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Wednesday, 15 February 2012

आखिर फिर शुरु हुआ सड़क का निर्माण, municipal corporation, road,


-डिवाइडर पर काम चालू, संभावित रूप से 15 फरवरी के बाद बनेगी सड़क

उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
विधानसभा चुनावों के लिए लगी आदर्श चुनावअचार संहिता के चलते रोके गए काम अब धीरे-धीेरे गति पकडऩे लगे हैं। एक ओर जहां नेताओं का चुनावी हैंगओवर उतार चुका हैं, वहीं बाबू से लेकर वोटर तक आम आदमी की जिंदगी पुराने ढर्रे पर लौटने लगी है। शहर की लोअर माल को फोर लेन करने किए जाने वाले निमार्ण कार्य शुरु हो गए हैं।
कोलतार डालने का कार्य संभव है कि तकनीकि कारणों से 15 फरवरी से पहले नहीं किया जा सकता लेकिन डिवाइडर निमार्ण पर मजदूर व मिस्त्री आ गए हैं।
 इस सड़क पर फव्वारा चौंक के ठीक पास निर्माण शुरु होने के साथ ही लगा बोर्ड 'कार्य प्रगति पर है कृपया धीरे चलेंÓ लोगों को खासे समय से मुंह चिड़ा रहा है। लोअर माल के मामले में यह बोर्ड कुछ इस तरह से पढ़ा जाने लगा था कि 'प्रगति धीरे है पर कार्य चल रहा हैÓ।
15 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाली शहर की इस सड़क के पूरी तरह से दुरुस्त होने के सवाल पर बताया जाता है कि बस दो महीने और लगेंगे। इसी बीच लागू हुई अचार संहिता ने इसमें एक महीना और जोड़ दिया है। लोअर माल पर लगे पेड़ों की कटाई की अनुमति केंद्रीय वन मंत्रालय से ली गई तो सीवरेज विभाग, पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने अपनी लाइनें तबदील की हैं।
वहीं नगर निगम के मेयर अजीत पाल सिंह कोहली कहते हैं कि नया कोई कार्य वे नहीं करवा सकते पर पुराने चल रहे कार्यों को जल्द सिरे चढ़ाया जाएगा। शहर में मरम्मत इत्यादि का काम ही करवा पा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि इसी सड़क पर कभी पानी का टयूबवेल बंद करने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है तो कभी मोदी कालेज व बुड्ढा दल के बीच सीवरेज के फैले पानी से त्रस्त लोगों को विरोध प्रदर्शन कर अपना गुस्सा जाहिर करना पड़ता है। आम राहगीर ने हालांकि अपने रास्ते बदल कर इस समस्या से निजात पा ली है।

 

गढ्डों में से गुजरती है यह सड़क! , municipal corporation, road,


उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
लोक निर्माण विभाग की ओर से कालोनी बनाए जाने की शुरुआत करने के बाद से महीनों गुजर गए, लेकिन महिंद्रा कालेज को जाने वाली सड़क आज भी उखड़ी पड़ी है। ढिल्लों कालोनी और संजय कालोनी से होकर निकलने वाली इस सड़क पर इतने गड्ढे हैं और इतनी अधिक धूल उड़ती है कि लोगों को नाक पर रूमाल रखकर निकलना पड़ता है। यहां पर सड़क कम और धूल का गुबार ज्यादा देखने को मिलता है।
कभी दो वार्डो तो कभी दो विभागों के बीच उलझी ढिल्लों कालोनी और संजय कालोनी से गुजरने वाली सड़क पर क्षेत्रीय निवासियों में ढिल्लों कालोनी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान हरिंदर पाल सिंह काला, सचिव जगमोहन सिंह, डा.आरके गर्ग व सुरिंदर सिंह का कहना है कि तीन साल से माई जी की सराय से मछली तालाब तक सड़क टूटी हुई है और संबंधित विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। सड़क का मामला निगम में उठाए जाने को लेकर क्षेत्र के ही दो वार्डो में भी खींचतान चलती रही है।
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सड़क निगम की पर बनाएगा पीडब्ल्यूडी
नगर निगम के मेयर अजीतपाल सिंह कोहली कहते हैं कि निसंदेह सड़क नगर निगम के अधीन है, पर चूंकि पीडब्ल्यूडी ने साथ लगती कालोनी बनाई है और उक्त निमार्ण के दौरान ही सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। ऐसे में पीडब्ल्यूडी ही सड़क का निर्माण करेगा। निर्माण में हो रही देरी के सवाल पर मेयर कहते हैं कि अभी तकनीकी कारणों के चलते निर्माण नहीं किया जा सकता। संभव है कि कुछ दिनों में मौसम खुलने के बाद निर्माण किया जाए।


