-जानकारी छुपाने की 'फितरतÓ करवाती है गलती, कंप्यूटर नही करता 'एडजस्टÓ तो प्रार्थना पत्र हो जाता है रिजेक्ट
-पीपीसीबी टाइप करने के साथ ही खुलने वाली वेबसाइट को 'पंजाबी स्टाइलÓ में ढालने पर हो रहा है विचार
भूपेश चट्ठा, पटियाला
राज्य की इंडस्ट्री को भ्रष्टाचार के मकडज़ाल से निकाल घर बैठे ही विकास का पहिया बिना देरी किए घुमाने के पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रयास सिरे चढऩे में लगता है कि थोड़ी मशक्कत और करनी पड़ेगी। पंजाब में इंडस्ट्री लगाने वाले 'आम उद्योगपतिÓ की समझ में नहीं आ रहा कि जो बात वो कहना चाहता है वो कंप्यूटर समझता क्यों नहीं है? परिणाम वही हो रहा है कि ऑन लाइन सिस्टम समझ से परे है और मानवीय शक्ति से किया गया काम ही ठीक है चाहे चार पैसे खर्च क्यों ना हो जाएं।
आन लाइन सिस्टम में एपलाई करने के पिछले चार महीनों के पीपीसीबी के आंकड़े खासे बेहतर है सिस्टम देख रहे एक वरिष्ठ एनवायरमेंटल इंजीनियर बताते हैं कि 280 प्रार्थना पत्र रजिस्ट्रेशन के लिए आए हैं। इसके अलावा कंसेंट के 92 और एनओसी के 14 हैं। कंसेट के प्रार्थना पत्रों में से मात्र 24 को ही मंजूरी मिली है जबकि शेष रिजेक्ट हो गए। अधिकारी बताते हैं कि एक भी जानकारी यदि सही ना हो अथवा कालम खाली रह जाए या डाटा पूरा ना भरा हो तो सिस्टम प्रार्थना पत्र रिजेक्ट कर देता है।
दिलचस्प है कि कोई ना कोई जानकारी छुपाने की इंसानी 'फितरतÓ गलती करवा देती है जबकि कंप्यूटर वहीं करता है जो फीड कर दिया गया है। कई मामलों में तो एक के बाद एक प्रयास कर 'धक्केÓ से कंप्यूटर को मनाने का प्रयास भी हुआ है। पर जब कंप्यूटर 'एडजस्टÓ करता तो प्रार्थना पत्र रिजेक्ट हो जाता है।
गूगल में पीपीसीबी टाइप करने के साथ ही खुलने वाली और हर तरह की जानकारी एक ही झटके में देने वाली इस वेबसाइट को 'पंजाबी स्टाइलÓ में ढालने पर विचार शुरु हो गया है। पीपीसीबी के अधिकारी मानते हैं कि जितनी शानदार व आसान वेबसाइट है उसका प्रयोग उतना नही हो रही रिजेक्ट प्रार्थना पत्रों की संख्या देख लगता है कि सारा सिस्टम ही ठप है।
दूसरी ओर पीपीसीबी के डायरेक्टर लोक संपर्क डा. चरणजीत सिंह नाभा बताते हैं कि यह एक एडीशनल सुविधा है अनिवार्य नहीं। आप चाहें तो पेट्रोल खर्च कर पीपीसीबी के क्षेत्रिय कार्यालय में जाएं और किसी कंसलटेंट की मदद से फीस देकर औपचारिकता पूरी करें या आन लाइन बिना देरी के सूचना आपको सही देनी होगी तभी एनओसी मिलेगी।
क्या है सिस्टम?
पीपीसीबी की ओर से पिछले साल 13 दिसंबर को लार्ज स्केल इंडस्ट्री की रजिस्ट्रेशन करवाने, एनओसी लेने अथवा रिन्यू करवाने के लिए आन लाइन सिस्टम की शुरुआत की गई। तत्कालीन चेयरमैन केएस पन्नू के दिमाग की उपज कहे जाने वाले इस अतिरिक्त सिस्टम के पीछे कारण भ्रष्टाचार को समाप्त करने के अलावा पीपीसीबी की किसी भी स्वीकृति में एक साल तक की देरी भी खत्म करना था। कहा गया कि 15 करोड़ रूपये से अधिक लागत मूल्य पर शुरु किए जाने वाले किसी भी प्लांट के लिए उपलब्ध करवाया गया यह सिस्टम यदि सफल रहा तो अन्य इंडस्ट्री के लिए भी उपलब्ध हो जाएगा। आन लाइन सिस्टम में असिसटेंट एनवायरमेंट इंजीनियर से लेकर चेयरमैन तक की स्वीकृति व प्रार्थना पत्र के स्टेटस की जानकारी हर समय उपभोक्ता के लिए मौजूद रखी गई है।
-पीपीसीबी टाइप करने के साथ ही खुलने वाली वेबसाइट को 'पंजाबी स्टाइलÓ में ढालने पर हो रहा है विचार
भूपेश चट्ठा, पटियाला
राज्य की इंडस्ट्री को भ्रष्टाचार के मकडज़ाल से निकाल घर बैठे ही विकास का पहिया बिना देरी किए घुमाने के पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रयास सिरे चढऩे में लगता है कि थोड़ी मशक्कत और करनी पड़ेगी। पंजाब में इंडस्ट्री लगाने वाले 'आम उद्योगपतिÓ की समझ में नहीं आ रहा कि जो बात वो कहना चाहता है वो कंप्यूटर समझता क्यों नहीं है? परिणाम वही हो रहा है कि ऑन लाइन सिस्टम समझ से परे है और मानवीय शक्ति से किया गया काम ही ठीक है चाहे चार पैसे खर्च क्यों ना हो जाएं।
आन लाइन सिस्टम में एपलाई करने के पिछले चार महीनों के पीपीसीबी के आंकड़े खासे बेहतर है सिस्टम देख रहे एक वरिष्ठ एनवायरमेंटल इंजीनियर बताते हैं कि 280 प्रार्थना पत्र रजिस्ट्रेशन के लिए आए हैं। इसके अलावा कंसेंट के 92 और एनओसी के 14 हैं। कंसेट के प्रार्थना पत्रों में से मात्र 24 को ही मंजूरी मिली है जबकि शेष रिजेक्ट हो गए। अधिकारी बताते हैं कि एक भी जानकारी यदि सही ना हो अथवा कालम खाली रह जाए या डाटा पूरा ना भरा हो तो सिस्टम प्रार्थना पत्र रिजेक्ट कर देता है।
दिलचस्प है कि कोई ना कोई जानकारी छुपाने की इंसानी 'फितरतÓ गलती करवा देती है जबकि कंप्यूटर वहीं करता है जो फीड कर दिया गया है। कई मामलों में तो एक के बाद एक प्रयास कर 'धक्केÓ से कंप्यूटर को मनाने का प्रयास भी हुआ है। पर जब कंप्यूटर 'एडजस्टÓ करता तो प्रार्थना पत्र रिजेक्ट हो जाता है।
गूगल में पीपीसीबी टाइप करने के साथ ही खुलने वाली और हर तरह की जानकारी एक ही झटके में देने वाली इस वेबसाइट को 'पंजाबी स्टाइलÓ में ढालने पर विचार शुरु हो गया है। पीपीसीबी के अधिकारी मानते हैं कि जितनी शानदार व आसान वेबसाइट है उसका प्रयोग उतना नही हो रही रिजेक्ट प्रार्थना पत्रों की संख्या देख लगता है कि सारा सिस्टम ही ठप है।
दूसरी ओर पीपीसीबी के डायरेक्टर लोक संपर्क डा. चरणजीत सिंह नाभा बताते हैं कि यह एक एडीशनल सुविधा है अनिवार्य नहीं। आप चाहें तो पेट्रोल खर्च कर पीपीसीबी के क्षेत्रिय कार्यालय में जाएं और किसी कंसलटेंट की मदद से फीस देकर औपचारिकता पूरी करें या आन लाइन बिना देरी के सूचना आपको सही देनी होगी तभी एनओसी मिलेगी।
क्या है सिस्टम?
पीपीसीबी की ओर से पिछले साल 13 दिसंबर को लार्ज स्केल इंडस्ट्री की रजिस्ट्रेशन करवाने, एनओसी लेने अथवा रिन्यू करवाने के लिए आन लाइन सिस्टम की शुरुआत की गई। तत्कालीन चेयरमैन केएस पन्नू के दिमाग की उपज कहे जाने वाले इस अतिरिक्त सिस्टम के पीछे कारण भ्रष्टाचार को समाप्त करने के अलावा पीपीसीबी की किसी भी स्वीकृति में एक साल तक की देरी भी खत्म करना था। कहा गया कि 15 करोड़ रूपये से अधिक लागत मूल्य पर शुरु किए जाने वाले किसी भी प्लांट के लिए उपलब्ध करवाया गया यह सिस्टम यदि सफल रहा तो अन्य इंडस्ट्री के लिए भी उपलब्ध हो जाएगा। आन लाइन सिस्टम में असिसटेंट एनवायरमेंट इंजीनियर से लेकर चेयरमैन तक की स्वीकृति व प्रार्थना पत्र के स्टेटस की जानकारी हर समय उपभोक्ता के लिए मौजूद रखी गई है।