Showing posts with label improvement trust. Show all posts
Showing posts with label improvement trust. Show all posts

Wednesday, 15 February 2012

सफेद हाथी बन गया मिड टाउन प्लाजा, improvement trust, midtown plaza


-नगर परिषद की हैरीटेज बिल्डिंग को तोड़ बनाए कामर्शियल कांपलेक्स में लोगों को दिलचस्पी नहीं
-सात सालों बाद भी नहीं बसी 29 में से 23 दुकानें
 फोटो:
भूपेश चट्ठा, पटियाला
शहर के बीचों बीच स्थित बड़े ही चाव से शहर को एक ओर शापिंग माल देने के उद्वेश्य से बनाया गया मिड टाउन प्लाजा आज मात्र सफेद हाथी बन कर रह गया है। बिल्डिंग में बनी दुकानों की तीन बार नीलामी के प्रयास के बावजूद मात्र बीस फीसदी दुकानें ही बेची जा सकी हैं।
एतिहासिक शहर पटियाला के जिस धर्मपुरा बाजार में मिड टाउन प्लाजा का निर्माण वर्ष 2005 में करवाया गया वहां चहल पहल अथवा ग्राहकी के मामले में कोई कमी नहीं है, इसी मार्केट के सामने और आस पास बने कई शो रूम अपनी दिनचर्या भली प्रकार चला रहे हैं। पर इस बाजार की ये दुकानें संभावित रूप से किसी 'ग्रहणÓ से प्रभावित होकर गई हैं।
मिड टाउन प्लाजा की दुकानों के संदर्भ में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्र मोहन सिंह बजाज कहते हैं कि तीन बार कोशिश की गई पर रिसपांस नहीं आया, कई बार किस्मत की बात भी होती है कि प्रयासों के बावजूद भी कुछ चीजें नहीं बिक पाती। वे स्वीकार करते हैं कि धरती के भी अपने भाग होते हैं।
दिलचस्प है कि रियासती काल के स्थानीय प्रशासन व आजादी के बाद के पंजाब की नगर पालिका की हैरीटेज बिल्डिंग को तोड़ बनाए कामर्शियल कांपलेक्स में लोगों को दिलचस्पी क्यों नहीं है इस पर तो कोई कुछ नहीं बता पाता, लेकिन इतना अवश्य है कि बिल्डिंग के निमार्ण से पहले किए गए सर्वे में कमी जरूर रह गई। संभव है कि होम वर्क सही ढ़ंग से ना होने की वजह से प्रोजेक्ट कामयाब नहीं रहा।
सात साल पहले बनी मिड टाउन प्लाजा में करीब छह करोड़ की लागत से 29 दुकानें बनाई गई, इनमें से 23 दुकानें आज भी खाली हैं। रौनक के नाम पर लगभग जीरो का आंकड़ा ही सामने आता है। अब तक की तीन बोलियों में बिकी छह दुकानों से आमदन 50 से 60 रूपये के बीच ही रही।
इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन बजाज बताते हैं कि शहर के बीच शापिंग माल की तर्ज पर बने इस प्लाजा में पार्किंग के अलावा बेसमेंट में पार्किंग, डबल लिफ्ट जैसी हर बड़ी सुविधा है और आज के समय में बीस लाख रूपये में एक बड़ी दुकान बाजार में मिलती कहां है। हालांकि इंद्र मोहन बजाज कांग्रेस कार्यकाल में बने प्लाजा की दुकानें ना बिकने पर हताश अब भी नहीं हैं। वे कहते हैं कि राच्य की सत्ता पर एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल भारतीय जनता पार्टी की सरकार आएगी और वे फिर प्रयास करेंगे।


Thursday, 17 March 2011

निजी जमीन की बोली करवाई इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने! improvement trust, auction, property dispute


