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Monday, 27 February 2012

कहीं नारियल दबा, तो किसी ने कोयला बहाया, after punjab election,


'चुनावी उपचार'
- हवन-प्रार्थना-अरदास-आर्शीवाद आम हुआ अब टोटके भारी पड़े, गाली सुनने भी गए नेता
भूपेश चट्ठा, पटियाला
राज्य विधान सभा चुनाव के परिणाम आने की तिथि नजदीक आने के साथ ही जहां नेताओं की धड़कने उनके ब्लड प्रेशर व शूगर के साथ ही बढ़ रही हैं वहीं उम्मीदवारों के समर्थकों-करीबी रिश्तेदारों की ओर से अपने बंदे की जीत के लिए हर तरह का टोटका आजमाया जा रहा है। इसमें सर्वाधिक प्रचलित 'नारियल दबानेÓ से लेकर सबसे च्यादा गोपनीय तरीके से किया जाने वाला 'गाली सुननेÓ का टोटका भी शामिल है। हालांकि बहते पानी में पानी वाले नारियल के साथ कोयला, साबुत मांह अथवा सात प्रकार के अनाज का मिश्रण बहाना आम है।

नारियल दबाए जाने के टोटके पर ऐसे ही एक 'माहिरÓ बताते हैं कि वर्तमान में पंजाब पीपल्स पार्टी के एक नेता अकाली होने से पहले जब कांग्रेस का टिकट लेने दिल्ली गए थे तो वहां पर नारियल दबाते दिल्ली पुलिस की ओर से पकड़ भी लिए गए पर अब पंजाब से लेकर उत्तरकाशी तक कोई समस्या नहीं है। चुनाव लडऩे से पहले और विरोधी उम्मीदवार का नाम साफ होते ही एक नेता जी ने बिल पत्र पर विरोधी का नाम लिख कर शहद की शीशी में बंद कर लिया। बताया जा रहा है कि इससे उक्त विरोधी की 'क्षमताएं सीलÓ की गई हैं।
इसी क्रम में साफ सुथरी पूजा करवाने वाले पंडित नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर बताते हैं कि विधि विधान से हवन-यज्ञ करना, अपनी कामयाबी के लिए प्रार्थना-अरदास करना कोई बुरी बात नहीं है। संतों फकीरों का आर्शीवाद लेना भी कोई बुरी बात नहीं है पर एक शराब चढऩे वाले डेरे पर किसी का बताया टोटका सिद्ध करने, गाली सुनने जालंधर के पास चले जाना ठीक कैसे कहा जा सकता है। कम से कमच्च्योतिष अनुसार सही नहीं है।
एक महीने में किसने? कितने टोटके किए? इसकी स्टीक जानकारी तो संभव है किसी के पास ना हो लेकिन चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों व उनकी ओर से की ओर से लगाई जा रही इस 'जुगतÓ में लगभग हर राजनीतिक दल के लोग शामिल हैं। दिलचस्प है कि जो लोग सार्वजनिक जीवन में इस तरह के 'प्रयोगोंÓ के मुखर विरोधी हैं उन्होने ने भी अपने करीबी को मूक सहमति दे रखी है। ऐसे ही एक सलाहकार कहते हैं कि जिस तरह की विरोधाभास वाली अटकलों का दौर चल रहा है उसमें कुछ भी संभव है। ऐसे में यदि एक दो 'उपायÓ कर भी लिए जाएं तो बुराई क्या है?

Wednesday, 15 February 2012

काश बिन चुनाव जारी रहे 'आदर्श आचार संहिताÓ after punjab election, code conduct, wine,


-तीन दिन में सड़क पर शराब पीने के डेढ़ दर्जन ममाले दर्ज, स्कूली वाहनों के चार दर्जन चालान
-मामला सभ्य समाज में समझ के बावजूद सिर्फ कानून ना पालन करने का
भूपेश चट्ठा, पटियाला
शाही शहर पटियाला दुनिया भर में चाहे अपने एतिहासिक पैग के लिए मशहूर हुआ है पर यहां कि सड़कें पिछले कुछ सालों से सड़क किनारे रेहडिय़ों, ढ़ाबों, खोखों पर 'खड़कने वाली गिलासीÓ के चलते बदनाम हो चली थी लेकिन विधान सभा चुनाव के चलते मतदान के बाद भी जारी आदर्श चुनाव आचार संहिता के चलते पुलिस ने लंबे अर्से बाद शराबियों को तहजीब सिखाने और अवैध रूप से चल रहे 'ओपन एयर बॉरÓ बंद करवाने का प्रयास किया है। दिलचस्प है कि ऐसे कुख्यात अड्डों के पास से गुजरने वाला हर इंसान अब कहने लगा है कि काश बिन चुनाव के भी ऐसी 'आदर्श आचार संहिताÓ शहर में जारी रहनी चाहिए।
पिछले तीन दिन में सड़क किनारे किसी अस्थायी इंतजाम में शराब पीने पिलाने के दर्ज किए गए डेढ़ दर्जन ममाले बताते हैं कि पुलिस ने इस बार कार्रवाई की है। दिलचस्प है कि इनकी संख्या जहां पहले दिन दहाई अंक में थी तो दूसरे दिन यह सात पर आ गई जबकि बीती रात सिर्फ एक मामला ही दर्ज किया गया है। पुलिस के ही एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि एसएसपी के आदेशों पर कार्रवाई तो जारी रही पर धरा केवल एक ही गया है। वो भी वीवीआईपी क्षेत्र कहे जाने वाले अर्बन एस्टेट में मीट की रेहड़ी लगाने वाले और इस पर शराब पीने के आरोप में दो लोगों क खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। तफजल पुरा के कलपत सिंह व राम दयाल इस बार गिरफ्त में आए हैं।
ठीक ऐसे ही शहर की सड़कों पर मनमाने ढ़ंग से स्कूली वाहन चलाने और नन्हें बच्चों से लेकर स्कूली विद्यार्थियों का जीवन दांव पर लगाने वालों पर ट्रैफिक पुलिस की मात्र एक दिन की कार्रवाई में चार दर्जन चालान काट दिए गए। इसमें बस से लेकर आटो रिक्शा, मिनी बस, तूफान, और वैन जैसे हर तरह के वाहन हैं जिन्होंने यातायात नियमों को ना मानने की आदत ही डाल ली है। यहां पर सुधार तो कम हुआ पर बसों के रास्ते जरूर बदल गए हैं। हालांकि पुलिस की सारी गतिविधियां पटियाला शहर तक ही सीमित रही हैं जबकि  हालात जिले के अन्य शहरों में भी कुछ अलग नहीं हैं।
वहीं जिला प्रशासन के एक सेवा मुक्त अधिकारी कहते कि सारा मामला सभ्य समाज में समझ के बावजूद सिर्फ कानून ना पालन करने का है, इसके अलावा कुछ नहीं। ऐसे में नियम कानून की पालना करनी चाहिए और करवानी भी चाहिए वे कहते हैं कि पुलिस व आबकारी विभाग को अगले चरण में चाहिए कि जहां वैध रूप से बैठने के अहाते बनाए गए हैं वे भी दुकान के अंदर ही रहने चाहिए और बैठने की संख्या के हिसाब से राजस्व वसूला जाना चाहिए नाकि सड़क व बरामदों में मेज कुर्सियां लगाने की छूट देकर।

