पनग्रेन के हवाले हुई 11 लाख टन की अतिरिक्त क्षमता
भूपेश चट्ठा, पटियाला
लंबी जदोजहद के बाद आखिरकार पंजाब को अनाज भंडारण की अतिरिक्त क्षमता मिल गई है, लेकिन ये 'अतिरिक्तÓ कही जाने वाली क्षमता प्रदेश में सड़ रहे अनाज को बचाने के लिए काफी नहीं है। हालांकि अनाज की स्टोरेज समस्या को हल करने के लिए पंजाब मंडी बोर्ड की सिफारिश पर राच्य सरकार ने एक बार फिर केंद्र को ढुलाई तेज करने को लिख भेजा है।
वहीं पंजाब को मिली 11 लाख टन की अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता को राच्य सरकार की खरीद एजेंसी पनग्रेन के हवाले कर दिया गया है। इस साल एक अप्रैल से पनग्रेन राच्य भर में फैले इन गोदामों में नए खरीदे जाने वाले गेहूं अथवा होने वाली धान की मिलिंग के बाद बने चावल को स्टोर कर सकेगा।
दिलचस्प है कि प्रदेश में केंद्र सरकार के संस्थान फूड कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड के मजदूर विशेष रूप से पल्लेदार यूनियन इन दिनों हड़ताल पर चल रहे हैं। गेहूं का खरीद सीजन शुरु होने से पहले शुरु हुई हड़ताल के चलते एफसीआई के गोदामों से ढुलाई लगभग बंद पड़ी है। यहां तक कि मिलिंग किए गए चावल को भी शेलरों से गोदाम तक नहीं पहुंचाया जा रहा। इसके बाद से ही केंद्र रेलवे के माध्यम से अन्य राच्यों तक अनाज की ढुलाई करता है।
पंजाब में अनाज भंडारण की कुल क्षमता करीब करीब 200 लाख टन है। इसमें खुली प्लींथ और कवर्ड दोनों ही क्षेत्र शामिल हैं। इन गोदामों में 31 मार्च तक 51 लाख टन गेहूं और 67 लाख टन चावल मौजूद है। मंडी बोर्ड का मानना है कि सीजन में गेहूं की कुल खरीद का आंकड़ा 115 लाख टन तक पहुंचना तय है। ऐसे में 32 लाख टन गेहूं को रखने के लिए खुले में भी जगह नहीं बचने वाली अगर यहां से अनाज की ढुलाई तेज नहीं की जाती।
याद रहे कि कुछ साल पहले धान की स्टोरेज के समय में ऐसे ही हालात बने थे। तब स्कूल से लेकर स्टेडियम तक और धर्मशाला से लेकर मंडियों की फड़ तक धान से ही अटे रखे गए। हालांकि इससे चावल की क्वालिटी को भारी नुकसान पहुंचा और निर्यात किया गया चावल कई जगहों से वापिस आया था।
'गेहूं भंडारण में कोई दिक्कत नहीं...हम चाहें इसे फसल को शैड में स्टोर करें या खुले में प्लींथ पर, अभी मामला चल जाएगा... धान की फसल आने के बाद चावल मुसीबत बन सकता है, प्रदेश से अनाज की मूवमेंट तेज करने को एक बार फिर लिखा गया हैÓ रविंदर सिंह चीमा, वाइस चेयरमैन मंडी बोर्ड
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