गेहूं पर पीली कुंगी का खतरा अभी तक नहीं यूरिया संयम से डालने की सलाह
भूपेश चट्ठा, पटियाला : पंजाब में फसलों के लिए वरदान कहे जाने यहां के मौसम में थोड़ी सी भी गड़बड़ देश की विकास दर को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। दिसंबर मध्य के बाद भी बारिश न होने से पड़ रही सूखी सर्दी से फसल को नुकसान पहुंच रहा है। इससे गेहूं के पौधे का विकास मानो थम सा गया है।
इन दिनों होने वाली बारिश से पौधे की हल्की सिंचाई हो जाती है। इससे पत्ते पर जमा कोहरा व गर्द धुलने के साथ ही जड़ों को आक्सीजन मिल जाती है। इससे पौधे का विकास होता है। जबकि 'नक्का' तोड़ लगाए जाने वाले पानी से सिंचाई जरूरत से ज्यादा हो जाती है। जिससे जड़ों में पानी जमा हो जाता है और दम घुटने से पौधे का विकास तेजी से नहीं हो पाता।
कृषि विकास अधिकारी डा. एएस मान कहते हैं कि इन दिनों में ऐसा हर साल होता है। इसमें घबराने की जरूरत नहीं है। कई बार फसल के पीला पड़ते ही किसान ज्यादा मात्रा में यूरिया डाल कर अतिरिक्त प्रयास करते हैं। इससे पौधे झुलस जाते हैं। इस साल बीच-बीच में धूप निकलने से गेहूं की फसल पीली नहीं पड़ी। कुछ दिन में पारा चढ़ने पर हालात बदलने की पूरी संभावना है। प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया चलेगी और फिर जनवरी में पारा चढ़ने पर गेहूं की फसल खिल उठेगी। उनका कहना है कि जल्द आई बारिश अगेती बिजाई वाली गेहूं के लिए तो ठीक रही पर पछैती को मार सहनी पड़ रही है।
कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर बीज, डा. बीएस सोहल बताते हैं कि गेहूं की फसल को प्रदेश में सबसे अधिक मार पहुंचाने वाली बीमारी पीली कुंगी का खतरा अभी तक कहीं भी देखने को नहीं मिला है। धुंध के बाद अगले दिन मौसम के खुल जाने के चलते दिन का तापमान बढ़ जाता है, जिससे नुकसान नहीं हुआ है। अगर इन दिनों बारिश हो जाए तो सोने पे सुहागा होगा। गेहूं के अभी तक बचे रहने के अलावा अन्य फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव पर वह कहते हैं कि सीजन में सब्जियों विशेष रूप से आलू-मटर पर कोहरा भारी पड़ सकता है।
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