-बारिश के बाद चली हवा से आधे से एक फीसदी का नुकसान
-देरी से बिजाई वाली किस्मों पर पड़ा है प्रभाव पर घबराने की
जरूरत नहीं: कृषि विभागभूपेश चट्ठा, पटियाला
'हल छड्ड के खेत नूं जांवे जट्टा तेरी जून बुरी...' लोक
गीतों ने पंजाब के किसानों की व्यथा सदियों पहले ही बता दिया था
कि तकनीकि जितना ही विकसित क्यों ना हो जाए वैज्ञानिक चाहे जितनी
ही उन्नति क्यों ना कर लें किसान की किस्मत तो प्रकृति की मर्जी पर
ही र्निभ र करती है। खेत से काम निपटा कर अभी किसान घर पहुंचता
ही नहीं है कि उसे एक बार फिर खेत की ओर दौडऩा पड़ता है।
बीती रात की बारिश ने इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही बना दिए है।
प्रदेश में रबी की प्रमुख फसल गेहूं पर देश भर की निगाह टिकी
है और गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होने से ठीक दो दिन
हुई बारिश से राज्य का किसान सहमा है। गेहूं की देर से हुई
बिजाई के चलते इन दिनों की बारिश संभवत पौधे बर्दाश्त कर लेते
लेकिन साथ आई तेज हवाओं और कहीं-कहीं गिरे ओलों ने
रिकार्ड उपज पर सवालिया निशान लगा दिए है। हालांकि कृषि विभाग
की ओर से लगाए गए शुरूआती अनुमानों में आधे से एक फीसदी उपज
प्रभावित होने की बात की जा रही है।
मुख्य कृषि अधिकारी सुभाष चंद खुराना कहते है कि देरी से
बिजाई वाली कुछ पछेती किस्मों पर बारिश का विपरीत असर हुआ है,
शेष में तेज हवाओं से गिरे पौधों के अलावा कोई परेशानी
नहीं है, यहां दाना लगभ ग पक चुका है, ऐसे में कल की बारिश
के बाद आज निकली धूप और आने वाले दिनों में खुले रहने वाले
मौसम से स्थिति ठीक हो जाएगी। वे कहते है कि अभी घबराहट
वाली कोई बात नहीं है।
उधर राजपुरा व आसपास के क्षेत्रों में बीती रात जम कर ओलावृष्टि
हुई है। ठीक ऐसे ही समाचार कुछ अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से भी
मिले है लेकिन ओलों का साइज राजपुरा की तुलना में अन्य क्षेत्रों
में खासा छोटा ही रहा है।
दिलचस्प है कि बारिश ने आने वाले दिनों के फलों की लोकल
किस्मों में कुछ को अच्छा लाभ दिया है तो कुछ को बुरी तरह
से प्रभावित किया है। नींबू-आम आदी के फूल झड़े है तो
आड़ू-अमरूद की बीमारी।
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