Saturday, 2 July 2011

डीजल कब हुआ महंगा! प्रकृति ने दी राहत, punjabi, farmer's expences, paddy soawing,

 बारिश के कारण किसानों ने नहीं चलाया ट्यूबवेल
भूपेश चट्ठा, पटियाला
सरकार ने डीजल के दाम बढ़ा दिए। इस मुद्दे पर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा हंगामा होने की संभावना थी, पर ऐसा नहीं हुआ। खेती का लागत मूल्य या खर्चे बढ़ने की दुहाई देने वाले किसान संगठन भी लगभग खामोश ही रहे। इस शांति का श्रेय केंद्र या राज्यों की सरकारों को नहीं, अपितु प्रकृति की कृपा को मिला है।
 बिजली, पानी के बाद डीजल की बात करने वाला किसान कह रहा है डीजल कब हुआ महंगा? इस साल मानसून पूर्व की बौछारों ने किसान को खेत में रौणी करने फिर और पानी छोड़ कद्दू करने के लिए किसी तरह का जेनरेटर चलाने की जरूरत नहीं पड़ने दी। इससे पहले एक एकड़ में आठ घंटे ट्यूबवेल चला कर सिंचाई करनी पड़ती थी। मानसून पांच दिन पहले आया और लगातार बरसा, तो बिजली से भी ट्यूबवेल चलाने की जरूरत नहीं पड़ी जेनरेटर तो दूर की बात।
 प्रदेश के कृषि विभाग के मुख्य अधिकारी डा. बीएस सोहल ने वीरवार को बताया कि इस साल अगर कोई साधारण सा हिसाब भी जोड़े तो अंदाजा लगा सकता है कि प्रदेश का कितना धन प्रकृति की मेहरबानी से बचा है। उन्होंने कहा कि एक हेक्टेयर खेत को तैयार करने में आम हालात में किसान मुफ्त की बिजली के अलावा 35 से 40 लीटर डीजल की खपत अपना ट्यूबवेल चलाने में कर देता है। पंजाब में 25 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में धान की रोपाई हो रही है।
परिस्थितियां बता रही हैं कि 40 रुपये प्रति लीटर पर आया डीजल यदि जला होता तो अब तक प्रदेश के किसान चार सौ करोड़ रुपये का डीजल जला चुके होते। मरम्मत के खर्च अलग होने थे। गौर हो कि पंजाब में बिजली कनेक्शन वाले 12 लाख ट्यूबवेल हैं और इतने ही बिना कनेक्शन के हैं जिन्हें धान के सीजन में ही चलाया जाता है।

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