Thursday, 28 July 2011

हांसी-बुटाना से कैनाल दफ्तर तक बीकेयू एकता डकौंदा सक्रिय, hansi-butana, farmer, union, punjab, politics,



- संस्थापक प्रधान की बरसी के बाद आई गतिविधियों में तेजी
- बिजली, पानी, बाढ़ हर मामले पर हुई सक्रिय
भूपेश चट्ठा, पटियाला
चुनावी साल में हर राजनीतिक दल सक्रिय होता है और हर तरह के दबाव समूह भी उठ आते हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा ने पटियाला में पैदा कर ली है। हांसी बुटाना से एसई कैनाल दफ्तर तक बीकेयू एकता डकौंदा हर तरह सक्रिय हो उठी है।

हांसी बुटाना नहर और इसके साथ बन रही कंकरीट की दीवार के रूप में राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा लगभग राजनीतिक दलों से छीन चुके इस किसान संगठन ने पंजाब व हरियाणा के छह दर्जन गावों को एक मंच पर ला महापंचायत बुलाने की घोषणा कर रखी है।

हरियाणा से लेकर केंद्र सरकार को दी गई चेतावनी कि आठ अगस्त तक नहर व दीवार का काम रोक कर क्षेत्र में बाढ़ की समस्या का निपटारा किया जाए अन्यथा भूख हड़ताल से जाम लगाने तक हर तरह से विरोध का सामना करने के लिए तैयार रहें। दिलचस्प है कि उक्त घोषणा के बाद से क्षेत्र के लोग बीकेयू के साथ भावनात्मक रूप से जुडऩे लग गए। इसके दो दिन के भीतर ही संगठन के प्रतिनिधि मंडल ने पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड से मिलकर किसानों की मोटरों के जारी हो रहे बिजली बिलों को बंद करने की तर्क सहित मांग रखी। साथ ही कृषि क्षेत्र के लिए पूरी आठ घंटे बिजली मांगी।

इतना ही नहीं अगले ही दिन जिले में नहरी पानी का मामला उठा लिया है। यूनियन की सन्नौर ईकाई ने एसई कैनाल के कार्यालय के बाहर धरना लगाया है। याद रहे कि संगठन संस्थापक प्रधान बलकार सिंह डकौंदा की हाल ही में मनाई गई बरसी के बाद गतिविधियों में खासी तेजी आई है।

इसी संबंध में वीरवार को प्रदर्शन करने वाले यूनियन के सन्नौर ब्लाक के प्रधान सुखमिंदर सिंह तुलेवाल मानते हैं कि किसानों की जायज मांगों पर वे आंदोलन कर रहे हैं और चुनावी वर्ष में अगर दबाव बना रहे हैं, तो गलत क्या है। हांसी बुटना सिर्फ मुद्दा नहीं है, इसे हटाया जाना क्षेत्र के लोगों की जरूरत है।

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