'चुनावी उपचार'
- हवन-प्रार्थना-अरदास-आर्शीवाद आम हुआ अब टोटके भारी पड़े, गाली सुनने भी गए नेता
भूपेश चट्ठा, पटियाला
राज्य विधान सभा चुनाव के परिणाम आने की तिथि नजदीक आने के साथ ही जहां नेताओं की धड़कने उनके ब्लड प्रेशर व शूगर के साथ ही बढ़ रही हैं वहीं उम्मीदवारों के समर्थकों-करीबी रिश्तेदारों की ओर से अपने बंदे की जीत के लिए हर तरह का टोटका आजमाया जा रहा है। इसमें सर्वाधिक प्रचलित 'नारियल दबानेÓ से लेकर सबसे च्यादा गोपनीय तरीके से किया जाने वाला 'गाली सुननेÓ का टोटका भी शामिल है। हालांकि बहते पानी में पानी वाले नारियल के साथ कोयला, साबुत मांह अथवा सात प्रकार के अनाज का मिश्रण बहाना आम है।
नारियल दबाए जाने के टोटके पर ऐसे ही एक 'माहिरÓ बताते हैं कि वर्तमान में पंजाब पीपल्स पार्टी के एक नेता अकाली होने से पहले जब कांग्रेस का टिकट लेने दिल्ली गए थे तो वहां पर नारियल दबाते दिल्ली पुलिस की ओर से पकड़ भी लिए गए पर अब पंजाब से लेकर उत्तरकाशी तक कोई समस्या नहीं है। चुनाव लडऩे से पहले और विरोधी उम्मीदवार का नाम साफ होते ही एक नेता जी ने बिल पत्र पर विरोधी का नाम लिख कर शहद की शीशी में बंद कर लिया। बताया जा रहा है कि इससे उक्त विरोधी की 'क्षमताएं सीलÓ की गई हैं।
इसी क्रम में साफ सुथरी पूजा करवाने वाले पंडित नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर बताते हैं कि विधि विधान से हवन-यज्ञ करना, अपनी कामयाबी के लिए प्रार्थना-अरदास करना कोई बुरी बात नहीं है। संतों फकीरों का आर्शीवाद लेना भी कोई बुरी बात नहीं है पर एक शराब चढऩे वाले डेरे पर किसी का बताया टोटका सिद्ध करने, गाली सुनने जालंधर के पास चले जाना ठीक कैसे कहा जा सकता है। कम से कमच्च्योतिष अनुसार सही नहीं है।
एक महीने में किसने? कितने टोटके किए? इसकी स्टीक जानकारी तो संभव है किसी के पास ना हो लेकिन चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों व उनकी ओर से की ओर से लगाई जा रही इस 'जुगतÓ में लगभग हर राजनीतिक दल के लोग शामिल हैं। दिलचस्प है कि जो लोग सार्वजनिक जीवन में इस तरह के 'प्रयोगोंÓ के मुखर विरोधी हैं उन्होने ने भी अपने करीबी को मूक सहमति दे रखी है। ऐसे ही एक सलाहकार कहते हैं कि जिस तरह की विरोधाभास वाली अटकलों का दौर चल रहा है उसमें कुछ भी संभव है। ऐसे में यदि एक दो 'उपायÓ कर भी लिए जाएं तो बुराई क्या है?