Wednesday, 15 February 2012

काश बिन चुनाव जारी रहे 'आदर्श आचार संहिताÓ after punjab election, code conduct, wine,


-तीन दिन में सड़क पर शराब पीने के डेढ़ दर्जन ममाले दर्ज, स्कूली वाहनों के चार दर्जन चालान
-मामला सभ्य समाज में समझ के बावजूद सिर्फ कानून ना पालन करने का
भूपेश चट्ठा, पटियाला
शाही शहर पटियाला दुनिया भर में चाहे अपने एतिहासिक पैग के लिए मशहूर हुआ है पर यहां कि सड़कें पिछले कुछ सालों से सड़क किनारे रेहडिय़ों, ढ़ाबों, खोखों पर 'खड़कने वाली गिलासीÓ के चलते बदनाम हो चली थी लेकिन विधान सभा चुनाव के चलते मतदान के बाद भी जारी आदर्श चुनाव आचार संहिता के चलते पुलिस ने लंबे अर्से बाद शराबियों को तहजीब सिखाने और अवैध रूप से चल रहे 'ओपन एयर बॉरÓ बंद करवाने का प्रयास किया है। दिलचस्प है कि ऐसे कुख्यात अड्डों के पास से गुजरने वाला हर इंसान अब कहने लगा है कि काश बिन चुनाव के भी ऐसी 'आदर्श आचार संहिताÓ शहर में जारी रहनी चाहिए।
पिछले तीन दिन में सड़क किनारे किसी अस्थायी इंतजाम में शराब पीने पिलाने के दर्ज किए गए डेढ़ दर्जन ममाले बताते हैं कि पुलिस ने इस बार कार्रवाई की है। दिलचस्प है कि इनकी संख्या जहां पहले दिन दहाई अंक में थी तो दूसरे दिन यह सात पर आ गई जबकि बीती रात सिर्फ एक मामला ही दर्ज किया गया है। पुलिस के ही एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि एसएसपी के आदेशों पर कार्रवाई तो जारी रही पर धरा केवल एक ही गया है। वो भी वीवीआईपी क्षेत्र कहे जाने वाले अर्बन एस्टेट में मीट की रेहड़ी लगाने वाले और इस पर शराब पीने के आरोप में दो लोगों क खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। तफजल पुरा के कलपत सिंह व राम दयाल इस बार गिरफ्त में आए हैं।
ठीक ऐसे ही शहर की सड़कों पर मनमाने ढ़ंग से स्कूली वाहन चलाने और नन्हें बच्चों से लेकर स्कूली विद्यार्थियों का जीवन दांव पर लगाने वालों पर ट्रैफिक पुलिस की मात्र एक दिन की कार्रवाई में चार दर्जन चालान काट दिए गए। इसमें बस से लेकर आटो रिक्शा, मिनी बस, तूफान, और वैन जैसे हर तरह के वाहन हैं जिन्होंने यातायात नियमों को ना मानने की आदत ही डाल ली है। यहां पर सुधार तो कम हुआ पर बसों के रास्ते जरूर बदल गए हैं। हालांकि पुलिस की सारी गतिविधियां पटियाला शहर तक ही सीमित रही हैं जबकि  हालात जिले के अन्य शहरों में भी कुछ अलग नहीं हैं।
वहीं जिला प्रशासन के एक सेवा मुक्त अधिकारी कहते कि सारा मामला सभ्य समाज में समझ के बावजूद सिर्फ कानून ना पालन करने का है, इसके अलावा कुछ नहीं। ऐसे में नियम कानून की पालना करनी चाहिए और करवानी भी चाहिए वे कहते हैं कि पुलिस व आबकारी विभाग को अगले चरण में चाहिए कि जहां वैध रूप से बैठने के अहाते बनाए गए हैं वे भी दुकान के अंदर ही रहने चाहिए और बैठने की संख्या के हिसाब से राजस्व वसूला जाना चाहिए नाकि सड़क व बरामदों में मेज कुर्सियां लगाने की छूट देकर।

No comments:

Post a Comment