भूपेश चट्ठा, रामनगर (पटियाला) खुशी व गम में साथ हैं, बाढ़ व सूखे के दर्द भी हमारे एक हैं..अलग है तो बस लड़ाई-झगड़े। बात कोर्ट कचहरी तक जाती है तो ये लोग जमानत के लिए पटियाला और समाना जाते हैं, जबकि हम चीका या कैथल। इसके अलावा सारी बात सांझी है। पटियाला शहर से हांसी-बुटाना नहर की ओर जाते समय रास्ता भले ही 32 किलोमीटर का हो, लेकिन हरियाणा में बनी इस नहर पर पहुंचने से पहले ही एक स्थान पर अचानक सड़क का रंग व हुलिया बदल जाता है और पंजाबी के बजाय हिंदी में लिखे साइन बोर्ड आपका स्वागत करते हैं। थोड़ा आगे जाते ही बताया जाता है कि पंजाब से पेट्रोल व डीजल सस्ता है, पेट्रोल पंप 100 मीटर आगे है। कुछ इसी तरह की अपील शराब की दुकान भी करती है। चंद किलोमीटर के अंतराल में मुख्य मार्ग पर एक बार और लिंक सड़कों पर दो बार ऐसी ही स्थिति पैदा होती है। इस क्षेत्र में बसे हरियाणा के करीब आधा दर्जन गांव आज पूरी तरह से पंजाबी हो गए हैं। घमेहड़ी, कसौली, बोपर, खमबहेड़ी, सराला और सोबनपुर के लोगों ने आज खुलकर रामनगर की महापंचायत में अपनी उपस्थिति दर्शाई। चाय की दुकान पर पंजाब पुलिस के जवानों और महिला अधिकारियों की मौजूदगी में राजनीति पर हुई गर्मागर्म बहस में गुरदीप सिंह नौगावां कहते हैं कि ये लोग तो हमारे साथ ही रहेंगे, हमारी रिश्तेदारियां भी है और तो और खेत की मेढ़ भी एक हैं। ऐसे में हित जुदा कैसे हो सकते हैं। वहीं नहर को हरियाणा की पानी की राजनीति से जोड़ने वाले अवतार सिंह खमबहेड़ी व गुरदीप सिंह बोपर कहते हैं कि जीरी इनकी खराब हो तो पनीरी हम देते हैं। पानी को चौटाला साहिब के इलाके से निकाल कर सीएम हुड्डा अपने वोटरों को पिलाने ले जा रहे हैं, इससे हमे कोई मतलब नहीं है, पर हमारे यहां बाढ़ नहीं आनी चाहिए। उसका सीधा कारण नगर के साथ बन रही दीवार, छोटा साइफन व गलत तकनीक है। इसी क्रम में ठाकुर सिंह मान कहते हैं कि नहर के पहले एस्टीमेट 80 किलोमीटर के थे पर अब इसे बढ़ाकर 110 किलोमीटर कर दिया गया और 30 किलोमीटर का चक्कर घग्गर नदी के साथ लगाया गया है। इससे स्पष्ट है कि नहर को बनाया ही नदी के कारण हरियाणा की ओर आने वाली बाढ़ को रोकना है। ऐसे में सारे तर्क बेमानी हैं।
पुतला फूंककर वापस लौटी यूनियन
उप मुख्य संवाददाता, रामनगर (पटियाला) : हांसी-बुटाना नहर और इसके साथ बन रही कंक्रीट की दीवार के कारण संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए भारतीय किसान यूनियन (एकता डकौंदा) की महापंचायत का खास असर देखने को नहीं मिला। यूनियन ने तय कार्यक्रम के अनुसार केंद्र, पंजाब व हरियाणा सरकार का पुतला फूंककर वापसी कर ली। हरियाणा की ओर से किए गए प्रयासों से यूनियन केअभियान को शुक्रवार से ही झटके लगने शुरू हो गए थे, जबकि आज उन्हें मात्र किसान कार्यकर्ताओं का सीमित समर्थन ही मिल पाया। हरियाणा सरकार ने पंजाब -हरियाणा सीमा पर भारी पुलिस बल की तैनात किया था। हरियाणा क्षेत्र में धारा 144 भी लगा दी गई है। हरियाणा सरकार की अपने
अफसरों के माध्यम से चलाई गई लोक संपर्क नीति सोमवार दोपहर तक जारी रही है। हरियाणा के अधिकारियों ने पंजाब की ओर जाने वाले हर व्यक्ति की पहचान पूछने के साथ उन्हें न जाने की सलाह भी दी है। इसी प्रकार पंचायतों को भी बुलाकर दबाव बनाया। यूनियन के जिला प्रधान डॉ. दर्शन पाल व हरभजन सिंह धर्मेहड़ी ने बताया कि हरियाणा के गांवों से कुछ प्रतिनिधि आए हैं। हरियाणा के करीब 45 और पंजाब के 50 से ज्यादा गांव बाढ़ की मार तले आते हैं और जमीनी सच्चाई यह है कि अब तक किसी ने कुछ नहीं किया। ऐसे में वे दबाव बनाकर बाढ़ से बचाव का उपाय चाहते हैं। याद रहे कि हरियाणा के सिंचाई मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने रविवार को ही दीवार वाली जगह पर साइफन बनाने, घग्गर नदी के साइफन को गहरा करने और मौजूदा साइफन की क्षमता बढ़ाने जैसी हर मांग को पूरा करने की बात कही है। इसके साथ ही दीवार को भी नहर के तल से उपर न उठाने की बता कही है।
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