शहर में आठ अवैध निर्माणों पर गिरी गाज
-निगम का हथौड़ा-जेसीबी-कर्मी सब चले
फोटो:  
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
विधानसभा चुनावों के प्रचार व मतदान के दौरान शहर में हुए अवैध निर्माणों पर आखिरकार नगर निगम का हथौड़ा चल गया है। शुक्रवार को निगम के बिल्डिंग विभाग की ओर से चलाए गए संयुक्त अभियान के तहत शहर में हाल ही में हुए आठ अवैध निर्माण गिरा दिए  गए है।
दिन भर चले आपरेशन में निगम टीम का हिस्सा रहे बिल्डिंग विभाग के इंस्पेक्टर निर्मल सिंह ने बताया कि इनमें से एनआईएस से आगे नदी की ओर जाते हुए एक दुकान का लेंटर तोड़ा गया। इसी प्रकार अलीपुर के पास दो दुकानों का लेंटर गिराया गया। इसी क्रम में टोबे के पास स्थित एक दुकान को हटाया गया है। इस तरह के कुल आठ निर्माण हैं जिन्हें उचित कागज ना होने के चलते आज गिराया गया है।
दिलचस्प है कि निगम की इस कार्रवाई का कहीं भी विरोध नहीं हुआ, हालांकि पांच पुलिस कर्मियों की टीम निगम के बिल्डिंग विभाग के अधिकारियों कर्मियों के साथ दिन भर मौजूद रही। इनमें दोनों एरिया टाउन प्लानर नरेश कुमार व निर्मल सिंह और सभी संबंधित क्षेत्रों के इंस्पेक्टर व ड्राफ्ट्स मैन भी मौजूद रहे।
निगम प्रशासन व अन्य सरकारी विभागों के कर्मियों को चुनावी कार्यों में व्यस्त देख शहर के बाहरी क्षेत्रों में हुए कई अवैध निर्माणों पर नगर निगम कमिश्नर गुरलवलीन सिंह सिद्धू ने शुक्रवार को निगम के विभिन्न विभागों के अधिकारियों की क्लास लगाई है।
हालांकि इन मामलों पर गाज गिरनी तो पहले से तय हो गई थी इससे पहले भी इन लोगों को तीन दिन का अल्टीमेटम जारी कर बिना अनुमति के अवैध निर्माण गिराने के लिए कह दिया गया है। 
वहीं शुक्रवार को ली गई बैठक के बाद निगम कमिश्नर गुरलवलीन सिंह ने बताया कि बिल्डिंग विभाग की कारगुजारी को और अधिक दुरुस्त करने के लिहाज से अब सुपरडेंट व इंस्पेक्टरों को फील्ड से हटाकर जूनियर इंजीनियरों को दिया चार्ज दिया गया है। अब वे सहायक टाउन प्लानर निमलप्रीत सिंह व नरेश कुमार के नेतृत्व में कार्य करेंगे।
वहीं हाल ही में हुए अवैध निर्माण के मामले में निगम के तीन कर्मियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। इसके साथ अवैध निर्माण पर कर्मियों को सख्त कार्रवाई करने के आदेश भी दिए गए हैं।
कमिश्नर का कहना है कि जिन लोगों ने हाल ही में बिना अनुमति  के निर्माण कार्य किए हैं। वे तीन दिन के भीतर अपने नक्शे निगम के पास जमा करवाएं। ऐसा ना करवाने की स्थिति में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी।
इसी प्रकार जिन लोगों ने सीवरेज व पानी के कनेक्शन भी इन दिनों में बिना अनुमति के लिए हैं। वे भी एक सप्ताह के भीतर फीस जमा करवा कर इन्हें नियमित करवाएं अन्यथा इन कनेक्शनों को काटने की कार्रवाई शुरु की जाएगी।
वहीं निगम की ओर से लोगों को बकाया हाउस टेक्स जमा करवाने की शहर वासियों से अपील की गई है।     
उल्लेखनीय है कि राजनीतिक दलों विशेष रूप से सत्ताधारी राजनीतिक दल की ओर से वोटरों को नाराज ना करने की नीति का 'लाभ उठाकरÓ कुछ लोगों ने बीते दिनों में अवैध निर्माण  कर दिए है। निगम ने इस दौरान हुए निर्माण कार्यो की सूची तैयार की है। नगर निगम के सहायक कमिश्नर की टीम की ओर से किए गए दौरे में कई स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्यो में संबंधित व्यक्ति उचित दस्तावेज नहीं दिखा पाए हैं।
भादसों रोड, झिल रोड, मनजीत नगर, त्रिपड़ी, लोअर माल इत्यादि क्षेत्रों में नगर निगम की इस टीम ने बिना नक्शा पास करवाए किए गए निर्माण किए गए हैं। इनमें से कुछ स्थानों पर किए जा रहे निर्माण के संबंध में निगम पहले भी नोटिस जारी कर चुका है। निगम प्रशासन ने इन निर्माणों का काम रुकवा कर पुलिस भी तैनात कर दी है। जिससे आगे निर्माण ना किया जा सके।

