बांधों में पानी
-पिछले साल से भाखड़ा में 32 फुट, पौंग में 24 फुट, रणजीत सागर में आठ मीटर पानी कम, पर आवक तीस फीसदी च्यादा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
देश भर में विशेष रूप से उत्तर भारत में पिछले साल रहने वाले बेहतरीन मानसून का असर खत्म अब पूरी तरह से खत्म हो चला है। अच्छे मानसून से लबालब भरे बांधों के खाली होने का सीजन शुरु हो गया है और भाखड़ा जैसे बड़े बांध का जल स्तर हरउ रोज एक फुट की गति से नीचे आ रहा है।
दिलचस्प है कि पिछले साल के अच्छे मानसून ने मंहगाई पर कितना असर डाला यह तो सामने नहीं आ पाया लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के कई बिजली बोर्ड व निगमों को पन बिजली उत्पादन के मामले में भारी राहत दी थी। एक ओर जहां ये बोर्ड व कंपनियां मंहगी बिजली खरीद करने से बची और घाटे को नियंत्रित रखने में कामयाब रही वहीं आम जनता भी बिजली कटों से करीब करीब मुक्त रही। वर्तमान शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी सरकार के एक बार फिर सत्ता में आने के चंद कारणों में बत्ती गुल ना होना भी माना जाता है। लेकिन इस सीजन में हालात लगभग बदले हुए हैं।
गर्मी के शुरु होने के बाद से पिछले दो सप्ताहों में बांधों का जल स्तर हर रोज एक फुट की गति से नीचे आ रहा है। पन बिजली उत्पादन के लिए बांधों के पानी पर निगाह रखने वाले पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के आंकड़े बताते हैं कि जहां पानी के स्तर में तेज गिरावट दर्ज की जा रही है वहीं पिछले साल की तुलना में स्तर भी खासा नीचे आ चुका है। सबसे बड़े भाखड़ा बांध में पिछले साल के 1590 फुट से 32 फुट, पौंग में पिछले साल के 1345 फुट से 24 फुट और रणजीत सागर में पिछले साल आज ही के दिन नापे गए 504 मीटर से आठ मीटर पानी कम है।
बांधों में पानी की आवक इस साल तीस फीसदी च्यादा बनी हुई है। सतलुज-व्यास नदियों पर बनी भाखड़ा परियोजना में आवक 12 हजार क्यूसिक के पार है तो बीते साल साढ़े सात हजार क्यूसिक पर थी। इसी प्रकार पौंग में 15 सौ क्यूसिक के मुकाबले 21 सौ क्यूसिक पानी आ रहा है जबकि रावी नदी पर बने रणजीत सागर बांध में 34 सौ क्यूसिक की अपेक्षा 66 सौ क्यूसिक पानी आ रहा है। इतना ही नहीं इन बांधों से पिछले साल की तुलना में पानी छोडऩे का काम भी अब संयम से किया जा रहा है।
टेबल
बांध- भाखड़ा
25 मार्च, 2012- 1571 फुट,
25 मार्च 2011- 1598 फुट
26 मार्च- 1570 फुट
सात अप्रैल- 1559 फुट
आठ अप्रैल, 2012- 1558 फुट
आठ अप्रैल, 2011- 1590 फुट
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