- इसी महीने की 27वीं रात को खुदा ने कुरान शरीफ को धरती पर उतारा था
- कसरत के साथ इबादत की जाती है, तीस दिनों तक
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार तीसरे महीने रमजान की शुरुआत संभावित रूप से मंगलवार को होने जा रही है। सोमवार की रात चांद दिखाई देने के बाद रमजान महीने में अगले तीस दिनों तक रोजे चलेंगे। कसरत के साथ इबादत का यह महीना मुस्लिम भाईचारे में इंसान के लिए सब्र व अल्लाह की मेहरबानियों पर शुक्र अदा करने के लिए मनाया जाता है।
पंजाबी युनिवर्सिटी पटियाला में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के लेक्चरार युनुस मोहम्मद बताते हैं कि रमजान के पवित्र महीने की 27 वीं रात को जार-ए-हिरा में कुरान शरीफ को धरती पर खुदा ने उतारा था। इस महीने में मुसलमान सूरज निकलने से लेकर इसके डूबने तक की अवधि में ना तो कुछ खाते हैं और ना ही पीते हैं। आम दिनों में अगर आप सिर्फ पांच वक्त की नमाज अता करते हैं तो रमजान में नफूल भी पढ़ा जाता है। इसके पढऩे से और ज्यादा सबब मिलता है। रात में तरावी की नमाज भी अता की जाती है।
यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के प्रो.इदरीस बताते हैं कि मुख्य रूप से रमजान आपकी इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण करने का साधन है। इसे आप भूखे या प्यासे रहने मात्र से नहीं जोड़ कर देख सकते। बंदे का सब्र कैसा है? अल्लाह का शुक्र करने के अलावा आप झूठ, निंदा, चुगली से कैसे बचते हैं। जीभ के अलावा आंख, नाक पर कैसे नियंत्रण रखते हैं सभी की परीक्षा होती है। इस महीने में आप साधारण दिनों की तुलना में ज्यादा मेहनत करते हैं। अपने सभी फर्ज निभाते हुए, खुदा की इबादत करते हैं और ये सारा कार्य दिन भर में बिना कुछ खाए पिए करना होता है।
- कसरत के साथ इबादत की जाती है, तीस दिनों तक
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार तीसरे महीने रमजान की शुरुआत संभावित रूप से मंगलवार को होने जा रही है। सोमवार की रात चांद दिखाई देने के बाद रमजान महीने में अगले तीस दिनों तक रोजे चलेंगे। कसरत के साथ इबादत का यह महीना मुस्लिम भाईचारे में इंसान के लिए सब्र व अल्लाह की मेहरबानियों पर शुक्र अदा करने के लिए मनाया जाता है।
पंजाबी युनिवर्सिटी पटियाला में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के लेक्चरार युनुस मोहम्मद बताते हैं कि रमजान के पवित्र महीने की 27 वीं रात को जार-ए-हिरा में कुरान शरीफ को धरती पर खुदा ने उतारा था। इस महीने में मुसलमान सूरज निकलने से लेकर इसके डूबने तक की अवधि में ना तो कुछ खाते हैं और ना ही पीते हैं। आम दिनों में अगर आप सिर्फ पांच वक्त की नमाज अता करते हैं तो रमजान में नफूल भी पढ़ा जाता है। इसके पढऩे से और ज्यादा सबब मिलता है। रात में तरावी की नमाज भी अता की जाती है।
यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के प्रो.इदरीस बताते हैं कि मुख्य रूप से रमजान आपकी इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण करने का साधन है। इसे आप भूखे या प्यासे रहने मात्र से नहीं जोड़ कर देख सकते। बंदे का सब्र कैसा है? अल्लाह का शुक्र करने के अलावा आप झूठ, निंदा, चुगली से कैसे बचते हैं। जीभ के अलावा आंख, नाक पर कैसे नियंत्रण रखते हैं सभी की परीक्षा होती है। इस महीने में आप साधारण दिनों की तुलना में ज्यादा मेहनत करते हैं। अपने सभी फर्ज निभाते हुए, खुदा की इबादत करते हैं और ये सारा कार्य दिन भर में बिना कुछ खाए पिए करना होता है।
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