Thursday, 24 November 2011

सुनिए सरकार ! ये पत्थर कुछ कहता है, bye pass, southern, road,




शिलान्यास का सच दक्षिणी बाई पास
अधूरे काम : पिछली सरकार का सपना, इस सरकार में भी नहीं हुआ पूरा
एक दशक से ज्यादा मंत्रालयों की लड़ाई में लटका, अब छह साल से निर्माण में
 14 दिसंबर 2006 को 18 महीने में चालू करने की घोषणा से हुआ था शिलान्यास
भूपेश चट्ठा, पटियाला शाही शहर को भारी व सैनिक ट्रैफिक से मुक्त करने, चंडीगढ़ व अंबाला की ओर से आने वाले तथा समाना व संगरूर की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतरी यातायात में उलझने से बचाने के लिए बनाए जाने वाले दक्षिणी बाई पास का सपना सूबे की पिछली सरकार ने दिखाया था, लेकिन एक और सरकार का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी यह पूरा नहीं हो सका है। राजपुरा रोड को संगरूर रोड से मिलाने के लिए 18.8 किलोमीटर लंबे बाई पास को जमीन से करीब 13 फीट ऊपर उठाकर बनाए जाने वाले इस कोरीडोर का मामला एक दशक से ज्यादा केंद्रीय वन व रक्षा मंत्रालय समेत राज्य के लोक निर्माण विभाग की लड़ाई में लटका रहा। इसके बाद सेना के बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन को निर्माण की जिम्मेदारी दे दी गई। 2007 के राज्य विधानसभा चुनावों की आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले 14 दिसंबर 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बाई पास का शिलान्यास कर दिया। नींव पत्थर रखने के तुरंत बाद बताया गया कि 80 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से यह बाई पास करीब 18 महीने में चालू हो जाएगा। यदि मौसम, खासकर मानसून के सीजन में बाढ़ की मार पड़ी तो चार-छह महीने और लग सकते हैं। हकीकत ये है कि बाई पास के नीचे से निकलने वाली सड़कों के लिए बनने वाले ओवर ब्रिज आज भी निर्माणाधीन हैं और आगामी विधानसभा चुनावों की आदर्श चुनाव आचार संहिता लगने को है। बाई पास के लिए क्रासिंग पर सर्विस रोड, लूप रोड और कोरीडोर बनाने, सड़क के दोनों ओर तारबंदी अथवा किसी तरह के एंगल लगा रेलिंग लगाए जाने जैसे काम अभी शेष हैं। इसके अलावा सड़क चूंकि पूरी तरह से अत्याधुनिक व भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर बनाई जानी है और बड़े सैनिक वाहन इसका प्रयोग करेंगे, ऐसे में एक्सप्रेस हाईवे का रूप भी अभी दिया जाना है।

