Saturday, 24 December 2011

18 साल, 18 गांव और सात बाढ़, पर साइफन नहीं, issues, punjab election, 2012, patiala,



 मुद्दा:- साइफन

-पंजाब के अकाली-भाजपाई व कांग्रेसी एकमत
-क्षेत्र के लोग मुआवजे की बजाए साइफन मांगते हैं पर मिलता मुआवजा ही है
 भूपेश चट्ठा, पटियाला
सतलुज यमुना लिंक नहर से पंजाब ने क्या खोया ? और क्या पाया? ये चाहे अतीत का मुद्दा हो गया हो लेकिन इस नहर के जगह जगह से टूटने के बाद ये जिले के घन्नौर क्षेत्र में हर दूसरे तीसरे साल बाढ़ का कारण बनती आ रही है। 1993 में आई भयानक के बाढ़ के बाद के 18 सालों में अब तक सात बार बाढ़ आ चुकी है, लेकिन हर बार सरकार बदलने के बावजूद क्षेत्र के लोगों को बाढ़ से राहत दिलाने साइफन नहीं बनाए जा सके हैं।
दिलचस्प है कि पंजाब में चुनाव लडऩे वाले हर राजनीतिक दल चाहे वो शिरोमणि अकाली दल भारतीय जनता पार्टी गठबंधन हो या कांग्रेस दोनों ही भाखड़ा मैन लाइन की नरवाना ब्रांच पर लाछड़ू व फकीरमाजरा के पास साइफन बनाने को लेकर एकमत हैं। लेकिन 2004 में आई बाढ़ के बाद सेंट्रल वाटर कमीशन की टीम की जांच रिपोर्ट में दो साइफन व बाढ़ का पानी निकालने एक ड्रेन बनाए जाने को जरूरी बताए जाने के बावजूद साइफन का मामला इधर से उधर भटक रहा है।
वर्तमान सरकार के सिंचाई मंत्री जनमेजा सिंह सेखों केंद्र व हरियाणा सरकार के सिर बाढ़ का ठीकरा फोडऩे के अलावा अपने मुख्यमंत्री के सुर में बोल पानी को पंजाब का प्राकृतिक संसाधन बता राजस्थान व हरियाणा से रायल्टी की मांग भी करते हैं। बताते हैं कि लगातार सीडब्ल्यूसी के पास मामला उठाने के बावजूद हरियाणा पैसे जमा नहीं करवा रहा। चूंकि हरियाणा ही इस नहर का सबसे बड़ा लाभपात्री है ऐसे में ये जिम्मेदारी भी उसकी बनती है।
वहीं पूर्व सिंचाई व ऊर्जा मंत्री लाल सिंह याद कर कहते हैं कि उनके कार्यकाल में इस नहर पर साइफन बनाए जाने के अलावा माइक्रो हाइडल प्रोजेक्ट बनाने का निर्णय लिया था, लेकिन हरियाणा ने यह कह कर अड़ंगा लगा दिया कि पानी उसके पास आ रहा है इसलिए बिजली में हिस्सा दिया जाए।

11 करोड़ मुआवजे पर खर्च पर आठ करोड़ का साइफन नहीं बना

 2004 में एसवाईएल और बीएमएल नहरों के बीच फंसे गावों के लोगों ने मुआवजा लेने से इंकार करते हुए साइफन बनाए जाने की मांग रखी। यह भी तय था कि 15 से 22 दिन के बीच साइफन अथवा सुपर पैसेज बन जाएगा और इतने ही दिन नहर बंद रहेगी, लेकिन सरकारों ने 11 करोड़ रूपये मुआवजे के बांट दिए लेकिन उन दिनों के आठ करोड़ रूपये का साइफन फिर अटक गया।

दोनों राच्यों ने रद्द किए समझौते

इंटर स्टेट कहे जाने वाले पानी के मामले पर पंजाब विधान सभा में कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में प्रस्ताव पारित कर पंजाब टर्मिनेशन आफ एग्रीमेंट एक्ट 2004 लागू कर पानी पर हुए सभी समझौते रद्द कर दिए गए तो इसके डेढ़ साल के भीतर हरियाणा ने भी कुछ ऐसा ही कर लिया गया। तब भी वहां कांग्रेस की ही सरकार थी।



भाखड़ा मैन लाइन व नरवाना ब्रांच

1950 से 1954 के बीच बनाई गई 164 किलोमीटर लंबी बीएमएल का 159 किमी हिस्सा पंजाब व शेष हरियाणा में है। इससे पानी लेने वालों में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के अलावा पीने के पानी की सप्लाई दिल्ली व चंडीगढ़ को भी की जाती है। वर्ष 2004 में इसकी क्षमता को बढ़ा कर 12 हजार 455 क्यूसिक कर दिया गया। बीएमएल में से निकली  98 किमी लंबी नरवाना ब्रांच में से 45 किमी पंजाब में से गुजरती है। 4500 क्यूसिक क्षमता की इस नहर से 4022 क्यूसिक पानी अकेला हरियाणा लेता है। इसके 1256 किमी लंबे चैनलों से सात लाख 35 हजार 463 एकड़ क्षेत्र कवर होता है।

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