Showing posts with label traffic. Show all posts
Showing posts with label traffic. Show all posts

Tuesday, 4 December 2012

आटो रिक्शा में 'सुरक्षा' कम 'जुगाड़' ज्यादा


- लोगों को दिखती हैं कमियां, ट्रैफिक पुलिस को नजर नहीं आती
- न हेडलाइट ठीक है न टेल लाइट, कई आटो में नंबर प्लेट भी नदारद
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
वैध रूप से शहर में नगर निगम की सीमा क्षेत्र और निगम सीमा के बाहर अवैध रूप से चलने वाले आटो रिक्शा में सफर करने वालों में 'सुरक्षा' की कम और 'जुगाड़' का सा अहसास ज्यादा होता है। फिर भी मजबूरी में लोग इनमें जान जोखिम में डालकर बैठते भी हैं और शिकायत भी करते हैं।
शहर में चल रहे ज्यादातर आटो रिक्शा का ढांचा पुराना है। कई की जहां हेडलाइट खराब है तो संभव है कि शायद ही किसी में तलाशने पर टेल लाइट ठीक से जलती दिखाई दे। बहुत से आटो तो ऐसे हैं, जिनमें टेल लाइट की जगह ही नदारद है। हालांकि आम आदमी को दिखने वाली ये कमियां सड़क पर चौबीस घंटे मौजूद रहने का दावा करने वाली ट्रैफिक पुलिस को नहीं दिख पाती है। ट्रांसपोर्ट विभाग से पारित क्षमता से बहुत ज्यादा सवारियां बैठाने से नहीं कतराने वाले आटो रिक्शा चालकों से इनमें न बैठने वाले, पर सड़क पर इनके आसपास चलने वाले वाहन चालक भी इन्हें पास देखते ही परेशानी महसूस करने लगते हैं। सर्दी शुरू हो चुकी है और धुंध व कोहरे का सीजन आने को है। ऐसे में दुर्घटनाओं की संभावनाओं को अभी ही रोका जा सकता है।
मार्कल कालोनी के सोनू शर्मा का कहना है कि शहर में बेलगाम घूम रहे आटो रिक्शाओं पर ट्रैफिक पुलिस को रोक लगानी चाहिए। शहर के भीड़ भरे बाजारों में ये तेज रफ्तार से बेधड़क चलते हैं। सनौरी अड्डा के बृज मोहन का कहना है कि सनौरी अड्डा के पास दर्जनों आटो रिक्शा चलते हैं, लेकिन किसी भी आटो रिक्शा पर पूरा नंबर नहीं लिखा होता, जो कानून की सरेआम उल्लंघना है। जबकि पुलिस वाले हर चौक पर नाका लगाकर केवल मोटरसाइकिलों के चालान काट रहे होते हैं।
ऐसे ही राजपाल सिंह बताते हैं कि ज्यादातर आटो रिक्शा की हालत तरस योग्य है, जिनमें बैठना सुरक्षित नहीं है। हालांकि आवाजाही के सीमित साधन होने की सूरत में हर सवारी अपनी जान की जिम्मेवार बनकर बैठी होती है।
दूसरी ओर ट्रैफिक पुलिस के प्रभारी हरदीप सिंह बडूंगर का कहना है कि शहर में करीब 14 आटो रिक्शा यूनियन हैं। इन लोगों को नियमों प्रति जागरुक करने के लिए बैठकें की जा रही हैं। इसके अलावा शहर के सभी आटो रिक्शा चालकों की सूची तैयार की जा रही है, जिससे भविष्य में कोई असुविधा न हो।