Sunday, 5 February 2012

प्रत्याशी का एक्जिट पोल और समर्थकों की इंवेस्टिगेशन शुरू, exit poll, after punjab election,


- माइक्रो स्तर पर होने लगा आंकलन, दावा करने वालों की सच्चाई कसी जा रही आंकड़ों की कसौटी पर
- फोन की कॉल रिकार्ड से लेकर तलाशी जा रही हैं फोटो व वीडियो क्लिप
भूपेश चट्ठा, पटियाला
चुनाव आयोग ने चाहे प्री पोल व एक्जिट पोल सर्वे करने व इनके प्रकाशन व प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया हो, लेकिन विधानसभा के लिए दो दिन पहले हुए मतदान के बाद आफ्टर पोल सर्वे के रूप में उम्मीदवारों ने अपने स्तर पर गहन आंकलन शुरु कर दिया है। हालांकि आम तौर पर राजनीतिक दल ही ऐसे अनुमान लगाया करते थे।
एक दिन बाद प्राप्त हुई वोटिंग की बूथ स्तर की गणनाओं को सामने रख कर पता किया जा रहा है कि किस स्ट्रांग क्षेत्र में ज्यादा फीसदी वोट पडऩे से कितना लाभ मिल सकता है और कमजोर क्षेत्र में हुए कम मतदान से वे कितनी लीड में आ गए हैं।
इसी क्षेत्र के पुराने जानकार जीडी सिंह बताते हैं कि कंप्यूटर में पुराने रूझानों का फीड किया गया डाटा, मैप और साफ्टवेयर की मदद से किए जाने वाले इस कार्य में पूर्व में दर्ज किए गए आंकड़ों को भी साथ रखा जाता है। अगर आपकी ओर से दर्ज जानकारी सही है तो दो फीसदी प्लस-माइनस की एरर के साथ आप अभी चुनाव परिणाम देख सकते हैं।
वहीं एक उम्मीदवार के एक चुनाव सलाहकार ने बताया कि किस बूथ पर कितनी वोटें पड़ी? कौन था इंचार्ज? आदि बातों को सामने रखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि किसकी कैसी रही परफार्मेंस? किस प्रमुख वर्कर ने मेहनत की है और कौन सुस्त रहा। इनके साथ ही आंकलन में यह भी समझने का प्रयास किया जा रहा है कि किसने भितरघात किया है।
माइक्रो स्तर पर हो रहे इन आंकलनों के साथ अमुक संख्या में वोटें डलवाने का दावा करने वालों की सच्चाई भी इन्हीं आंकड़ों की कसौटी पर कसी जा रही है। इतना ही नहीं पार्षद के दो चुनाव लड़ चुके हरविंदर सिंह बताते हैं कि समर्थकों के फोन की काल रिकार्ड से लेकर ऐसे फोटो व वीडियो क्लिप की तलाश भी की जा रही है। जिनमें आपकी पार्टी के कार्यकर्ता विरोधी पक्ष के किसी खास बंदे के संपर्क में कितना रहे। कुछ प्रभाव रखने वाले चुनिंदा लोगों का तो लोकेशन ट्रेस करने वाले डिवाइस की सहायता से पता किया जा रहा है कि देर रात पार्टी का कौन से पदाधिकारी ने दूसरे के यहां चक्कर लगाए और अपने क्षेत्र में बूथ ही नहीं लगाया।
माना जा रहा है कि चुनाव से पहले बागियों पर हुई कार्रवाई जहां खुलकर लड़ी गई गतिविधियों का नतीजा थी तो अब होने वाली कार्रवाई हार और जीत दोनों में लड्डू खाने वाले अथवा हर स्थिति में चुनावी मलाई चट करने वालों पर कुछ इसी तरह के सबूतों के आधार पर होगी।