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Sunday, 5 February 2012

कुंडियां दे सिंग फस गए केहड़ी नितरू...pre poll, punjab election,


- नहीं हुआ डोर-टू-डोर प्रचार, हुआ जोड़ तोड़
- गुप्त बैठकें कर भितरघात करवाने की चली राजनीति
भूपेश चट्ठा, पटियाला
विधानसभा चुनावों में आयोग के आदर्श चुनाव आचार संहिता के डंडे के चलते इस बार के चुनाव में अंदाजा लगाना खासा मुश्किल कर दिया कि ऊंट किस करवट बैठेगा। हर सीट पर आलम ये है कि कुंडियां दे सिंग फस गए केहड़ी नितरू बड़ेमें खाणी...
चुनाव प्रचार का निर्धारित समय समाप्त होने अथवा लाउड स्पीकर का शोर थमने व रैलियों चुनावी सभाओं के दौर के बाद और मतदान से ठीक एक दिन पहले आम तौर पर डोर टू डोर प्रचार में प्रत्याशी जुटते हैं। इस बार का चुनाव इस मामले में भी पिछले चुनावों से अलग रहा। प्रत्याशियों की बदली रणनीति में जहां बड़ी सभाएं नदारद रही तो पूरे अभियान के दौरान चली पैदल यात्राओं और बिना लाउडस्पीकर के हुई छोटी चुनावी सभाओं में ही उम्मीदवार व्यस्त रहे।
दिलचस्प है कि ऐसे हालात में जिस किसी उम्मीदवार से बात हुई वो ड्राइंग रूम पालिटिक्स में ही अंतिम दिन जुटा रहा। डोर-टू-डोर जाने की बजाए जोड़ तोड़ में ज्यादा मेहनत की गई है। एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के रणनीतिकार ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उम्मीदवार की पत्नि सुबह से ही कहीं गई हुई हैं, जबकि प्रचार की कमान संभालने वाले घर के सदस्य दिन भर घर में ही रहने वाले हैं और उम्मीदवार का देर शाम तक कोई कार्यक्रम नहीं है।
वहीं क्षेत्रीय दल से चुनाव लड़ रहे एक अन्य उम्मीदवार की निगाह विपक्षियों की गतिविधियों पर जमी रही कि कहीं कोई पैसे अथवा शराब तो नहीं बांट रहा। जहां कहीं से खबर आती उसी तरफ गाडिय़ां दौड़ा दी जाती। इसके साथ ही जिला प्रशासन से चुनाव आयोग तक के  फोन घनघना दिए जाते।
इतना ही नहीं राजनीतिक दलों में एक दूसरे का बंदा तोड़ दल बदलवाने वाले काम की संभवत अब जरूरत नहीं महसूस की जा रही आज के दिन असंतुष्टों के साथ गुप्त बैठकें कर भीतरी घात करवाने की राजनीति का दौर खासा सरगर्म रहा।


टेली मार्केटिंग का लिया सहारा
आम तौर पर इंश्योरेंस अथवा मोबाइल कनेक्शन बेचने आने वाली टेली मार्केटिंग के आने वाले फोन काल इस बार प्रचार के अंतिम दिन कई स्थानों पर सुनाई दिए गए। जिसमें उम्मीदवार के कार्यालय से बोलने का हवाला देकर वोट डालने की अपील के साथ ही एक रटी रटाई आवाज में चुनाव निशान भी बताया जा रहा हैं। नंबर कहां से लिया? और डू नॉट डिस्टर्ब की सेवा लिए जाने की बात पर सॉरी सर...चुनाव है, का हवाला दे दिया जाता है।