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Friday, 6 January 2012

विधायक दिखे नहीं जो हुआ निगम के उधारी खाते से, patiala, devlopment, mla


...पांच साल ये हाल
भूपेश चट्ठा, पटियाला

कभी पैप्सू राच्य की राजधानी रहे पटियाला शहर को प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है। पांच साल पहले प्रदेश का सत्ता केंद्र रहे इस शहर ने मुख्यमंत्री दिया तो मंत्रियों-संतरियों के दौरे आम थे पर सत्ता बदलते ही सब कुछ बदल गया। शहर में विधायक तो दिखे नहीं और जो कुछ हुआ नगर निगम के खाते से वो भी उधारी वाले।
अपने विकास की गति को पहले तीन साल शहर कायम नहीं रख सका पर अंतिम पांचवे साल में कहीं कहीं विकास एक बार फिर चमकने लगा है। एक पूर्व मुख्यमंत्री के शहर में वर्तमान मुख्यमंत्री ने खासे दौरे किए और लोक सभा चुनावों से पहले संगत दर्शनों के नाम पर जम कर धन राशि बांटी। जिसका असर अब कहीं कहीं झलकने भी लगा है। लेकिन रफ्तार में निसंदेह कमी आई है। नगर निगम के मेयर अजीत पाल सिंह कोहली स्वीकार भी करते हैं कि डेयरी बाहर निकालने का काम देरी से निपटाया जा रहा है पर हुआ जरूर है ये पिछली सरकार की तरह से चुनावी स्टंट नहीं है कि आप एक विवादास्पद जगह पर शिलान्यास कर जाएं। इसी तरह छोटी नदी का प्रोजेक्ट अब एजेंडे में आया है। इसके अलावा लोग पानी-सीवरेज के हालात सुधारने की सिर्फ बातें करते थे, हमने कर दिखाया है। सड़कें, पार्क, इंटर लाकिंग टाइलें लगा गलियों का निर्माण करवाया है। 70 से च्यादा टयूबवेल लगा कर पेय जल कि समस्या को हल किया तो सीवरेज की समस्या को 20 फीसदी पर लाए हैं। लोअर माल व इंकम टेक्स रोड को चौड़ा किया। 109 करोड़ रूपये का सीवरेज प्रोजेक्ट आउटर कालोनियों के लिए चल रहा है। नया जाल बिछाया जाउ रहा है। जबकि कांग्रेस तो उन्हें पांच करोड़ का कर्ज दे कर गई थी।
हालांकि कांग्रेस से विधायक व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का आधा समय तो निलंबन में निकल गया और शेष प्रदेश स्तर पर पार्टी की गतिविधियां संभालने में।
 वहीं शहर के बाशिंदे जसमेर सिंह, तेजिंदर सिंह, रमेश कुमार, मनजीत सिंह इस बात से तो इत्तफाक रखते हैं कि काम तो हुए हैं पर और भी हो सकते थे। आर्य समाज में जसमेर सिंह कहते हैं कि इस क्षेत्र के घरों में धूप नहीं आती ऐसे में करीब 35 साल बाद पार्क का दुरुस्त होना खासा शानदार है। नशेडिय़ों के चुंगल से बाहर आया है और अब बुजुर्ग-बच्चे आराम से आनंद ले सकेंगे।

क्या नहीं हुआ
शहर से पशुओं की डेयरी बाहर करना, एयर कंडीशनंड बस स्टैंड बनाना, छोटी नदी-बड़ी नदी के किनारे पक्का करना, छोटी नदी नाले में तब्दील फिर कब्जे अधीन आई, नाले की समस्या का स्थाई हल करना, सड़कें चौड़ी करना, नहरी पानी आधारित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा, पटियाला-चंडीगढ़ राज मार्ग के फोर लेन का प्रोजेक्ट कागजों में सिमटा, केंद्र व राच्य के मंत्रालयों के बीच झूल रहा है।


