Tuesday, 5 July 2011

लेजर लेवलिंग पर किसान फिदा, farmaline, trends, save water, lazer levelling,

फायदा
लेवलिंग पर प्रति एकड़ 15 सौ रुपये की आ रही लागत
पानी की बचत को देख किसानों में बढ़ा इसका प्रचलन
भूपेश चट्ठा, पटियाला : पांच-छह सालों से पंजाब के किसानों को खेत समतल करने की आधुनिक लेजर लेवलिंग तकनीक पर भाषण देते रहने के बाद अब कृषि विभाग का जागरूकता अभियान रंग लाने लगा है। दिलचस्प है कि किसानों ने शुरुआत में इसे सरकारी अफसरों का ड्रामा बता कर नकार दिया। जिन गांवों में पिछले साल इसे आंशिक रूप से अपनाया गया, वहां के किसान इस साल लेजर लेवलिंग पर पूरी तरह से फिदा हो गए हैं। प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र में लेजर लेवलिंग को जल सरंक्षण की बेहतरीन तकनीक के रूप में देखा जा रहा है। इससे उबड़-खाबड़ खेत को बराबर कर पानी का पूरी तरह से खेत में समान रूप से फैलने के लाभ गिनवाए गए। बताया गया कि चंद रुपये खर्च कर किसान इसका भरपूर लाभ ले सकते हैं। इससे धान की रोपाई में पानी कम खर्च होगा तो गेहूं की बिजाई के बाद इसके मरने के खतरे भी कम होंगे। धर्मेहड़ी गांव के हरदीप सिंह कहते हैं कि पहले पहल तो लगा था कि सरकारी बाबू अपने कमीशन के चक्कर में एक और जुगाड़ उन पर थोप रहे हैं, लेकिन अब उन्हें इसके लाभ दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आठ में से तीन एकड़ में लेवलिंग करवाई है और ये तीनों ही फर्श के समान हो गए हैं। मात्र दो ही घंटे में एक एकड़ में पानी फैल गया है। रोपाई के बाद हर जगह पर धान बराबर उंचाई पर दिखाई दे रहा है। मेहनत भी कम लगी है। कद्दू करने में ट्रैक्टर भी कम चला तो डीजल भी बचा है। इसकी तीन साल की मियाद कम और 15 सौ रुपये प्रति एकड़ का खर्च ज्यादा लग रहा है। इसी संबंध में मुख्य कृषि अधिकारी डा. बीएस सोहल बताते हैं कि इससे पानी की बचत हो रही है। तीन सालों के बाद फिर से लेवलिंग करवाने की बात पर डा. सोहल कहते हैं कि तवी चलने पर बाहर की मिट्टी अंदर की ओर गिराने पर ये असमतल होने लगता है। पहली बार में लेवलिंग करने पर जहां ढाई घंटे का समय लगता है, वहीं बाद में आधा घंटा ही रह जाता है। ऐसे में पैसे भी कम हो जाते हैं। सरकार की ओर से दी जा रही सब्सिडी पर डा. सोहल कहते हैं कि साढ़े तीन लाख की मशीन पर डेढ़ लाख रुपये की सब्सिडी दी जा रही है।

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