दो पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा के बीच पानी की लड़ाई कश्मीर का मसला बन चुकी है। वहीं, हांसी-बुटाना नहर का मुद्दा अब किसी तरह से कारगिल से कम नहीं है। ऐसे में जिसके जो हाथ लग रहा है वो कर रहा है। हरियाणा ने तब तब घग्गर नदी पर बने साइफन को साफ किया है जब उसे मिट्टी बेचनी होती है। पहाड़ों से बह कर आई उपजाऊ मिट्टी के जब भी ग्राहक मिले साइफन की सफाई हो गई अन्यथा मौसम को गुनाहगार बता पल्ला झाड़ लिया गया। दिलचस्प है कि साइफन की सफाई कब होती है, इस पर पंजाब का धर्मेहड़ी हो अथवा हरियाणा का सरौला गांव हो, दोनों ही राज्यों की सीमा पर बसे किसान और बाढ़ की मार तले आने वाला हर शख्स गवाह बनने को तैयार है। पटियाला चीका रोड पर धर्मेहड़ी पुलों के पास घग्गर नदी के साथ लगते पहले खेत के मालिक हरदीप सिंह कहते हैं कि जब भी किसी ने खेत में मिट्टी डलवानी होती है तो घग्गर हेड पर खड़े टिप्पर और साइफन के किनारे खड़ी जेसीबी मशीन काम करने लग जाती है। अन्यथा ये लोग बिलकुल नहीं हिलते। ऐसे ही गुरप्रीत सिंह कहते हैं कि मिट्टी प्रति टिप्पर एक हजार रुपये में बिकती है। ट्राली थोड़ी सस्ती है। सीजन रबी का हो या खरीफ का, कोई फर्क नहीं पड़ता बस मशीन पांव जमा ले इतनी सी जमीन सूखी होनी चाहिए, फिर आर्डर पंजाब का किसान दे या हरियाणा का, सब बराबर है। याद रहे कि हांसी बुटाना नहर को घग्गर नदी पर से निकालने के लिए बनाया गया 1400 फिट चौड़ा और 23 फिट गहरा साइफन इन दिनों में मात्र पांच से छह फिट का रह गया है। शेष सारे में गाद जम आई है। साइफन से पानी की निकासी कितनी होगी इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि 1.66 लाख क्यूसिक क्षमता का साइफन मानसून के दिनों में अपनी एक चौथाई क्षमता का भी नहीं रह गया है। इन दिनों में बाढ़ का अतिरिक्त पानी निकालने के अलावा साइफन की जरूरत पशुओं को छाया उपलब्ध करवाने से ज्यादा नहीं रहती। उल्लेखनीय है कि पंजाब के ड्रेनेज विभाग की ओर से हरियाणा को पत्र लिख कर घग्गर के साइफन की सफाई करने की दो महीने पहले गुहार लगाई गई थी लेकिन हालात नहीं बदले। जून महीने में चंद दिन जेसीबी मशीन चलाने और साइफन की आउटलेट पर से गाद निकालने के बाद से काम रुका हुआ है। उधर, हरियाणा के ड्रेनेज विभाग के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर अरुण मलिक कहते हैं कि हम सफाई करवाते रहते हैं, बारिश के जल्द शुरू होने के चलते मशीनें अब बंद हैं। साइफन से मिट्टी बेचने की बात पंजाब को नहीं करनी चाहिए, वहां भी कुछ अलग नहीं है।
Thursday, 21 July 2011
मिट्टी बेचने के लिए होता है साइफन साफ, hansi-butana, flood protection,
दो पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा के बीच पानी की लड़ाई कश्मीर का मसला बन चुकी है। वहीं, हांसी-बुटाना नहर का मुद्दा अब किसी तरह से कारगिल से कम नहीं है। ऐसे में जिसके जो हाथ लग रहा है वो कर रहा है। हरियाणा ने तब तब घग्गर नदी पर बने साइफन को साफ किया है जब उसे मिट्टी बेचनी होती है। पहाड़ों से बह कर आई उपजाऊ मिट्टी के जब भी ग्राहक मिले साइफन की सफाई हो गई अन्यथा मौसम को गुनाहगार बता पल्ला झाड़ लिया गया। दिलचस्प है कि साइफन की सफाई कब होती है, इस पर पंजाब का धर्मेहड़ी हो अथवा हरियाणा का सरौला गांव हो, दोनों ही राज्यों की सीमा पर बसे किसान और बाढ़ की मार तले आने वाला हर शख्स गवाह बनने को तैयार है। पटियाला चीका रोड पर धर्मेहड़ी पुलों के पास घग्गर नदी के साथ लगते पहले खेत के मालिक हरदीप सिंह कहते हैं कि जब भी किसी ने खेत में मिट्टी डलवानी होती है तो घग्गर हेड पर खड़े टिप्पर और साइफन के किनारे खड़ी जेसीबी मशीन काम करने लग जाती है। अन्यथा ये लोग बिलकुल नहीं हिलते। ऐसे ही गुरप्रीत सिंह कहते हैं कि मिट्टी प्रति टिप्पर एक हजार रुपये में बिकती है। ट्राली थोड़ी सस्ती है। सीजन रबी का हो या खरीफ का, कोई फर्क नहीं पड़ता बस मशीन पांव जमा ले इतनी सी जमीन सूखी होनी चाहिए, फिर आर्डर पंजाब का किसान दे या हरियाणा का, सब बराबर है। याद रहे कि हांसी बुटाना नहर को घग्गर नदी पर से निकालने के लिए बनाया गया 1400 फिट चौड़ा और 23 फिट गहरा साइफन इन दिनों में मात्र पांच से छह फिट का रह गया है। शेष सारे में गाद जम आई है। साइफन से पानी की निकासी कितनी होगी इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि 1.66 लाख क्यूसिक क्षमता का साइफन मानसून के दिनों में अपनी एक चौथाई क्षमता का भी नहीं रह गया है। इन दिनों में बाढ़ का अतिरिक्त पानी निकालने के अलावा साइफन की जरूरत पशुओं को छाया उपलब्ध करवाने से ज्यादा नहीं रहती। उल्लेखनीय है कि पंजाब के ड्रेनेज विभाग की ओर से हरियाणा को पत्र लिख कर घग्गर के साइफन की सफाई करने की दो महीने पहले गुहार लगाई गई थी लेकिन हालात नहीं बदले। जून महीने में चंद दिन जेसीबी मशीन चलाने और साइफन की आउटलेट पर से गाद निकालने के बाद से काम रुका हुआ है। उधर, हरियाणा के ड्रेनेज विभाग के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर अरुण मलिक कहते हैं कि हम सफाई करवाते रहते हैं, बारिश के जल्द शुरू होने के चलते मशीनें अब बंद हैं। साइफन से मिट्टी बेचने की बात पंजाब को नहीं करनी चाहिए, वहां भी कुछ अलग नहीं है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment