-निजी क्षेत्र में लग रहे हैं प्लांट, बिजली दरों पर पार पाना नहीं होगा संभव
-वर्तमान में बिजली उत्पादन का सरकारी हिस्सा 52 फीसद
-इंजीनियरों ने मांगा 1320 मेगावाट का मुकेरियां प्लांट
भूपेश चट्ठा, पटियाला
प्रदेश में हरित क्रांति आने के बाद के दशकों को 'बिजली की कमीÓ के नाम से जाना गया है जबकि हाल ही की सरकारों की बिजली नीति के चलते आने वाले दशकों में 'बिजली की मंहगाईÓ पसीना निकालने जा रही है। बिजली उत्पादन के क्षेत्र में सिर्फ और सिर्फ बढ़ रहे निजी क्षेत्र के हिस्से के चलते बिजली उत्पादन में 'सरकारीÓ योगदान मात्र पांचवां हिस्सा ही रह जाएगा।
बिजली उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र का हिस्सा बढ़ाने पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के इंजीनियरों ने ऊर्जा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से 1320 मेगावाट के प्रस्तावित मुकेरियां प्लांट को खुद तैयार करने का प्लान भेजा है। इसमें धन के प्रबंध से लेकर कमीशन तक की योजना है।
पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रधान इंजी. एचएस बेदी याद दिलाते हैं कि शिरोमणि अकाली दल भारतीय जनता पार्टी सरकार के 2007 में सत्ता में आने के साथ पावर सरपल्स राच्य बनाने के नारे के साथ ही तीन अलग चैनलों के माध्यम से थर्मल प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया। इसमें एक निजी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के रास्ते, दूसरा सार्वजनिक और तीसरा संयुक्त उपक्रम के माध्यम से लेकिन 1960 मेगावाट का तलवंडी साबो प्रोजेक्ट वेदांता को, 1400 मेगावाट का राजपुरा प्लांट एलएंडटी को और 540 मेगावाट का गोइंदवाल साहिब का प्रोजेक्ट पहले से ही एमओयू द्वारा जीवीके पावर कंपनी को दे दिया गया।
दिलचस्प है कि गीदड़बाहा क प्रस्तावित प्रोजेक्ट को राच्य की ओर से ही तैयार करने की सलाह हर विशेषज्ञ ने दी लेकिन इस प्रोजेक्ट को 2010 में नैशनल थर्मल पावर कारपोरेशन को दे दिया गया अब एनटीपीसी एक के बाद एक कारण बता पीछे हट रही है।
इसी क्रम में आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फैडरेशन के प्रधान इंजी. पदमजीत सिंह बताते हैं कि इन प्रोजेक्ट के कमीशन होते ही अपना उत्पादन पांचवां हिस्सा ही रह जाएगा और शेष प्राइवेट होगा। केवल निजी क्षेत्र में लग रहे प्लांट से बिजली दरों पर पार पाना किसी भी सरकार के लिए संभव नहीं होगा। वर्तमान में बिजली उत्पादन का सरकारी हिस्सा 52 फीसद से कम हो कर 20 फीसद के नीचे आ जाएगा। अगले दो तीन सालों में उपभोक्ता के लिए बिजली दरें बिजली से च्यादा महत्वपूर्ण होंगी।
इंजी. पदमजीत बताते हैं कि पीएसपीसीएल के प्लांट पुरानी 110, 210 और 250 मेगावाट तकनीकि के हैं जबकि निजी क्षेत्र में सुपर क्रिटिकल तकनीक से 660 और 700 मेगावाट क्षमता की इकाई लगती है।
सरकारी उत्पादन
अंतिम पन बिजली उत्पादन प्लांट
-रणजीत सागर बांध, वर्ष 2000 में क्षमता 600 मेगावाट
अंतिम थर्मल प्लांट
श्री गुरु हर गोबिंद सिंह थर्मल प्लांट लहरा मुहब्बत
पहला चरण-वर्ष 1998 में क्षमता 420 मेगावाट
दूसरा चरण-वर्ष 2008 में क्षमता 500 मेगावाट