पृथ्वी के प्रहरी 3
-कम्यूनिटी मेडिसन के विशेषज्ञ है डा. अमर सिंह आजाद
-सेहत का ख्याल रखने का बेहतर तरीका आसपास का वातावरण खराब ना होने दो
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भूपेश चट्ठा, पटियाला
पेश से डाक्टर और कम्यूनिटी मेडिसन के विशेषज्ञ व जाने माने पर्यावरणविद् डा. अमर सिंह आजाद ने अपने काम के साथ पंजाब के पानी, पर्यावरण और पेस्टीसाइड और प्राकृतिक खेती को ही एजेंडा बना लिया। डा. अमर सिंह आजाद हाल ही के सालों में पंजाब में बढ़ रहे कैंसर के मरीजों के कारणों की तलाश करने के दौरान भूमिगत पानी में यूरेनियम पाए जाने के खुलासे के बाद खासी चर्चा में आए।
हालांकि उनकी उपलब्धियों में पिछले करीब दस सालों में रेडियो टाक, टेलीविजन चैनलों पर चर्चा, अखबारों में आर्टीकल के अलावा 'पंजाब ईको क्राइसेजÓ जैसे गूगल के ग्रुप शामिल हैं, जहां पर्यावरण पर तीखी बहस जारी रहती है। लोगों को पेस्टीसाइड व केमिकल फर्टीलाइजर के बिना प्राकृतिक खेती पर जोर देने वाले डा. आजाद कहते हैं कि सेहत का ख्याल रखने का बेहतर तरीका आसपास का वातावरण खराब ना होने दो।
लोगों को जागरुक करने के अपने अभियान के तहत वे हर संपर्क सूत्र का प्रयोग करते हैं। निजी स्तर पर प्रयोगशालाओं, जिनमें विदेशी भी शामिल हैं, पानी, सिर के बाल जैसे नमूनों की जांच करवा कर अपनी बात तथ्यों सहित सामने रखते हैं। फोटो खिंचवा कर भाषण देने जैसे कामों से वे दूर ही रहते है।
वहीं जमीनी हालातों पर डा. आजाद कहते हैं कि पंजाब के अलावा हरियाणा व हिमाचल प्रदेश की इंडस्ट्री का टॉक्सिक जल, कई तरह के हैवी मैटल व रसायनिक तत्वों के साथ और यहां के शहरों का सीवरेज लगातार दरिया व बरसाती नालों में उड़ेला जा रहा है। जो प्राकृति के नियम के विपरीत है। जो पानी एक बार ले लिया जाता है, उसे वापिस नदी अथवा नाले में नहीं डाला जाता, उस पानी का शोधन कर खेती में सिंचाई के लिए प्रयोग करना होता है। लेकिन यहां पर सारी इंडस्ट्री लगाई ही नदी किनारे जाती है, सरकार सोई रहती है और खुद अनुमति देती जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपनी सारी उम्र में एक भी इंडस्ट्री अथवा प्रदूषण फैलाने वाले को सजा नहीं दिलवा पाता।
डा. आजाद कहते हैं कि जिस पानी की कसमें खाई जाती थी और जिस पर गीत लिखे जाते थे, वो बहता पानी तो कई साल पहले गंदा कर दिया अब तो रिस कर धरती के नीचे पहुंचा पानी बीमारियां दे रहा है।
सरकार को परामर्श
डा. आजाद सलाह देते हैं कि सरकार को हर दिशा में काम करना होगा। नियम कानून को सख्ती से लागू करने के अलावा, घटिया और पुरानी पड़ चुकी तकनीक को पंजाब आने से रोकना होगा। जिससे शराब फैक्ट्रीयों की बाढ़ ना आए, कोयला आधारित थर्मल प्लांट ना आएं। पेस्टीसाइड व रसायनिक खादों का प्रयोग कम कर प्राकृतिक खेती की ओर जाना और शहरों में बड़े पैमाने पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने होंगे। तभी जीवन चक्र में प्रवेश कर चुके टॉक्सिक ततव निकाले जा सकेंगे अन्यथा कैंसर के रूप में ये फूटते रहेंगे।
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