Monday, 9 May 2011

संगत दर्शन में 'थापी' तय करेगी उम्मीदवारी, akali, politics, election, candidate


-पहले हल्का इंचार्ज बन 'राज'  किया अब 'सेवा'  करेंगे

-बड़े बादल की नीति आज भी कामयाब, कहते है कि नाम घोषित कर दिया तो बिल बढ़ जाएंगे

भूपेश चट्ठा, पटियाला

'प्रधान जी...अज कल कित्थे...की बनूं...टिकट दा की...हल्का ओई...जां...' पंजाब की सत्ता पर काबिज अकाली दल के हर संभावित उम्मीदवार के इर्द गिर्द रहने वाले, चाटूकारों, दोस्तों, रिश्तेदारों और चुनावों में खजाने की सेवा लगाने वालों के बीच आजकल ये ही जुमला आम हो रखा है। हर विधान सभा क्षेत्र में पार्टी टिकट की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं को अब शुरू होने वाले संगत दर्शनों के सिलसिले में ही पार्टी टिकट के रूप में बड़े या छोटे बादल की 'थापी' का इंतजार है, ये थापी के रूप में मिला आर्शीवाद ही अगले चुनावों में पार्टी का टिकट होगा। प्रदेश की राजनीति से जुड़े विश्लेषक बताते है कि कांग्रेस अथवा भारतीय जनता पार्टी या फिर बहुजन समाज पार्टी जैसे राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से ठीक विपरीत शिरोमणि अकाली दल अक्सर विधान सभा या लोक सभा के चुनावों से काफी पहले अनौपचारिक रूप से ही सही पार्टी के उम्मीदवारों की घोषणा करता रहा है। इस बार भी च्यादा कुछ अलग नहीं होने वाला। अंतर सिर्फ इतना ही है कि पार्टी हाईकमान समानांतर धाराओं में बह रहा है। पहले ये घर के अंदर का मामला हुआ करता था पर अब थोड़ा बाहर आ गया है। संगत दर्शन पिछली बार अकाली भाजपा कार्यकाल के अंतिम वर्ष में भी हुए थे और इस बार भी 12 मई से हो रहे है। हर नेता पहले ही अपनी ओर से रैलियां कर बसों के आंकड़ों का दमखम दिखा चुका है। यह कसरत संगत दर्शनों से पहले निर्णायक रूप हासिल कर लेगी।

जानकार कहते है कि तत्कालीन पार्टी प्रधान और 2007 में चौथी बार मुख्यमंत्री बने प्रकाश सिंह बादल की नीति तब भी कामयाब थी और आज भी है। पहले उन्होंने हारे उम्मीदवारों को भी हल्का इंचार्ज बन 'राज'  करने का पूरा मौका दिया और अब 'सेवा' लगाएंगे। ऐसे मान सम्मान वफादारों को मिलता रहा है और मिलेगा भी पर इस बार के चुनाव में कमान युवा शक्ति के पास है ऐसे में जीत की संभावना भी 'बायोडाटा' में जरूरी है। हालांकि बड़े बादल की नीति पर एक वयोवृद्ध अकाली नेता कहते है कि वे आज भी कामयाब है कि नाम घोषित कर दिया तो बिल बढ़ जाएंगे। ऐसे में 'थापी' से ही काम चला लो, जरूरत पड़े तो अंत में बदलाव भी किया जाए तो किरकिरी ना हो और अपना बंदा तैयारी भी पूरी कर ले और बागियों ने भी जहां कहीं जाना हो तो वो काम भी निपट जाए।

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