 09ptl15.jpg

-एसएसटी नगर में बोली दौरान मालिक ने मंच से रजिस्ट्री दिखा किया दावा
-इंजीनियरिंग विभाग की रिपोर्ट के बाद ही निलामी करवाई है: चेयरमैन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
'इंप्रूवमेंट ट्रस्ट' अथवा 'नगर सुधार न्यास' कुछ ऐसे शब्द हैं जिनमें विश्वास और सुधार को काफी प्रमुखता दी जाती है, लेकिन आज एसएसटी नगर में विकास योजना सुदंर नगर के लिए हुई बोली में विश्वास कम और शक ज्यादा पैदा कर दिया। आरोप है कि ट्रस्ट ने निजी अधिकार वाली जमीन के 400 गज के एक टुकड़े को भी अपनी बोली में शामिल कर निलाम कर दिया, जिसकी बाकायदा रजिस्ट्री हो चुकी है।
बोली शुरू होने से ठीक पहले उक्त प्लाट का मालिक नीलामी स्थल पर आ पहुंचा और ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज को सारे मामले की जानकारी दी। इस पर बजाज ने उन्हें एक अधिकारी विशेष से बात करने की सलाह दी। एक ओर अधिकारियों ने निलामी प्रक्रिया जारी रखी तो दूसरी ओर उन्हें ट्रस्ट कार्यालय में आने को कह दिया।
इसके तुरंत बाद मौके पर ही प्लाट के मालिक होने का दावा करने वालों ने मंच से ही रजिस्ट्री हाथ में लहराते हुए घोषणा कर दी की वे ही जमीन के उक्त टुकड़े के मालिक है और अगर कोई प्लाट खरीदता है तो हर्जाने प्रति वो खुद जिम्मेदार होगा। ट्रस्ट के बोली नहीं रोकने की स्थिति में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। प्लाट की पावर ऑफ अटार्नी रखने वाले संजीव वालिया दस्तावेज दिखा दावा करते है कि 1968 में पुराने प्लाट न. 94 का मुख्तयार नामा ओमप्रकाश पुत्र सुंदरलाल के नाम था जिससे उन्होंने प्लाट खरीदा और 1971 में रजिस्ट्री भी करवाई। एसएसटी नगर की 33 फुटी रोड पर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के नए नंबरों 27, 27ए, 27बी और 28 में उनकी जमीन का हिस्सा आ रहा है। बीती रात ही नीलामी की हो रही घोषणा के दौरान उन्हें अहसास हुआ तो भागदौड़ शुरू हो गई।
संजीव वालिया बताते है कि उनके पास खसरा न. 5385/2486/2435/1072 में 400वर्ग गज का टुकड़ा खेवट न. 603 खतोली न. 1334 श्रीमति गीता के नाम है आर इसकी पावर ऑफ अटार्नी उनके पास है। वालिया का आरोप है कि सरकार का काम लोगों के जानमाल और जमीन जायदाद की सुरक्षा करना है ना की जमीन छीन कर निलाम कर देना। वे न्यायालय की शरण में जा रहे है।
वहीं ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज से इस संबंध मे कहते हैं कि ट्रस्ट ऐसे ही किसी की जमीन नीलाम नहीं कर देता। इंजीनियरिंग विभाग से रिपोर्ट आती है। इसके बाद ही पूरी जांच के बाद जमीन की नीलामी की जाती है। अगर किसी को शिकायत है तो उनके पास आ सकता है।  
 
ठंडा रहा बोली का रिसपांस
निज संवाददाता, पटियाला
नगर सुधार ट्रस्ट की और से रिहायशी व व्यापारिक प्लाटों की बोली में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये कमाए। बोली के दौरान लोगों में अधिक उत्साह देखने को नही मिला क्योंकि करीब साढ़े तीन दर्जन जगहों में से करीब एक दर्जन ही बोली में बिक पाए।
नगर सुधार ट्रस्ट की और से शहर के महाराजा यादविंद्रा एन्क्लेव, शहीद सेवा सिंह ठीकरी वाला नगर, शहीद सेवा सिंह ठीकरीवाला नगर (सुंदर नगर) विकास स्कीम ट्रांसपोर्ट नगर, विकास नगर सेंटर व्यापारिक जगह के करीब साढ़े तीन दर्जन जायदादों को बोली से नीलाम करने था। नगर सुधार ट्रस्ट में चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज, कार्यकारी अधिकारी गुरिंदर सिंह सोढ़ी, भाजपा नेता अरुण गुप्ता के अलावा अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में बोली करवाई गई। बोली के दौरान महाराजा यादविंदरा एन्क्लेव की व्यापारिक जगह 121 वर्ग गज में बनी जगह को 75 लाख में खरीदा गया जबकि रिर्जव कीमत 45 लाख 59 हजार रुपये रखी गई थी।  

Wednesday, 9 March 2011

निजी जमीन की ही करवा दी बोली!


