नुकसान
बारिश से मिर्च के पौधों की जड़ें हुईं कमजोर गलने की आशंका
किसान नुकसान को लेकर चिंतित
धान की रोपाई करने वाला किसान चाहे बारिश का स्वागत करने को एक पैर पर खड़ा हो पर अब यही बारिश उसे रुलाने लगी है। साल में दो फसलों के चक्र से निकल कर सब्जियों से डायवर्सिफिकेशन करने वाले किसान अब मिर्च की फसल को लेकर परेशान हैं। दो दिनों से लगातार हुई बारिश और उससे पहले चली तेज हवाओं ने मिर्च के पौधों की जड़ें कमजोर कर दी हैं। वहीं इनके गलने के आसार भी बढ़ गए हैं। याद रहे कि मानसून की बारिश के साथ ही पहाड़ी व शिमला मिर्च गलकर गायब हो जाती है। वहीं साधारण मिर्च बारिश के पानी से और तीखी हो जाती है। नतीजा बाजार में इसकी मांग में गिरावट और दामों में भी कमी हो जाती है। मांग व सप्लाई के सिद्धांत को ठेंगा दिखाते हुए मिर्च के कारोबार पर सोशल साइंसेज एंड हेल्थ फोरम के डा. बलजीत सिंह कहते हैं कि बारिश के बाद न तो ये आचार के लायक रहती है और न इसे सुखाकर लाल ही किया जा सकता है। अलबत्ता इसे थोड़ी मात्रा में ही सही पर खाया जरूर जाना चाहिए। वहीं सन्नौर मंडी में आढ़त का काम करने वाले सुभाष बांगा कहते हैं कि यहां की आबो-हवा और मिट्टी की ही खासियत है कि मिर्च तीखी और बेर बहुत मीठा होता है। लोगों ने अपने यहां खानदानी बीज संजोकर रखे हैं, जो पीढि़यों से लगाए जा रहे हैं, हालांकि अब लोग सन्नौरी मिर्च को छोड़ हाइब्रिड किस्मों की ओर जा रहे हैं। दिखने में बेहद छोटी इस मिर्च का फल यदि फूल से निकलने के साथ ही नीचे यानी धरती की ओर मुड़ जाए तो यह गजब की कड़वी होती है। वहीं हार्टीकल्चर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर रंधीर सिंह कहते हैं कि मिर्च की क्वालिटी ही उसके तीखेपन पर निर्भर करती है। बारिश से मिर्च का तीखा होना एक भ्रांति है, लेकिन यदि पौधे की जड़ों में पानी रुक जाए और इसकी निकासी समय रहते न हो तो नुकसान तय है। ऐसे में जड़ों का गलना शुरू हो जाता है। पटियाला में करीब एक हजार एकड़ क्षेत्र में इसकी बिजाई हो रही है। नाभा, भादसों व पातड़ां में इसके अधीन रकबा ज्यादा है। नाभा क्षेत्र में किसान प्लास्टिक शीट का प्रयोग कर अनचाही बारिश से इसका बचाव कर रहे हैं।
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