Sunday, 13 March 2011

डबलरोल: नदी-नहर किनारे सड़क, बाढ़-ट्रैफिक दोनों नियंत्रित after flood, river ghagger, road, toll tex, traffic


-मुगलकाल से रियासती काल तक होता रहा है सदुपयोग
भूपेश चट्ठा, पटियाला
मेट्रो शहरों के बाद देश में सबसे सघन सड़क यातायात वाले पंजाब की सड़कों पर बढ़ रही वाहनों की संख्या, हर पांच-सात साल में सड़क चौड़ी करने को मजबूर कर रही है। परिणामस्वरूप किसान की जमीन या तो छिनती है या बंट जाती है। पंजाब का खेत लगातार छोटा होता जा रहा है पर ट्रैफिक समस्या से फिर भी बनी हुई, ऐसे में अब नदी-नहरों के सड़के बना दोहरा लाभ लिया जाएगा। एक ओर पक्के किनारे बाढ़ नियंत्रित करेंगे और बिना जमीन अधिग्रहण किए ट्रैफिक नियंत्रित भी हो जाएगा।
दिलचस्प है कि मुगलकाल से रियासती काल और फिर अंग्रेजी शासन में दरिया के किनारों का प्रयोग तो इस तरह से नहीं हुआ अलबत्ता कच्चे-पक्के सूए से नहरों तक सभी की योजना कुछ इसी तरह ही बनती रही है पर आजादी के बाद यह सीमित हो गया। ड्रैनेज विभाग के ही वरिष्ठ अधिकारी बताते है कि पिछली सरकार की ओर राज्य की 107 सड़कों पर टोल टैक्स लगाए जाने के बाद इस ओर सोचना शुरू किया गया। राष्ट्रीय मार्गो पर लगे टोल टैक्स इससे अलग है। जमीन अधिग्रहण आर्थिक व राजनीतिक रूप से  मंहगा साबित होने लगा है।
राज्य में चंडीगढ़ से अंबाला की ओर जाने डेराबस्सी और जीरकपुर के बीच से घग्गर किनारे शंभू के आगे आसानी से मिला जा सकता है। ऐसे ही हाई-वे पर भीड़ कम करने आसान व छोटे रास्तों में भाखड़ा नहर के अलावा, एसवाईएल और सरहिंद फीडर को भी लिया जा सकता है। घन्नौर से अंबाला तक ऐसी ही सड़क चल रही है तो पटियाला से समाना तक का भाखड़ा नहर का चल रहा रास्ता टोल के बाद बंद किया गया। समाना बाई पास पर हुए एक प्रयास ने आए दिन के जाम बंद कर दिए।
रोपड़ के बाईपास को सरहिंद नहर किनारे चमकौर साहिब तक किया गया है, इसे लुधियाना तक बढ़ाया जा सकता है। दोराहा के पास से जिस तरह से नहर का दोहरा प्रयोग हुआ है। राड़ा साहिब से अहमदगढ़ मंडी पुल तक गई नहरी सड़क को बठिंडा तक ले जाया जा सकता है। सतलुज के अलावा रावी दरिया से निकली नहर किनारे सड़क बना, सेना को सौंप,  इसे सीमा क्षेत्र तक खींच सुरक्षा बढ़ाने के अलावा तस्करी रोकने में भी प्रयोग किया जा सकता है।
वहीं पर्यावरणविद् डा. जोगिंदर टाईगर कहते है कि अगर इस ओर कार्य किया जाता है तो वर्तमान सड़कों के किनारे किसान की जमीनों का हो रहा अधिग्रहण रुकेगा और नहरों के किनारे टूटने से भी बचत होगी, खाली पड़ी सरकारी जमीन का सदुपयोग होने के अलावा। नियमित रूप से चलता ट्रैफिक और सड़क की होने वाली जांच किनारे पक्के रखेगी और बाढ़ से भी निजात दिलाएगी। नदी के एक ओर के धूसी बांध पक्के हो सकेंगे और कनेक्टीविटी बढऩे से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास होगा।
वहीं प्रदेश के नहरी विभाग के चीफ इंजीनियर इजी. एएस दुल्लत कहते है कि यह सब कनेक्टिविटी पर निर्भर करता है, हर स्थान पर नहीं किया जा सकता। विभाग की ओर से दोराहा से बठिंडा तक बठिंडा ब्रांच पर सड़क बनाए जाने के विचार पर काम चल रहा है। इसी क्रम में अबोहर ब्रांच पर भी सड़क बनाने का प्रस्ताव है। इस योजना पर भी काम चल रहा है।

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