भूपेश चट्ठा, पटियाला

इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और नगर सुधार ट्रस्ट ऐसे शब्द हैं जिनमें विश्वास और सुधार को काफी प्रमुखता दी जाती है, लेकिन आज एसएसटी नगर में विकास योजना सुंदर नगर के लिए हुई बोली में विश्वास कम और शक ज्यादा पैदा कर दिया। आरोप है कि ट्रस्ट ने निजी अधिकार वाली जमीन के 400 गज के एक टुकड़े को भी अपनी बोली में शामिल कर नीलाम कर दिया, जिसकी बाकायदा रजिस्ट्री हो चुकी है।

बोली शुरू होने से ठीक पहले उक्त प्लाट का मालिक नीलामी स्थल पर आ पहुंचा और ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज को सारे मामले की जानकारी दी। इस पर बजाज ने उन्हें एक अधिकारी विशेष से बात करने की सलाह दी। एक ओर अधिकारियों ने नीलामी प्रक्रिया जारी रखी तो दूसरी ओर उन्हें ट्रस्ट कार्यालय में आने को कह दिया।

इसके तुरंत बाद मौके पर ही प्लाट के मालिक होने का दावा करने वालों ने मंच से ही रजिस्ट्री हाथ में लहराते हुए घोषणा कर दी कि वे ही जमीन के उक्त टुकड़े के मालिक हैं और अगर कोई प्लाट खरीदता है तो हर्जाने के लिए वो खुद जिम्मेदार होगा। ट्रस्ट के बोली नहीं रोकने की स्थिति में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। प्लाट की पावर ऑफ अटार्नी रखने वाले संजीव वालिया दस्तावेज दिखा दावा करते हैं कि 1968 में पुराने प्लाट न. 94 का मुख्तयारनामा ओमप्रकाश पुत्र सुंदरलाल के नाम था जिससे उन्होंने प्लाट खरीदा और 1971 में रजिस्ट्री भी करवाई। एसएसटी नगर की 33 फुटी रोड पर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के नए नंबरों 27, 27ए, 27बी और 28 में उनकी जमीन का हिस्सा आ रहा है। बीती रात ही नीलामी की हो रही घोषणा के दौरान उन्हें अहसास हुआ तो भागदौड़ शुरू हो गई।

संजीव वालिया बताते है कि उनके पास खसरा न. 5385/2486/2435/1072 में 400वर्ग गज का टुकड़ा खेवट न. 603 खतोली न. 1334 श्रीमती गीता के नाम है आर इसकी पावर ऑफ अटार्नी उनके पास है। वालिया का आरोप है कि सरकार का काम लोगों के जानमाल और जमीन जायदाद की सुरक्षा करना है ना की जमीन छीन कर निलाम कर देना। वे न्यायालय की शरण में जा रहे है।

ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज कहते हैं कि ट्रस्ट ऐसे ही किसी की जमीन नीलाम नहीं कर देता। इंजीनियरिंग विभाग से रिपोर्ट आती है। इसके बाद ही पूरी जांच के बाद जमीन की नीलामी की जाती है। अगर किसी को शिकायत है तो उनके पास आ सकता है।


ठंडा रहा बोली का रिस्पांस


निज संवाददाता, पटियाला

नगर सुधार ट्रस्ट ने रिहायशी व व्यापारिक प्लाटों की बोली में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये कमाए। बोली के दौरान लोगों में अधिक उत्साह देखने को नहीं मिला क्योंकि करीब साढ़े तीन दर्जन में से करीब एक दर्जन जगहें ही बोली में बिक पाए।

नगर सुधार ट्रस्ट ने शहर के महाराजा यादविंद्रा एनक्लेव, शहीद सेवा सिंह ठीकरी वाला नगर, शहीद सेवा सिंह ठीकरीवाला नगर (सुंदर नगर) विकास स्कीम ट्रांसपोर्ट नगर, विकास नगर सेंटर व्यापारिक जगह में करीब साढ़े तीन दर्जन संपत्तियों को बोली से नीलाम करने था। नगर सुधार ट्रस्ट में चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज, कार्यकारी अधिकारी गुरिंदर सिंह सोढी, भाजपा नेता अरुण गुप्ता के अलावा अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में बोली करवाई गई। बोली के दौरान महाराजा यादविंदरा एनक्लेव की व्यापारिक जगह 121 वर्ग गज में बनी जगह को 75 लाख में खरीदा गया जबकि रिर्जव कीमत 45 लाख 59 हजार रुपये रखी गई थी।