जहां काम चालू है
बाई पास निर्माणधीन, पुल बनने शेष, सीवरेज सिस्टम पर काम चालू, बड़ी नदी का काम राजपुरा रोड तक हुआ आगे अधूरा

दो महीने लेट, बस दो महीने और...patiala, devlopment, roads, corporation,


-आयकर आफिस के सामने हुई लोगों की मौजें पर लोअर माल पर काम जारी
फोटो:
भूपेश चट्ठा, पटियाला

शहर अथवा हाईवे पर होने वाले सड़क निर्माण से ठीक पहले लिखा होता है कि 'कार्य प्रगति पर है कृपया धीरे चलेंÓ पर शहर में दो सड़कों को चौड़ा करने के मामले में एक लीला भवन चौंक से राजिंदरा अस्पताल तक एक सड़क की चौड़ाई भी बढ़ गई और शुरु हुए विकास कार्य में प्रगति भी हुई लेकिन लोअर माल के मामले में 'प्रगति धीरे है पर कार्य चल रहा हैÓ।
15 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाली इन दोनों सड़कों पर अधिकारी कहते हैं कि एक तो लगभग मुकम्मल है और दूसरी में दो महीने की देरी से काम चल रहा है। सड़क के पूरी तरह से दुरुस्त होने के सवाल पर बताया जाता है कि बस दो महीने और लगेंगे। लोअर माल पर लगे पेड़ों की कटाई की अनुमति केंद्रीय वन मंत्रालय से ली गई तो सीवरेज विभाग, पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने अपनी लाइनें तबदील की हैं। इसी में च्यादा वक्त लगा है, अब कंकरीट आदि का काम हो चुका है बस कोलतार ही डालना शेष है।
वहीं लोअर माल पर दुकान चला रहे राम प्रशाद कहते हैं कि अब तक तो तोड़ा फोड़ी ही हो रही थी , सड़क पर काम तो अब चालू हुआ है। जबकि इसी क्षेत्र के बाशिंदे सेवानिवृत गुलशन लाल कहते हैं कि अब तक तो परेशानी ही झेल रहे हैं, देखो काम कब सिरे चढ़ता है।
इसी क्रम में लीला भवन चौंक के दुकानदार अशोक कुमार कहते हैं कि निसंदेह सड़क में डिवाइडर पड़ जाने और चौड़ा हो जाने से एरिया च्यादा खूबसूरत लगने लगा है। वहीं राहुल चौपड़ा इससे इत्तफाक नहीं रखते, कहते हैं कि पार्किंग की समस्या जहां की तहां है। अब ग्राहक इसी सड़क पर कहीं दूर पार्क करने जाता है, जबकि डिवाइडर डालने से पहले पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए थी।


जो किया निगम ने किया: मेयर

मेयर अजीतपाल सिंह कोहली कहते हैं कि शहर में सड़क निर्माण की दिशा में जो किया वो नगर निगम ने ही किया है। जबकि जनप्रतिनिधि के नाम पर यहां विधायक भी हैं और सांसद भी। चाहते तो ये लोग भी अपनी तरफ से योगदान डाल सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। घाटे में चल रहे और उधारी में डूबे निगम की आमदन बढ़वा कर विकास कार्य करवाने का श्रेय उन्हें दिया जाना चाहिए।  काम में देरी के सवाल पर वे कहते हैं कि केंद्रीय वन विभाग जैसे विभागों से अनुमति और बिजली, सीवर व टेलीफोन की लाइनें बदलने में खासा समय लगा है।

Wednesday, 13 April 2011

बाई पास दूसरी बार लेगा, जान सैंकड़ों पेड़ों की bye pass, environment, plants, trees, devlopment