Wednesday, 6 April 2011

मंहगा होगा पटियाला से चंडीगढ़ जाना, tol tex, 64 no. high way, road, patiala to chandigarh


 फोर लेन का प्रस्ताव लागू होते ही 15-15 रूपये के दो टोल टेक्स लगेंगे
-सरकार को मिल सकती है नकारात्मक ग्रांट, कंपनी सड़क भी बनाएगी और पैसे भी देगी
भूपेश चट्ठा, पटियाला
भौतिकता वादी युग में अगर आप सुविधा चाहते है तो कीमत चुकाने के लिए भी तैयार रहें, लेकिन कभी कभी कीमत अखरने लगती है। लगता है जो कीमत ली जा रही है कहीं वो 'वसूली' तो नहीं है। पटियाला-चंडीगढ़ के 64 नंबर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी कुछ ऐसा ही होने जा रहा है। इस सड़क पर आना जाना अब मंहगा होने जा रहा है।

सरकार की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव के तहत सड़क पर दो जगह राजपुरा से पहले और बाद में 15-15 रूपये के टोल टेक्स कार चालकों पर लगने वाले है। सड़क के फोर लेन होने की स्थिति में लगने वाले इस टेक्स से होने वाली वसूली में सरकार को भी हिस्सा मिलाना तय किया जा रहा है। प्रस्ताव में नकारात्मक ग्रांट लेने की तकनीक को अपनाया जा रहा है जिसके तहत सड़क बनाने वाली निजी क्षेत्र की जो भी कंपनी सड़क का निर्माण करेगी वो निर्माण के अलावा सरकार को धन राशि भी देगी। जिसकी वसूली टेक्स लगा कर कंपनी बाद में राहगीरों से वसूलेगी। हालांकि अभी इस बात को अंतिम रूप नहीं दिया गया है कि यह टोल टेक्स कितने सालों तक जारी रहेगा और कितने सालों बाद राज्य की जनता को सपुर्द किया जाएगा।

जीरकपुर-पटियाला के बीच बनने वाला यह सड़क प्रोजेक्ट हालांकि इस साल जनवरी में शुरू होना था लेकिन प्रधान मंत्री की अध्यक्षता में केंद्र सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर पर बनी केबिनेट कमेटी ने अभी हरी झंडी नहीं दी है। राज्य लोक निर्माण विभाग के अधिकारी बताते है कि जीरकपुर से पटियाला, संगरूर, बठिंडा होते हुए डबवाली तक बनने फोर लेन के हाई-वे में पटियाला-जीरकपुर के हिस्से की अनुमानित लागत 495.70 करोड़ रूपये आंकी गई है।
 बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन 19 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण लगभग पूरा कर चुका है।
वर्ष 2002 में इस सड़क को चौड़ा कर सात से 10 मीटर कर दिया गया लेकिन अब फोर लेन करने पर इसके दोनो लेन सवा आठ -सवा आठ मीटर के करने अलावा बीच में साढ़े चार मीटर की जगह छोड़ी जाएगी। ऐसे में 21.5 मीटर चौड़ी हो जाएगी ये सड़क। दो साल पहले पीडब्ल्यूडी ने केंद्र के साथ एमओयू भी साइन कर लिया था।

Sunday, 13 March 2011

डबलरोल: नदी-नहर किनारे सड़क, बाढ़-ट्रैफिक दोनों नियंत्रित after flood, river ghagger, road, toll tex, traffic


