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Wednesday, 2 May 2012

पांचवां हिस्सा होगी 'सरकारी' बिजली, शेष प्राइवेट, pvt. sector will dominate power gen. in Punjab


-निजी क्षेत्र में लग रहे हैं प्लांट, बिजली दरों पर पार पाना नहीं होगा संभव
-वर्तमान में बिजली उत्पादन का सरकारी हिस्सा 52 फीसद
-इंजीनियरों ने मांगा 1320 मेगावाट का मुकेरियां प्लांट
भूपेश चट्ठा, पटियाला
प्रदेश में हरित क्रांति आने के बाद के दशकों को 'बिजली की कमीÓ के नाम से जाना गया है जबकि हाल ही की सरकारों की बिजली नीति के चलते आने वाले दशकों में 'बिजली की मंहगाईÓ पसीना निकालने जा रही है। बिजली उत्पादन के क्षेत्र में सिर्फ और सिर्फ बढ़ रहे निजी क्षेत्र के हिस्से के चलते बिजली उत्पादन में 'सरकारीÓ योगदान मात्र पांचवां हिस्सा ही रह जाएगा।
बिजली उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र का हिस्सा बढ़ाने पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के इंजीनियरों ने ऊर्जा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से 1320 मेगावाट के प्रस्तावित मुकेरियां प्लांट को खुद तैयार करने का प्लान भेजा है। इसमें धन के प्रबंध से लेकर कमीशन तक की योजना है।
 पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रधान इंजी. एचएस बेदी याद दिलाते हैं कि शिरोमणि अकाली दल भारतीय जनता पार्टी सरकार के 2007 में सत्ता में आने के साथ पावर सरपल्स राच्य बनाने के नारे के साथ ही तीन अलग चैनलों  के माध्यम से थर्मल प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया। इसमें एक निजी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के रास्ते, दूसरा सार्वजनिक और तीसरा संयुक्त उपक्रम के माध्यम से लेकिन 1960 मेगावाट का तलवंडी साबो प्रोजेक्ट वेदांता को, 1400 मेगावाट का राजपुरा प्लांट एलएंडटी को और 540 मेगावाट का गोइंदवाल साहिब का प्रोजेक्ट पहले से ही एमओयू द्वारा जीवीके पावर कंपनी को दे दिया गया।
दिलचस्प है कि गीदड़बाहा क प्रस्तावित प्रोजेक्ट को राच्य की ओर से ही तैयार करने की सलाह हर विशेषज्ञ ने दी लेकिन इस प्रोजेक्ट को 2010 में नैशनल थर्मल पावर कारपोरेशन को दे दिया गया अब एनटीपीसी एक के बाद एक कारण बता पीछे हट रही है।
इसी क्रम में आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फैडरेशन के प्रधान इंजी. पदमजीत सिंह बताते हैं कि इन प्रोजेक्ट के कमीशन होते ही अपना उत्पादन पांचवां हिस्सा ही रह जाएगा और शेष प्राइवेट होगा। केवल निजी क्षेत्र में लग रहे प्लांट से बिजली दरों पर पार पाना किसी भी सरकार के लिए संभव नहीं होगा। वर्तमान में बिजली उत्पादन का सरकारी हिस्सा 52 फीसद से कम हो कर 20 फीसद के नीचे आ जाएगा। अगले दो तीन सालों में उपभोक्ता के लिए बिजली दरें बिजली से च्यादा महत्वपूर्ण होंगी।
इंजी. पदमजीत बताते हैं कि पीएसपीसीएल के प्लांट पुरानी 110, 210 और 250 मेगावाट तकनीकि के हैं जबकि निजी क्षेत्र में सुपर क्रिटिकल तकनीक से 660 और 700 मेगावाट क्षमता की इकाई लगती है।


सरकारी उत्पादन

अंतिम पन बिजली उत्पादन प्लांट
-रणजीत सागर बांध, वर्ष 2000 में क्षमता 600 मेगावाट

अंतिम थर्मल प्लांट
श्री गुरु हर गोबिंद सिंह थर्मल प्लांट लहरा मुहब्बत
पहला चरण-वर्ष 1998 में क्षमता 420 मेगावाट
दूसरा चरण-वर्ष 2008 में क्षमता 500 मेगावाट

