Friday, 26 August 2011

पांच सौ के नोट से उपर पव्वे की जांच! excise, check


-डिस्टलरियों-होल सेलरों पर नकेल पर ठेकेदारों की ठगी...
-आबकारी विभाग ने 16 चरणों की जांच शराब बोतलों पर लागु की
भूपेश चट्ठा, पटियाला
हुई मंहगी बहुत ही शराब के थोड़ी थोड़ी...पंकज उदास की ये लोकप्रिय गजल पंजाब सरकार को शायद पसंद ना आए। लेकिन राज्य सरकार की ओर से आबकारी कर से आय में 30 फीसदी सालाना की बढ़ोतरी का लक्ष्य पाने अब शराब की बोतल देसी हो या अंग्रेजी, पव्वा हो या अध्यिा की जांच पांच सौ रूपये के करंसी नोट से उपर ला खड़ी की है।
उपभोक्ताओं के साथ-साथ सरकारी खजाने लिए ये अच्छी खबर है कि ग्राहक को उच्च गुणवत्ता की शराब मिलेगी तो सरकार को राजस्व लेकिन आबकारी विभाग की ओर से 16 चरणों की जांच अथवा पहचान की सुरक्षा के जिन उपायों को शराब बोतलों पर लागु किया गया है उनसे शराब बनाने वाली डिस्टलरियों, वितरित करने वाले होल सेलरों पर तो इससे नकेल कसी गई है पर ठेकेदारों की ठगी रोकने में अभी  समय लगता दिख रहा है।
डिप्टी एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर एलए खान ने 'दैनिक जागरण के साथ विशेष बातचीत में बताया कि शराब की हर शीशी पर उसका नंबर लगाए जाने के अलावा, बनाने वाली डिस्टलरी का नंबर और एक ऐसा जांच का कोड जिसके अधिकार उनके पास भी नहीं है, राज्य में सिर्फ कमिश्नर को ही इसके बारे में पता होगा। वि भागीय स्तर शक के आधार पर की जाने वाली जांच के अलावा बोतल पर लगने वाले होलोग्राम में इंटेगलियो प्रिंटिंग, माइक्रो प्रिंटिंग और इंटेगलियो नेनो प्रिंटिंग के साथ कुछ छिपी हुई इमेज  होगी। जिसकी पहचान हम करंसी नोट की तरह से कर सकेंगे। इसके किनारे पर पंजाब का 'पीÓ चमकेगा।
आयुक्त के हस्ताक्षर के साथ पिंक स्याही का गोला  है, जिसे रगडऩे पर स्पाट पर बढ़े तापमान के चलते रंग उड़ जाता है लेकिन तुरंत ही वापिस भी आ जाता है। खान  कहते हैं कि इसमें वाटर मार्क के अलावा नोट की तरह कुछ उभरे हुए हिस्से भी हैं जिससे इसे स्कैन नहीं किया जा सकता।
शराब अब गुड़ से बनने के बजाए नोटों से बनाए जाने और ऐसे ही पहचान के सुरक्षा उपायों के सवाल पर वे कहते हैं कि करंसी नोट में छिपे हुए फीचर ज्यादा होते हैं, जबकि बताए गए फीचर कम, जिन्हें बैंक के विशेषज्ञों को ही ज्यादा पता होता है। हमारे यहां तो एक-दो को छोड़ सुरक्षा के सभी उपायों का खुलासा किया गया है।
डीईटीसी खान कहते हैं कि विभाग चाहता है कि हर उपभोक्ता को पता हो... वो इसे देखे ...जागरुकता का कोई नुकसान नहीं है। डिस्टलरियों और होल सेलरों पर इसके लागु होने के बाद से कोई मामला नहीं आया है, इसने बड़े पैमाने पर होने वाली  गड़बड़ी रोक दी है। अब या तो ठेके पर गड़बड़ी करता पकड़ा जाएगा या फिर कोई तस्कर इधर उधर से बोतलों में हेर-फेर कर सकता है।


आय में 30 फीसदी बढ़ोतरी का उपाय है...
राज्य में आबकारी कर से आय को 728 करोड़ रूपये बढ़ाया गया है। वर्तमान वर्ष में 2461.78 करोड़ रूपये की आय से बढ़ाकर इसे 3190 करोड़ रूपये करने का लक्ष्य  रखा गया है। राज्य में पिछले एक साल में पिययकड़ों की सं या में 30 फीसदी का ईजाफा तो नहीं हुआ है पर आय बढ़ाने के उपाय जारी हैं।

No comments:

Post a Comment