-एक ही दिन में चांदी 14 फीसदी फिसली
- सोना अपनी उंचाई से पखवाड़े में दस फीसदी नीचे आया
भूपेश चट्ठा, पटियाला
विवाह के गहने हो या निवेश, सोना-चांदी खरीदना हमेशा से ही नगद राशि की तुलना में अच्छा माना जाता रहा है, ये सस्ता मिल जाए और इसके लिए वर्ष का सबसे शुभ महूर्त हो तो सोने पे सुहागा वाली बात हो जाती है लेकिन इस साल अक्षय तृतीया जैसे शुभ महूर्त पर सभी आदर्श परिस्थितियों के एक साथ आ जाने के बावजूद खरीदारी शगुन से आगे नहीं बढ़ी है। लोग असमंजस में हैं कि क्या सोना-चांदी यहां से ओर गिरेगा या एक बार फिर उपर का रुख करेगा। इसी उधेड़बुन ने आम आदमी के हाथ बांध दिए है।
बाजार पर करीब से निगाह रखने वाले बताते है कि पिछले आठ सालों से सोना अप्रैल सात से 20 के बीच अपना वर्ष भर की नई उंचाई बनाता आ रहा है। इस बार भी अप्रैल में 23 हजार 600 के पार जाने के बाद अक्षय तृतीया से ठीक एक दिन पहले भारी गिरावट के बाद भारत में सोना खरीदने के सबसे पवित्र दिन यह एक बार फिर अपनी उंचाई से करीब दस फीसदी नीचे आ गिरा है।
ठीक ऐसे ही हालात चांदी के बन पड़े है, चांदी भी 73 हजार से एक ही दिन में 14 फीसदी टूट कर 54 हजार पर आ गई है। कमोडिटी बाजार में कच्चा तेल वीरवार की शाम दस डालर गिरा तो अक्षय तृतीया पर इसमें चार डालर प्रति बैरल की गिरावट के साथ ये 95 डालर तक सिमट चुका है। विश्व भर में लगभग सभी मुद्राओं के मुकाबले डालर का मजबूत होना इन धातुओं को नीचे ला रहा है।
जानकार कहते है कि अक्षय तृतीया को इस बार शगुन के रूप में सोना खरीदना है तो ठीक अन्यथा त्यौहारी सीजन या विवाहों के अगले सीजन को ध्यान में रख खरीदारी करनी हो तो जून का इंतजार जरूर कर लेना चाहिए। आने वाले समय में बढ़ी ब्याज दरों के चलते इन मूल्यवान धातुओं पर दवाब बना रह सकता है।
वहीं स्र्वणकार एसोसिएशन पटियाला के प्रधान सतपाल वर्मा कहते है कि कृषि अर्थ व्यवस्था वाले पंजाब के कुछ बड़े शहरों के हाई-फाई लोगों को छोड़ दें तो रबी के सीजन के इन दिनों में सोना च्यादा नहीं बिकता, अलबत्ता दिवाली से पहले आई धनतेरस का जरूर महत्व है। गेहूं की उपज मंडियों में आ बिक तो गई है पर पैसा अभी किसान से होता हुआ मार्केट में नहीं आया है। पहले बैंक से चेक क्लीयर होंगे फिर किसान आढ़ती का चुकाएगा और इसके बाद बाजार की ओर निकलेगा। चूंकि अगली धान की फसल की बिजाई पर तुलनात्मक रूप से च्यादा खर्च होता है,ये बचत भी सोने पर निवेश पर रोक लगा देती है।
- सोना अपनी उंचाई से पखवाड़े में दस फीसदी नीचे आया
भूपेश चट्ठा, पटियाला
विवाह के गहने हो या निवेश, सोना-चांदी खरीदना हमेशा से ही नगद राशि की तुलना में अच्छा माना जाता रहा है, ये सस्ता मिल जाए और इसके लिए वर्ष का सबसे शुभ महूर्त हो तो सोने पे सुहागा वाली बात हो जाती है लेकिन इस साल अक्षय तृतीया जैसे शुभ महूर्त पर सभी आदर्श परिस्थितियों के एक साथ आ जाने के बावजूद खरीदारी शगुन से आगे नहीं बढ़ी है। लोग असमंजस में हैं कि क्या सोना-चांदी यहां से ओर गिरेगा या एक बार फिर उपर का रुख करेगा। इसी उधेड़बुन ने आम आदमी के हाथ बांध दिए है।
बाजार पर करीब से निगाह रखने वाले बताते है कि पिछले आठ सालों से सोना अप्रैल सात से 20 के बीच अपना वर्ष भर की नई उंचाई बनाता आ रहा है। इस बार भी अप्रैल में 23 हजार 600 के पार जाने के बाद अक्षय तृतीया से ठीक एक दिन पहले भारी गिरावट के बाद भारत में सोना खरीदने के सबसे पवित्र दिन यह एक बार फिर अपनी उंचाई से करीब दस फीसदी नीचे आ गिरा है।
ठीक ऐसे ही हालात चांदी के बन पड़े है, चांदी भी 73 हजार से एक ही दिन में 14 फीसदी टूट कर 54 हजार पर आ गई है। कमोडिटी बाजार में कच्चा तेल वीरवार की शाम दस डालर गिरा तो अक्षय तृतीया पर इसमें चार डालर प्रति बैरल की गिरावट के साथ ये 95 डालर तक सिमट चुका है। विश्व भर में लगभग सभी मुद्राओं के मुकाबले डालर का मजबूत होना इन धातुओं को नीचे ला रहा है।
जानकार कहते है कि अक्षय तृतीया को इस बार शगुन के रूप में सोना खरीदना है तो ठीक अन्यथा त्यौहारी सीजन या विवाहों के अगले सीजन को ध्यान में रख खरीदारी करनी हो तो जून का इंतजार जरूर कर लेना चाहिए। आने वाले समय में बढ़ी ब्याज दरों के चलते इन मूल्यवान धातुओं पर दवाब बना रह सकता है।
वहीं स्र्वणकार एसोसिएशन पटियाला के प्रधान सतपाल वर्मा कहते है कि कृषि अर्थ व्यवस्था वाले पंजाब के कुछ बड़े शहरों के हाई-फाई लोगों को छोड़ दें तो रबी के सीजन के इन दिनों में सोना च्यादा नहीं बिकता, अलबत्ता दिवाली से पहले आई धनतेरस का जरूर महत्व है। गेहूं की उपज मंडियों में आ बिक तो गई है पर पैसा अभी किसान से होता हुआ मार्केट में नहीं आया है। पहले बैंक से चेक क्लीयर होंगे फिर किसान आढ़ती का चुकाएगा और इसके बाद बाजार की ओर निकलेगा। चूंकि अगली धान की फसल की बिजाई पर तुलनात्मक रूप से च्यादा खर्च होता है,ये बचत भी सोने पर निवेश पर रोक लगा देती है।
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