-राजपुरा के अलावा जिले की अन्य 98 मंडियों में नहीं आई फसल
भूपेश चट्ठा, पटियालाबेमौसमी बारिश और बिजाई में आधुनिक तकनीक अनुसार हुई देरी के चलते मंडियों में गेहूं की आवक नाममात्र ही है। जिले में गेहूं खरीद के बनाए गए 99 केंद्रों में से मात्र एक राजपुरा में फसल आई है। हालांकि यहां आई किसान की उपज में भी नमी की अधिकता होने की वजह से यह भी नहीं बिक पाई है।
न्यूनतम समर्थन मुल्य पर होने वाली सरकारी खरीद शुरू हुए चार दिन बीत जाने के बाद भी जिले में अभी तक 40 टन गेहूं ही आया है। जबकि बीते साल यदि बनूड़ क्षेत्र की मंडियों में आई गेहूं की आवक को अलग भी रखा जाए तो भी जिले में आवक 24 सौ टन से उपर रही थी।
जिला मंडी अधिकारी जीएस औलख बताते है कि अभी तक सिर्फ राजपुरा की मंडी में गेहूं आया है। यहां भी मात्र 40 टन आवक तीन अप्रैल रात तक की पहुंच है। चूंकि गेहूं में नमी की मात्रा 18-20 फीसदी के आसपास आ रही है ऐसे में अभी तक खरीद नहीं हुई है।
उल्लेखनीय है कि पिछले दो सप्ताहों में हुई दो बारिशों ने इस बार पहले ही परंपरागत समय पर आने वाली गेहूं की उपज को मंडियों में आने से थोड़ा और रोक दिया है। ओलावृष्टि व तेज हवाओं के साथ चली बारिश ने गेहूं के दाने में नमी बढ़ा दी है और बारिश की वजह से गिरे पारे ने फसल के पकने में और देरी कर दी है। जबकि इन दिनों में पौधे को खिली धूप की ज्यादा जरूरत होती है। केंद्र सरकार की ओर से एमएसपी पर गेहूं की खरीद के तय किए गए मापदंड अनुसार 12 से 14 फीसदी नमी वाले गेहूं की खरीद की जा सकती है। चूंकि पंजाब सरकार ने 12 फीसदी से अधिक नमी वाले गेहूं पर लगाए जाने वाली मूल्य कटौती का अपनी खरीद नीति में कहीं भी जिक्र नहीं कर रखा है ऐसे में पंजाब में 12 फीसदी से अधिक नमी वाले गेहूं की खरीद सामान्य परिस्थितियों में नहीं की जाती।
जानकार कहते है कि अभी क्षेत्र की मंडियों में गेहूं का सीजन शुरू होने में समय लगेगा, लेकिन एक बार तापमान तेज होने पर गेहूं की आवक एकदम तेज होगी और ढेर लगने में भी देरी नहीं लगेगी। राज्य में खरीद एजेंसियों के कर्मियों की ओर से की जा रही हड़ताल का असर भी दिखाई देने में कम से कम एक सप्ताह और लगने वाला है.
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