...स्ट्रीट लाइट
'भेज देते हैंÓ, 'करवा देते हैंÓ से ज्यादा सुनने को कुछ नहीं मिलता
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
सर्दियों के कोहरे की चादर छंट चुकी है, धुंध का आलम गायब है पर शहर विशेष रूप से फैक्ट्री एरिया क्षेत्र की सड़कों पर रात में अंधेरे का साम्राज्य छाया रहता है। करीब करीब सवा महीने से चल रहे चुनाव आयोग के आदर्श चुनाव आचार संहिता के डंडे के चलते जहां क्षेत्र में नई स्ट्रीट लाइटें नहीं लग पाई जबकि पुरानी खराब हो चुकी स्ट्रीट लाइटों की मरंमत ही नहीं की गई।
ऐसा भी नहीं है कि पूरे क्षेत्र में ही अंधेरे का आलम हो। लेकिन जहां तहां स्ट्रीट लाइट मात्र खंबे के रूप में खड़ी है। डीटीएच के व्यवसाय से जुड़े हरविंदर सिंह कहते हैं कि उन्हें किसी के यहां लगी मरकरी से एतराज नहीं है, लेकिन वे यह भी चाहते हैं कि उनकी गली के मोड़ पर लगी टयूबलाइट भी चलती रहे। पिछले एक महीने से एक के बाद एक टयूबलाइटें बंद हो रही हैं। शिकायत केंद्र पर कई बार फोन भी किए पर 'भेज देते हैंÓ, 'करवा देते हैंÓ से ज्यादा सुनने को कुछ नहीं मिलता।
जबकि रेलवे से रिटायर्ड गार्ड बीएस कंग कहते हैं कि अब तो स्ट्रीट लाइट की ओर ध्यान देना बंद कर दिया है। अब कभी किसी दुकान के बाहर लगे बल्ब की रोशनी कीद ओर ध्यान जाता है तो कभी मंदिर, गुरुद्वारा साहिब के बाहर लगी लाइट के सहारे ही काम चलाया जाता है और अनुमान लगाया जाता है कि मोड़ कहां है? और खड्डा कहां हैं?
इसी संबंध में मेयर अजीत पाल सिंह कोहली कहते हैं कि वे लोगों को पेश आ रही इस समस्या से परिचित हैं। नया काम तो कोई नहीं कर पा रहे हैं पर अब उन्होंने मरंमत का काम शुरु करवा दिया है। जल्द ही इस क्षेत्र में भी स्ट्रीट लाइट दुरुस्त हो जाएगी।
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