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Thursday, 24 November 2011

सुनिए सरकार ! ये पत्थर कुछ कहता है, bye pass, southern, road,




शिलान्यास का सच दक्षिणी बाई पास
अधूरे काम : पिछली सरकार का सपना, इस सरकार में भी नहीं हुआ पूरा
एक दशक से ज्यादा मंत्रालयों की लड़ाई में लटका, अब छह साल से निर्माण में
 14 दिसंबर 2006 को 18 महीने में चालू करने की घोषणा से हुआ था शिलान्यास
भूपेश चट्ठा, पटियाला शाही शहर को भारी व सैनिक ट्रैफिक से मुक्त करने, चंडीगढ़ व अंबाला की ओर से आने वाले तथा समाना व संगरूर की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतरी यातायात में उलझने से बचाने के लिए बनाए जाने वाले दक्षिणी बाई पास का सपना सूबे की पिछली सरकार ने दिखाया था, लेकिन एक और सरकार का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी यह पूरा नहीं हो सका है। राजपुरा रोड को संगरूर रोड से मिलाने के लिए 18.8 किलोमीटर लंबे बाई पास को जमीन से करीब 13 फीट ऊपर उठाकर बनाए जाने वाले इस कोरीडोर का मामला एक दशक से ज्यादा केंद्रीय वन व रक्षा मंत्रालय समेत राज्य के लोक निर्माण विभाग की लड़ाई में लटका रहा। इसके बाद सेना के बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन को निर्माण की जिम्मेदारी दे दी गई। 2007 के राज्य विधानसभा चुनावों की आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले 14 दिसंबर 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बाई पास का शिलान्यास कर दिया। नींव पत्थर रखने के तुरंत बाद बताया गया कि 80 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से यह बाई पास करीब 18 महीने में चालू हो जाएगा। यदि मौसम, खासकर मानसून के सीजन में बाढ़ की मार पड़ी तो चार-छह महीने और लग सकते हैं। हकीकत ये है कि बाई पास के नीचे से निकलने वाली सड़कों के लिए बनने वाले ओवर ब्रिज आज भी निर्माणाधीन हैं और आगामी विधानसभा चुनावों की आदर्श चुनाव आचार संहिता लगने को है। बाई पास के लिए क्रासिंग पर सर्विस रोड, लूप रोड और कोरीडोर बनाने, सड़क के दोनों ओर तारबंदी अथवा किसी तरह के एंगल लगा रेलिंग लगाए जाने जैसे काम अभी शेष हैं। इसके अलावा सड़क चूंकि पूरी तरह से अत्याधुनिक व भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर बनाई जानी है और बड़े सैनिक वाहन इसका प्रयोग करेंगे, ऐसे में एक्सप्रेस हाईवे का रूप भी अभी दिया जाना है।

Wednesday, 13 April 2011

बाई पास दूसरी बार लेगा, जान सैंकड़ों पेड़ों की bye pass, environment, plants, trees, devlopment


-दक्षिणी बाईपास के चालू होने से पहले ही चौड़ा करने की योजना
-1998-99 में बाईपास के भूमि अधिग्रहण पर लगे सैंकड़ों पेड़ों पर लगने लगे लाल निशान
भूपेश चट्ठा, पटियाला
व्यक्ति कुंवारा रह जाए तो कोई तवज्जो नहीं देता, शादी के बाद औलाद ना हो तो भी इंसान सब्र कर लेता है, लेकिन जिसे 10-12 साल पाल पोस कर बड़ा किया हो यदि उसे ही कोई आंखों के सामने फांसी पर चढ़ा दे और यह भी पता हो कि दोबारा ओलाद होगी ही नहीं, तो बर्दाश्त की सीमा टेस्ट होनी तय होती है। 64 नंबर राष्ट्रीय राज मार्ग पर शहर के दक्षिणी बाई पास की भूमि अधिग्रहण के दौरान लगाए गए सैंकड़ों पेड़ अब बाईपास पर ट्रैफिक शुरू होने से पहले ही काट दिए जाएंगे। दिलचस्प है कि निर्माणाधीन बाईपास चालू होने से पहले ही दूसरी बार पेड़ों की जान ले रहा है।
दक्षिणी बाईपास के चालू होने से पहले ही चौड़ा करने की योजना के तहत दोनो ओर लगाए गए अर्जुन, जमौआ, सुखचैन आदि औरनामेंटल पेड़ विकास की बलि चढऩे जा रहे है। याद रहे कि 1998-99 में बाईपास के भूमि अधिग्रहण के तुरंत बाद जैसे ही प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ सबसे पहले वन विभाग को दोनों किनारों पर पौधे लगा वन क्षेत्र विकसित करने को कहा गया। तकनीकि रूप से ज्यादा कार्बन डाई आक्साइड सोखने वाले प्लांट लगाए गए। आज ये 30 से 40 फिट ऊंचे हो चुके है।
वन विभाग के ही एक कर्मी इसे 'सरकारी निर्णयÓ बताते है और इसकी तुलना खुदकुशी करने से करते है कहते है कि अभी निर्धारित आयु पूरी नहीं हुई है ऐसे में इसके लिए नया क्षेत्र विकसित करने अलग से जमीन भी नहीं मिलने वाली वन विभाग को पेड़ काटने की सूचना दो महीने पहले तक नहीं थी। जिन पेड़ों की आने वाले दिनों में कटाइ्र होगी उनकी छाल काट कर करीब दो महीने पहले ही विभाग ने निशानदेही की है। अधिकारी कहते है कि वन के खाते में चढऩे अथवा जन्म प्रमाणपत्र बनने से पहले ही अब इनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनने लगा है। जिन पेड़ों को काटा जाना है उन र अब लाल निशान लगेगा और इनकी मार्किंग कर इन्हें फौरेस्ट कारपोरेशन को सौंप दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि  राज्य लोक निर्माण विभाग व राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधीकरण के सहयोग से जीरकपुर से पटियाला, संगरूर, बठिंडा होते हुए डबवाली तक बनने वाले फोर लेन के हाई-वे में पटियाला-जीरकपुर के हिस्से की अनुमानित लागत 495.70 करोड़ रूपये आंकी गई है। बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन 19 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण लगभग पूरा कर चुका है।
वर्ष 2002 में इस सड़क को चौड़ा कर सात से 10 मीटर कर दिया गया लेकिन अब फोर लेन करने पर इसके दोनो लेन सवा आठ -सवा आठ मीटर के करने अलावा बीच में साढ़े चार मीटर की जगह छोड़ी जाएगी। ऐसे में 21.5 मीटर चौड़ी हो जाएगी ये सड़क। दो साल पहले पीडब्ल्यूडी ने केंद्र के साथ एमओयू भी साइन किया पर ये कागजों में ही सिमटा रहा। हालांकि पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने लंबा समय पहले ही बाईपास से 100 मीटर दूर तक बिजली कनेक्शन देने बंद कर दिए थे।