-मुगलकाल से रियासती काल तक होता रहा है सदुपयोग
भूपेश चट्ठा, पटियाला
मेट्रो शहरों के बाद देश में सबसे सघन सड़क यातायात वाले पंजाब की सड़कों पर बढ़ रही वाहनों की संख्या, हर पांच-सात साल में सड़क चौड़ी करने को मजबूर कर रही है। परिणामस्वरूप किसान की जमीन या तो छिनती है या बंट जाती है। पंजाब का खेत लगातार छोटा होता जा रहा है पर ट्रैफिक समस्या से फिर भी बनी हुई, ऐसे में अब नदी-नहरों के सड़के बना दोहरा लाभ लिया जाएगा। एक ओर पक्के किनारे बाढ़ नियंत्रित करेंगे और बिना जमीन अधिग्रहण किए ट्रैफिक नियंत्रित भी हो जाएगा।
दिलचस्प है कि मुगलकाल से रियासती काल और फिर अंग्रेजी शासन में दरिया के किनारों का प्रयोग तो इस तरह से नहीं हुआ अलबत्ता कच्चे-पक्के सूए से नहरों तक सभी की योजना कुछ इसी तरह ही बनती रही है पर आजादी के बाद यह सीमित हो गया। ड्रैनेज विभाग के ही वरिष्ठ अधिकारी बताते है कि पिछली सरकार की ओर राज्य की 107 सड़कों पर टोल टैक्स लगाए जाने के बाद इस ओर सोचना शुरू किया गया। राष्ट्रीय मार्गो पर लगे टोल टैक्स इससे अलग है। जमीन अधिग्रहण आर्थिक व राजनीतिक रूप से  मंहगा साबित होने लगा है।
राज्य में चंडीगढ़ से अंबाला की ओर जाने डेराबस्सी और जीरकपुर के बीच से घग्गर किनारे शंभू के आगे आसानी से मिला जा सकता है। ऐसे ही हाई-वे पर भीड़ कम करने आसान व छोटे रास्तों में भाखड़ा नहर के अलावा, एसवाईएल और सरहिंद फीडर को भी लिया जा सकता है। घन्नौर से अंबाला तक ऐसी ही सड़क चल रही है तो पटियाला से समाना तक का भाखड़ा नहर का चल रहा रास्ता टोल के बाद बंद किया गया। समाना बाई पास पर हुए एक प्रयास ने आए दिन के जाम बंद कर दिए।
रोपड़ के बाईपास को सरहिंद नहर किनारे चमकौर साहिब तक किया गया है, इसे लुधियाना तक बढ़ाया जा सकता है। दोराहा के पास से जिस तरह से नहर का दोहरा प्रयोग हुआ है। राड़ा साहिब से अहमदगढ़ मंडी पुल तक गई नहरी सड़क को बठिंडा तक ले जाया जा सकता है। सतलुज के अलावा रावी दरिया से निकली नहर किनारे सड़क बना, सेना को सौंप,  इसे सीमा क्षेत्र तक खींच सुरक्षा बढ़ाने के अलावा तस्करी रोकने में भी प्रयोग किया जा सकता है।
वहीं पर्यावरणविद् डा. जोगिंदर टाईगर कहते है कि अगर इस ओर कार्य किया जाता है तो वर्तमान सड़कों के किनारे किसान की जमीनों का हो रहा अधिग्रहण रुकेगा और नहरों के किनारे टूटने से भी बचत होगी, खाली पड़ी सरकारी जमीन का सदुपयोग होने के अलावा। नियमित रूप से चलता ट्रैफिक और सड़क की होने वाली जांच किनारे पक्के रखेगी और बाढ़ से भी निजात दिलाएगी। नदी के एक ओर के धूसी बांध पक्के हो सकेंगे और कनेक्टीविटी बढऩे से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास होगा।
वहीं प्रदेश के नहरी विभाग के चीफ इंजीनियर इजी. एएस दुल्लत कहते है कि यह सब कनेक्टिविटी पर निर्भर करता है, हर स्थान पर नहीं किया जा सकता। विभाग की ओर से दोराहा से बठिंडा तक बठिंडा ब्रांच पर सड़क बनाए जाने के विचार पर काम चल रहा है। इसी क्रम में अबोहर ब्रांच पर भी सड़क बनाने का प्रस्ताव है। इस योजना पर भी काम चल रहा है।