भंडारण नहीं किया गया है।
इस बारे में एफसीआई के डिप्टी जनरल मैनेजर स्टोरेज असीम छाबड़ा ने बताया कि एफसीआई ने जिन स्थानों को चिन्हित किया है, वहां से अनाज की ट्रांसपोर्टेशन शुरू कर दी गई है। यह कार्य जून से ही चल रहा है। बाढ़ प्रभावित और निचले क्षेत्रों में स्टोर किए गए गेहूं को पहले हटाया जा रहा है, पर यह कार्य जुलाई अंत तक ही मुकम्मल हो पाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में कुल 135 लाख टन गेहूं आज भी मौजूद है। इसमें से एक चौथाई हिस्सा बंद गोदामों में है, जबकि 102 लाख टन खुले में स्टोर किया गया है। खुले में रखे करीब आठ लाख टन अनाज को बरसात से ज्यादा खतरा है। इसी प्रकार 26 लाख टन चावल को भी ढुलाई का इंतजार है। राइस शैलर मिलर्स के पास मिलिंग के लिए पड़ा धान इससे अलग है। एफसीआई रेलवे के माध्यम से एक महीने में आठ से नौ लाख टन की ढुलाई कर पा रही है। उन्होंने बताया कि एफसीआई की कस्टडी में दस लाख टन अनाज है, जो पूरी तरह से सुरक्षित है। इसे फिलहाल हटाने की जरूरत नहीं है। चिंता खुले में रखे अनाज की है जिसे अगली फसल आने तक निपटा लिया जाएगा, यदि वर्तमान गति को थोड़ा और बल मिल जाए।
भूपेश चट्ठा, पटियाला
मानसून दस्तक दे चुका है, पर पंजाब के अनाज गोदामों और खेतों में खुले में बनाई गई प्लींथों से अनाज को इस साल भी मुक्ति नहीं मिल पाई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य में कहां और कितना अनाज सड़ेगा, इस बात की केंद्र से लेकर राज्य के अधिकारियों को पूरी खबर भी है। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार के संस्थान फूड कारपोरेशन आफ इंडिया (एफसीआई) ने पंजाब में संभावित रूप से खराब होने वाले अनाज पर गहन सर्वेक्षण जून से पहले ही कर लिया था कि राज्य सरकार की कौन सी एजेंसी के पास क्षमता से ज्यादा अनाज है और उचित तरीके से भंडारण नहीं किया गया है।
इस बारे में एफसीआई के डिप्टी जनरल मैनेजर स्टोरेज असीम छाबड़ा ने बताया कि एफसीआई ने जिन स्थानों को चिन्हित किया है, वहां से अनाज की ट्रांसपोर्टेशन शुरू कर दी गई है। यह कार्य जून से ही चल रहा है। बाढ़ प्रभावित और निचले क्षेत्रों में स्टोर किए गए गेहूं को पहले हटाया जा रहा है, पर यह कार्य जुलाई अंत तक ही मुकम्मल हो पाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में कुल 135 लाख टन गेहूं आज भी मौजूद है। इसमें से एक चौथाई हिस्सा बंद गोदामों में है, जबकि 102 लाख टन खुले में स्टोर किया गया है। खुले में रखे करीब आठ लाख टन अनाज को बरसात से ज्यादा खतरा है। इसी प्रकार 26 लाख टन चावल को भी ढुलाई का इंतजार है। राइस शैलर मिलर्स के पास मिलिंग के लिए पड़ा धान इससे अलग है। एफसीआई रेलवे के माध्यम से एक महीने में आठ से नौ लाख टन की ढुलाई कर पा रही है। उन्होंने बताया कि एफसीआई की कस्टडी में दस लाख टन अनाज है, जो पूरी तरह से सुरक्षित है। इसे फिलहाल हटाने की जरूरत नहीं है। चिंता खुले में रखे अनाज की है जिसे अगली फसल आने तक निपटा लिया जाएगा, यदि वर्तमान गति को थोड़ा और बल मिल जाए।
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