Sunday, 20 November 2011

कैसे कटेगी सर्दी, रहेगी या होगी बत्ती गुल, electricity, winter, power, generation,

...बिजली


-दिसंबर में सर्दी तेज होने के साथ ही कट

-अभी आर्क इंडक्शन फर्नेस पर दो दिन और अन्य इंडस्ट्री पर एक दिन का साप्ताहिक कट चालू

भूपेश चट्ठा पटियाला

बिजली पानी पर सरकारें बदलने वाले पंजाब में विधान सभा के चुनाव होने में चंद महीने शेष हैं जबकि आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने में चंद दिन शेष रहते पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन को अपने बिजली उत्पादन की लाइफ लाइन समझे जाने वाले थर्मल प्लांटों को अनिवार्य वार्षिक मरम्मत के चलते एक के बाद एक सभी को बंद करना पड़ेगा। पावरकाम की ओर से मरम्मत शुरू करते ही बिजली ने झटके देने शुरू कर दिए हैं।

पावरकाम के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि 900 लाख यूनिट की मांग पर 825 की आपूर्ति है। दोनों में 75 लाख यूनिट का अंतर चल रहा है। हालांकि इसकी वजह पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बताया जा रहा है, जिसके आदेश के बाद बठिंडा के श्री गुरू नानक देव थर्मल प्लांट के एक यूनिट को बंद कर दिया गया है। यूनिट के आयु पूरी करने के बाद से यह सीमा से अधिक प्रदूषण फैला रहा था।

कट फ्री धान का सीजन देने वाले पावरकाम को सर्दी की चिंता कुछ च्यादा बताई जा रही है। जिसके चलते इस साल तुलनात्मक रूप से प्लांटों की वार्षिक मरम्मत का कार्य जल्दी आरंभ भी कर दिया है। दिलचस्प है कि गेहूं की बिजाई के बाद दिसंबर अंत से शुरू होने वाला ये सिलसिला अक्सर मई अंत तक लटकता रहता है, लेकिन इस साल अब तक रोपड़ का एक यूनिट बंद कर मरम्मत की जा रही है। यह नवंबर अंत तक पुन: चालू हो जाएगा।

इसके अलावा पिछले डेढ़ साल से बंद चल रहा बठिंडा का पूर्ण जीर्णोद्धार पर गया एक अन्य यूनिट भी दिसंबर अंत तक अपनी बढ़ी क्षमता के साथ उत्पादन चालू कर देगा। सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन की ओर से काम को दु्रत गति से निपटाने की हिदायत जारी हुए बताए जा रहे हैं। आम तौर पर 21 दिन चलने वाली मरम्मत को 18-19 दिनों में कर दिया जाए।

पंजाब में सर्दी के दिनों में बिजली उत्पादन की लाइफ लाइन कहे जाने वाले थर्मल प्लांटों के मरम्मत पर जाने के साथ ही पंजाब सर्दियों में अन्य पहाड़ी राच्यों को बैंकिंग की बिजली भी जमा करवाता है। अभी यह आंकड़ा 125 लाख यूनिट है। दोनों तरफ से पड़े वजन के बाद आर्क इंडक्शन फर्नेस पर दो दिन का और साधारण इंडस्ट्री पर एक दिन का अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश लगा दिया गया है।

पावरकाम प्रवक्ता कहते हैं कि आम उपभोक्ता व कामर्शियल पर कोई कट नहीं है। कृषि क्षेत्र को पहले एक दिन के अंतर पर आठ घंटे बिजली दी जा रही थी अब गेहूं के सीजन में हर रोज चार घंटे कर दी गई है। इंडस्ट्री की ओर से अब तक 'ओपनÓ के माध्यम से खरीदी जा रही सीधी बिजली अब पावरकाम के माध्यम से ली जा रही है। वे स्वीकार करते हैं कि सर्दी तेज होने के बाद मांग और बढ़ सकती है।

