2009 मई में खरीदी गई चार लाख 4187 टन गीली गेहूं कर चुकी है उम्र पूरी
-राच्य सरकार की चार एजेंसियों पर पड़ी सबसे च्यादा मार
भूपेश चट्ठा, पटियाला
चुनाव सर पर हों तो सत्ताधारी राजनीतिक दल को एंटी इंक्बेंसी फेक्टर की चिंता सबसे च्यादा सताती है मई 2009 में हुए लोकसभा चुनावों से ठीक पहले भी कुछ ऐसा ही हुआ गेहूं खरीद के दिनों में बारिश आई तो उपज खेत और मंडी दोनों जगहों पर भीग गई लेकिन वोटदाता किसान कहीं नाराज ना हो जाए इसका प्रबंध कर लिया गया और हर तरह का गेहूं खरीद लिया गया इसमें बारिश में भीगा हुआ गेहूं भी शामिल है।
कथित रूप से सरकारी अफसरों के दवाब तले अधिक नमी वाला ये चुनावी गेहूं आज पंजाब सरकार से लेकर केंद्र तक सभी के लिए बड़ा सरदर्द बन गया है। तकनीकि रूप से 12 फीसदी से ज्यादा नमी वाले गेहूं की खरीद नहीं की जा सकती। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्र बताते है कि चार लाख 4187 टन गेहूं गुणवत्ता के हिसाब से ठीक नहीं रहा। ठीकठाक से गेहूं की सेल्फ लाइफ दो साल से अधिक नहीं होती, खुले में या एक बार भीगने के बाद यह सीमा एक साल में सिमट जाती है।
दिलचस्प है कि घटिया गेहूं के लिए केंद्रीय खरीद एजेंसी एफसीआई राज्य की खरीद एजेंसियों पर अब एक ओर रिकवरी का दवाब बना रही है, जबकि राच्य की खरीद एजेंसियों की कोआर्डिनेशन कमेटी कह रही है कि वर्ष 2009 में 105 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी इस अनुसार ये साढ़े तीन फीसदी से भी च्यादा नहीं है। ऐसे में या तो एफसीआई इसे पूर्व में लाई गई ओपन मार्केट सेल्स की योजना के तहत इससे कुछ वसूली कर ले या फिर गेहूं से बिक्री कर वसूलने वाली राज्य सरकार इसकी कीमत वहन करे, लेकिन इसमें की जा रही देरी इसे जानवरों के खाने लायक भी नहीं छोडऩे वाली। अन्यथा वोदका बनाने अनाज सड़ा दिया के आरोप लगने तय है।
पंजाब फूडग्रेन एजेंसियों की संयुक्त तालमेल कमेटी के प्रधान भूपिंदर सिंह कहते है कि इस साल 31 मार्च तक पंजाब में 46 लाख टन गेहूं ढुलाई के इंतजार में है। इसमें दुत्कारा जाने वाला भीगा हुआ चुनावी गेहूं एफसीआई के एजेंडे पर बिलकुल नहीं आ रहा है।
भूपिंदर सिंह बताते है कि पनग्रेन के पास कुल छह लाख 43 हजार टन गेहूं है तो 2009 का 25 हजार टन है। इसी प्रकार मार्कफैड के पास कुल 14 लाख 71 हजार टन में से 2009 का एक लाख 62 हजार टन, पनसप के कुल 11 लाख 92 हजार टन में से 88147 टन, पंजाब वेयर हाउसिंग कारपोरेशन लिमिटेड के कुल छह लाख 13 हजार टन में से 51061 टन चुनावी गेहूं है तो पंजाब एग्रो का ये आंकड़ा कुल सात लाख 22 हजार टन में से 77286 टन भीगे हुए गेहूं का है।
-राच्य सरकार की चार एजेंसियों पर पड़ी सबसे च्यादा मार
भूपेश चट्ठा, पटियाला
चुनाव सर पर हों तो सत्ताधारी राजनीतिक दल को एंटी इंक्बेंसी फेक्टर की चिंता सबसे च्यादा सताती है मई 2009 में हुए लोकसभा चुनावों से ठीक पहले भी कुछ ऐसा ही हुआ गेहूं खरीद के दिनों में बारिश आई तो उपज खेत और मंडी दोनों जगहों पर भीग गई लेकिन वोटदाता किसान कहीं नाराज ना हो जाए इसका प्रबंध कर लिया गया और हर तरह का गेहूं खरीद लिया गया इसमें बारिश में भीगा हुआ गेहूं भी शामिल है।
कथित रूप से सरकारी अफसरों के दवाब तले अधिक नमी वाला ये चुनावी गेहूं आज पंजाब सरकार से लेकर केंद्र तक सभी के लिए बड़ा सरदर्द बन गया है। तकनीकि रूप से 12 फीसदी से ज्यादा नमी वाले गेहूं की खरीद नहीं की जा सकती। विभाग के उच्च स्तरीय सूत्र बताते है कि चार लाख 4187 टन गेहूं गुणवत्ता के हिसाब से ठीक नहीं रहा। ठीकठाक से गेहूं की सेल्फ लाइफ दो साल से अधिक नहीं होती, खुले में या एक बार भीगने के बाद यह सीमा एक साल में सिमट जाती है।
दिलचस्प है कि घटिया गेहूं के लिए केंद्रीय खरीद एजेंसी एफसीआई राज्य की खरीद एजेंसियों पर अब एक ओर रिकवरी का दवाब बना रही है, जबकि राच्य की खरीद एजेंसियों की कोआर्डिनेशन कमेटी कह रही है कि वर्ष 2009 में 105 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी इस अनुसार ये साढ़े तीन फीसदी से भी च्यादा नहीं है। ऐसे में या तो एफसीआई इसे पूर्व में लाई गई ओपन मार्केट सेल्स की योजना के तहत इससे कुछ वसूली कर ले या फिर गेहूं से बिक्री कर वसूलने वाली राज्य सरकार इसकी कीमत वहन करे, लेकिन इसमें की जा रही देरी इसे जानवरों के खाने लायक भी नहीं छोडऩे वाली। अन्यथा वोदका बनाने अनाज सड़ा दिया के आरोप लगने तय है।
पंजाब फूडग्रेन एजेंसियों की संयुक्त तालमेल कमेटी के प्रधान भूपिंदर सिंह कहते है कि इस साल 31 मार्च तक पंजाब में 46 लाख टन गेहूं ढुलाई के इंतजार में है। इसमें दुत्कारा जाने वाला भीगा हुआ चुनावी गेहूं एफसीआई के एजेंडे पर बिलकुल नहीं आ रहा है।
भूपिंदर सिंह बताते है कि पनग्रेन के पास कुल छह लाख 43 हजार टन गेहूं है तो 2009 का 25 हजार टन है। इसी प्रकार मार्कफैड के पास कुल 14 लाख 71 हजार टन में से 2009 का एक लाख 62 हजार टन, पनसप के कुल 11 लाख 92 हजार टन में से 88147 टन, पंजाब वेयर हाउसिंग कारपोरेशन लिमिटेड के कुल छह लाख 13 हजार टन में से 51061 टन चुनावी गेहूं है तो पंजाब एग्रो का ये आंकड़ा कुल सात लाख 22 हजार टन में से 77286 टन भीगे हुए गेहूं का है।
its good effort by you. Govt should aware to save grain
ReplyDeleteNaresh batish