Monday, 27 February 2012

शहर की सारी कारें पोलो मैदान पर!, traffic, pologround, dog show


फोटो
- लोअर माल पर चल रहे निर्माण व अवैध पार्किंग ने भी जाम में दिया योगदान
- कुत्तों के अलावा रौनक देखने वालों का भी लगा जमावड़ा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
ऐतिहासिक शहर पटियाला में हर साल सर्दियों के इन दिनों में आयोजित होने वाले डॉग शो की लोकप्रियता का अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार के दिन जहां शहर की अन्य सड़कें सूनी पड़ी थी, वहीं शहर की सारी कारें पोलो मैदान पर जा पहुंची हुई थी। उम्मीद से कहीं ज्यादा उमड़ी भीड़ ने ट्रैफिक पुलिस के सारे प्लान धराशाई कर दिए। हालांकि दोपहर बाद पोलो मैदान व सेना कार्यालय के बीच से गुजरने वाली सड़क से वन-वे प्लान लागू कर थोड़ा बहुत नियंत्रित करने का प्रयास जरूर हुआ है।
दिलचस्प है कि मेले के पिछले आयोजनों में अक्सर पोलो मैदान के सभी गेट खोल देते हैं और प्रतियोगिता में भाग लेने वालों, उनके समर्थकों से लेकर आम आदमी की कारें भी अंदर तक चली आती थी। लेकिन इस बार सारे गेट बंद रखे गए। संभव है कि सुरक्षा कारणों से ऐसा किया गया हो, लेकिन इससे आम राहगीर की परेशानी खासी बढ़ी डेयरी व्यवसायी भगवान दास गुप्ता कहते हैं कि आज उन्हें गाड़ी वापिस मोड़कर शेरांवाला गेट के रास्ते से ही ब्रहमकुमारी आश्रम की ओर जाना पड़ा।
इसी क्रम में लोअर माल पर वर्कशाप के मालिक जस्सी कहते हैं कि लोअर माल पर चल रहे सड़क निमार्ण व अवैध पार्किंग ने भी आज के जाम में योगदान दिया है अन्यथा ये सड़क अवकाश के दिनों में खाली ही रहती है।
दिलचस्प है कि डॉग शो में कुत्तों के अलावा रौनक देखने वालों के लगे जमावड़ा ने भी ट्रैफिक जाम में बढ़ोतरी की है। मेला देखने आए कंवर प्रताप सिंह कहते हैं कि बच्चों की छुट्टी थी सो वे घुमाने ले आए हैं, यहां आइसक्रीम से लेकर कबाब तक का प्रबंध है, लेकिन अब ये मजबूरी बन गया है। कोई व्यक्ति उनकी कार के आगे अपना वाहन खड़ा कर गया है। ऐसे में निकल नहीं पा रहे हैं।


आयोजकों ने नहीं दी पूर्व सूचना : ट्रैफिक पुलिस
पोलो मैदान के आसपास लगे जाम पर ट्रैफिक पुलिस के इंचार्ज अछरू राम ने ट्रैफिक के प्रबंधों के कम रहने के सवाल पर बताया कि बताया कि कार्यक्रम के आयोजकों ने उन्हें पूर्व सूचना ही नहीं दी। ऐसे में ट्रैफिक प्रबंधों के कम या ज्यादा होने की बात ही नहीं उठती। कारों का जमावड़ा लगने के बाद ही उपाय किए गए हैं। दोपहर बाद इंडोर स्टेडियम के पास से ट्रैफिक को मोड़ा गया है।

Sunday, 13 March 2011

डबलरोल: नदी-नहर किनारे सड़क, बाढ़-ट्रैफिक दोनों नियंत्रित after flood, river ghagger, road, toll tex, traffic


