...पांच साल ये हाल
भूपेश चट्ठा, पटियाला
कभी पैप्सू राच्य की राजधानी रहे पटियाला शहर को प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है। पांच साल पहले प्रदेश का सत्ता केंद्र रहे इस शहर ने मुख्यमंत्री दिया तो मंत्रियों-संतरियों के दौरे आम थे पर सत्ता बदलते ही सब कुछ बदल गया। शहर में विधायक तो दिखे नहीं और जो कुछ हुआ नगर निगम के खाते से वो भी उधारी वाले।
अपने विकास की गति को पहले तीन साल शहर कायम नहीं रख सका पर अंतिम पांचवे साल में कहीं कहीं विकास एक बार फिर चमकने लगा है। एक पूर्व मुख्यमंत्री के शहर में वर्तमान मुख्यमंत्री ने खासे दौरे किए और लोक सभा चुनावों से पहले संगत दर्शनों के नाम पर जम कर धन राशि बांटी। जिसका असर अब कहीं कहीं झलकने भी लगा है। लेकिन रफ्तार में निसंदेह कमी आई है। नगर निगम के मेयर अजीत पाल सिंह कोहली स्वीकार भी करते हैं कि डेयरी बाहर निकालने का काम देरी से निपटाया जा रहा है पर हुआ जरूर है ये पिछली सरकार की तरह से चुनावी स्टंट नहीं है कि आप एक विवादास्पद जगह पर शिलान्यास कर जाएं। इसी तरह छोटी नदी का प्रोजेक्ट अब एजेंडे में आया है। इसके अलावा लोग पानी-सीवरेज के हालात सुधारने की सिर्फ बातें करते थे, हमने कर दिखाया है। सड़कें, पार्क, इंटर लाकिंग टाइलें लगा गलियों का निर्माण करवाया है। 70 से च्यादा टयूबवेल लगा कर पेय जल कि समस्या को हल किया तो सीवरेज की समस्या को 20 फीसदी पर लाए हैं। लोअर माल व इंकम टेक्स रोड को चौड़ा किया। 109 करोड़ रूपये का सीवरेज प्रोजेक्ट आउटर कालोनियों के लिए चल रहा है। नया जाल बिछाया जाउ रहा है। जबकि कांग्रेस तो उन्हें पांच करोड़ का कर्ज दे कर गई थी।
हालांकि कांग्रेस से विधायक व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का आधा समय तो निलंबन में निकल गया और शेष प्रदेश स्तर पर पार्टी की गतिविधियां संभालने में।
वहीं शहर के बाशिंदे जसमेर सिंह, तेजिंदर सिंह, रमेश कुमार, मनजीत सिंह इस बात से तो इत्तफाक रखते हैं कि काम तो हुए हैं पर और भी हो सकते थे। आर्य समाज में जसमेर सिंह कहते हैं कि इस क्षेत्र के घरों में धूप नहीं आती ऐसे में करीब 35 साल बाद पार्क का दुरुस्त होना खासा शानदार है। नशेडिय़ों के चुंगल से बाहर आया है और अब बुजुर्ग-बच्चे आराम से आनंद ले सकेंगे।
क्या नहीं हुआ
शहर से पशुओं की डेयरी बाहर करना, एयर कंडीशनंड बस स्टैंड बनाना, छोटी नदी-बड़ी नदी के किनारे पक्का करना, छोटी नदी नाले में तब्दील फिर कब्जे अधीन आई, नाले की समस्या का स्थाई हल करना, सड़कें चौड़ी करना, नहरी पानी आधारित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा, पटियाला-चंडीगढ़ राज मार्ग के फोर लेन का प्रोजेक्ट कागजों में सिमटा, केंद्र व राच्य के मंत्रालयों के बीच झूल रहा है।
जहां काम चालू है
बाई पास निर्माणधीन, पुल बनने शेष, सीवरेज सिस्टम पर काम चालू, बड़ी नदी का काम राजपुरा रोड तक हुआ आगे अधूरा