-दक्षिणी बाईपास के चालू होने से पहले ही चौड़ा करने की योजना
-1998-99 में बाईपास के भूमि अधिग्रहण पर लगे सैंकड़ों पेड़ों पर लगने लगे लाल निशान
भूपेश चट्ठा, पटियाला
व्यक्ति कुंवारा रह जाए तो कोई तवज्जो नहीं देता, शादी के बाद औलाद ना हो तो भी इंसान सब्र कर लेता है, लेकिन जिसे 10-12 साल पाल पोस कर बड़ा किया हो यदि उसे ही कोई आंखों के सामने फांसी पर चढ़ा दे और यह भी पता हो कि दोबारा ओलाद होगी ही नहीं, तो बर्दाश्त की सीमा टेस्ट होनी तय होती है। 64 नंबर राष्ट्रीय राज मार्ग पर शहर के दक्षिणी बाई पास की भूमि अधिग्रहण के दौरान लगाए गए सैंकड़ों पेड़ अब बाईपास पर ट्रैफिक शुरू होने से पहले ही काट दिए जाएंगे। दिलचस्प है कि निर्माणाधीन बाईपास चालू होने से पहले ही दूसरी बार पेड़ों की जान ले रहा है।
दक्षिणी बाईपास के चालू होने से पहले ही चौड़ा करने की योजना के तहत दोनो ओर लगाए गए अर्जुन, जमौआ, सुखचैन आदि औरनामेंटल पेड़ विकास की बलि चढऩे जा रहे है। याद रहे कि 1998-99 में बाईपास के भूमि अधिग्रहण के तुरंत बाद जैसे ही प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ सबसे पहले वन विभाग को दोनों किनारों पर पौधे लगा वन क्षेत्र विकसित करने को कहा गया। तकनीकि रूप से ज्यादा कार्बन डाई आक्साइड सोखने वाले प्लांट लगाए गए। आज ये 30 से 40 फिट ऊंचे हो चुके है।
वन विभाग के ही एक कर्मी इसे 'सरकारी निर्णयÓ बताते है और इसकी तुलना खुदकुशी करने से करते है कहते है कि अभी निर्धारित आयु पूरी नहीं हुई है ऐसे में इसके लिए नया क्षेत्र विकसित करने अलग से जमीन भी नहीं मिलने वाली वन विभाग को पेड़ काटने की सूचना दो महीने पहले तक नहीं थी। जिन पेड़ों की आने वाले दिनों में कटाइ्र होगी उनकी छाल काट कर करीब दो महीने पहले ही विभाग ने निशानदेही की है। अधिकारी कहते है कि वन के खाते में चढऩे अथवा जन्म प्रमाणपत्र बनने से पहले ही अब इनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनने लगा है। जिन पेड़ों को काटा जाना है उन र अब लाल निशान लगेगा और इनकी मार्किंग कर इन्हें फौरेस्ट कारपोरेशन को सौंप दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि  राज्य लोक निर्माण विभाग व राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधीकरण के सहयोग से जीरकपुर से पटियाला, संगरूर, बठिंडा होते हुए डबवाली तक बनने वाले फोर लेन के हाई-वे में पटियाला-जीरकपुर के हिस्से की अनुमानित लागत 495.70 करोड़ रूपये आंकी गई है। बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन 19 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण लगभग पूरा कर चुका है।
वर्ष 2002 में इस सड़क को चौड़ा कर सात से 10 मीटर कर दिया गया लेकिन अब फोर लेन करने पर इसके दोनो लेन सवा आठ -सवा आठ मीटर के करने अलावा बीच में साढ़े चार मीटर की जगह छोड़ी जाएगी। ऐसे में 21.5 मीटर चौड़ी हो जाएगी ये सड़क। दो साल पहले पीडब्ल्यूडी ने केंद्र के साथ एमओयू भी साइन किया पर ये कागजों में ही सिमटा रहा। हालांकि पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने लंबा समय पहले ही बाईपास से 100 मीटर दूर तक बिजली कनेक्शन देने बंद कर दिए थे।