-मुगलकाल से रियासती काल तक होता रहा है सदुपयोग
भूपेश चट्ठा, पटियाला
मेट्रो शहरों के बाद देश में सबसे सघन सड़क यातायात वाले पंजाब की सड़कों पर बढ़ रही वाहनों की संख्या, हर पांच-सात साल में सड़क चौड़ी करने को मजबूर कर रही है। परिणामस्वरूप किसान की जमीन या तो छिनती है या बंट जाती है। पंजाब का खेत लगातार छोटा होता जा रहा है पर ट्रैफिक समस्या से फिर भी बनी हुई, ऐसे में अब नदी-नहरों के सड़के बना दोहरा लाभ लिया जाएगा। एक ओर पक्के किनारे बाढ़ नियंत्रित करेंगे और बिना जमीन अधिग्रहण किए ट्रैफिक नियंत्रित भी हो जाएगा।
दिलचस्प है कि मुगलकाल से रियासती काल और फिर अंग्रेजी शासन में दरिया के किनारों का प्रयोग तो इस तरह से नहीं हुआ अलबत्ता कच्चे-पक्के सूए से नहरों तक सभी की योजना कुछ इसी तरह ही बनती रही है पर आजादी के बाद यह सीमित हो गया। ड्रैनेज विभाग के ही वरिष्ठ अधिकारी बताते है कि पिछली सरकार की ओर राज्य की 107 सड़कों पर टोल टैक्स लगाए जाने के बाद इस ओर सोचना शुरू किया गया। राष्ट्रीय मार्गो पर लगे टोल टैक्स इससे अलग है। जमीन अधिग्रहण आर्थिक व राजनीतिक रूप से  मंहगा साबित होने लगा है।
राज्य में चंडीगढ़ से अंबाला की ओर जाने डेराबस्सी और जीरकपुर के बीच से घग्गर किनारे शंभू के आगे आसानी से मिला जा सकता है। ऐसे ही हाई-वे पर भीड़ कम करने आसान व छोटे रास्तों में भाखड़ा नहर के अलावा, एसवाईएल और सरहिंद फीडर को भी लिया जा सकता है। घन्नौर से अंबाला तक ऐसी ही सड़क चल रही है तो पटियाला से समाना तक का भाखड़ा नहर का चल रहा रास्ता टोल के बाद बंद किया गया। समाना बाई पास पर हुए एक प्रयास ने आए दिन के जाम बंद कर दिए।
रोपड़ के बाईपास को सरहिंद नहर किनारे चमकौर साहिब तक किया गया है, इसे लुधियाना तक बढ़ाया जा सकता है। दोराहा के पास से जिस तरह से नहर का दोहरा प्रयोग हुआ है। राड़ा साहिब से अहमदगढ़ मंडी पुल तक गई नहरी सड़क को बठिंडा तक ले जाया जा सकता है। सतलुज के अलावा रावी दरिया से निकली नहर किनारे सड़क बना, सेना को सौंप,  इसे सीमा क्षेत्र तक खींच सुरक्षा बढ़ाने के अलावा तस्करी रोकने में भी प्रयोग किया जा सकता है।
वहीं पर्यावरणविद् डा. जोगिंदर टाईगर कहते है कि अगर इस ओर कार्य किया जाता है तो वर्तमान सड़कों के किनारे किसान की जमीनों का हो रहा अधिग्रहण रुकेगा और नहरों के किनारे टूटने से भी बचत होगी, खाली पड़ी सरकारी जमीन का सदुपयोग होने के अलावा। नियमित रूप से चलता ट्रैफिक और सड़क की होने वाली जांच किनारे पक्के रखेगी और बाढ़ से भी निजात दिलाएगी। नदी के एक ओर के धूसी बांध पक्के हो सकेंगे और कनेक्टीविटी बढऩे से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास होगा।
वहीं प्रदेश के नहरी विभाग के चीफ इंजीनियर इजी. एएस दुल्लत कहते है कि यह सब कनेक्टिविटी पर निर्भर करता है, हर स्थान पर नहीं किया जा सकता। विभाग की ओर से दोराहा से बठिंडा तक बठिंडा ब्रांच पर सड़क बनाए जाने के विचार पर काम चल रहा है। इसी क्रम में अबोहर ब्रांच पर भी सड़क बनाने का प्रस्ताव है। इस योजना पर भी काम चल रहा है।