वहीं पावरकाम के डायरेक्टर उत्पादन जीएस छाबड़ा कहते हैं कि इस साल अच्छे मानसून के बाद सर्दी में देरी हुई है। जिसके चलते मांग में धान के सीजन के बाद तेज बढ़ोतरी नहीं हुई। यही वजह है कि किसी तरह का मांग आपूर्ति का अंतर च्यादा नहीं है। साथ ही वे प्रबंधन को चुनावों से च्यादा तरजीह देते हैं।

Saturday, 3 September 2011

गिदड़बाहा पावर प्लांट पर भी लटकी तलवार!, giderbaha, thermal, power , plants, electricity, generation


- एनटीपीसी ने करना है निर्माण, रेल व कोल लिंकेज के अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से लेनी है क्लीयरेंस
- एनटीपीसी ने अपनी क्षमता से ज्यादा कर रखे है सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर, पंजाब खुद बनाए प्लांट: इंजी. एसो.
भूपेश चट्ठा, पटियाला
राज्य में बिजली की सप्लाई व खरीद के अलावा उत्पादन के प्रबंध का जिम्मा रखने वाले पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन पावरकाम को राज्य के गिदड़बाहा क्षेत्र में लगने वाले पावरप्लांट पर भी तलवार लटक रही है।
 केंद्र सरकार के संस्थान नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन की ओर से स्थापित किए जाने वाले इस प्लांट पर जहां एक ओर आंदोलन की छाया मंडराने लगी है वहीं पंजाब सरकार और एनटीपीसी के बीच हुए समझौते को एक साल होने को है और निर्माण की दिशा में एक इंच भी प्रगति नहीं हुई है।

पावरकाम के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि बीते साल अक्टूबर में एनटीपीसी के साथ 15 हजार करोड़ रूपये की राज्य की सबसे बड़ी बिजली परियोजना के समझौते के तहत राज्य ने केवल जमीन का अधिग्रहण करना था और प्लांट के चालू होने पर बिजली की खरीद करनी थी। इसके अलावा सभी निर्माण कार्य और प्लांट के लिए रेल व कोल लिंकेज की क्लीयरेंस के अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्वयं मंजूरी लेनी थी। सूत्र कहते हैं कि इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

जबकि इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान इंजी. बेदी कहते हैं कि वे पहले दिन से कह रहे हैं कि प्रदेश के पास प्लांट स्थापित करने की पूरी विशेषज्ञता है और पूर्व में बिजली बोर्ड ने प्लांट लगाए भी हैं। ऐसे में प्लांट एनटीपीसी के हवाले किए जाने का कोई तुक नहीं है। वैसे भी 37 हजार मेगावाट उत्पादन क्षमता वाले एनटीपीसी ने पिछले साल अक्टूबर से दिसंबर के बीच 40 हजार मेगावाट और उत्पादन के समझौते कर लिए जिन्हें सिरे चढ़ाना संभव नहीं है। एनटीपीसी ने अपनी क्षमता से ज्यादा सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर कर रखे हैं।
वहीं उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की ओर से एनटीपीसी के साइन किए गए एमओयू को रद्द करने के दिए गए वक्तव्य पर पावरकाम के अधिकारी खामोश हैं। नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि पावरकाम के कागजों में अभी प्लांट पर काम चल रहा है, पर कई तरह की क्लीयरेंस अभी कंपनी को नहीं मिली है, चाहे ये केंद्र का ही संस्थान है।

दिलचस्प है कि चुनावी साल में जमीन को लेकर हर ओर तेज हो रहे किसान आंदोलनों से सहमे अकाली थिंक टैंक को समझ नहीं आ रहा कि तीन गांवों की 2350 एकड़ जमीन में से आधी एक साल पहले तक सैम की मार तले थी, पर अब दाम लगातार बढ़ रहे हैं। आधी जमीन का अधिग्रहण करने के बाद राज्य सरकार दोबारा दूसरे चरण में शेष आधी जमीन पुराने दाम पर खरीदने की स्थिति में नहीं है। और एनटीपीसी को अभी से दाम ज्यादा लगने लगे हैं।