मुद्दा :
भूपेश चट्ठा, पटियाला
सर गंगा राम के डिजाइन किए गए अपने बेहतरीन सीवरेज सिस्टम पर फर्ख करने वाले एतिहासिक शहर पटियाला में आबादी के कई गुणा बढऩे के बाद सीवरेज सिस्टम ही सबसे बड़ी समस्या बन गया। लगातार दो सरकारों ने यहां के सीवर पर से डेयरियों के गोबर का वजन कम करने के 'संजीदाÓ प्रयास किए लेकिन ना जाने क्यों शहर की भेंसे तो परकोटे से बाहर नहीं निकल पाई और कांग्रेस व शिरोमणि अकाली दल दोनों के ही प्रयास पानी में जाते रहें हैं।
दोनों दल चाहे एक दूसरे पर कितने भी आरोप प्रत्यारोप लगाएं या दावे प्रति दावे करें पर अंतत: परिणाम वही निकले कि शहर के आम आदमी का मसला नहीं सुलझाया जा सका और दोनों ही बार भेंस पानी में चली गई और निकाली नहीं जा सकी।
शहर में सात सौ से अधिक डेयरियां हैं और प्रत्येक डेयरी में पशुओं की संख्या 10-20 से लेकर 70-80 तक है और नाले के आस पास बनी इन डेयरियों में से हर रोज टनों के हिसाब से गोबर कवर किए गए नाले में धकेल दिया जाता है।
दिलचस्प है कि नाला कवर करने के बाद 24 जून 2005 को अबलोवाल के पास 15 एकड़ जमीन पर शहर की डेयरियों को स्थापित करने के प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया गया। इस जमीन में पांच एकड़ जगह वन विभाग की आ गई तो काम रुक गया। फिर दोनों नदियों के बीच घलोड़ी रकबे की जमीन में लेजाने का ब्लू प्रिंट बना लेकिन ड्रेनेज विभाग ने बड़ी नदी के दूसरी ओर का किनारा ना होने का हवाला दे अनुमति नहीं दी तो रुख फिर नानक सर गुरुद्वारा की ओर किया गया अब फिर अबलोवाल की तैयारी चल रही है। जहां गोबर गैस प्लांट से लेकर अन्य सुविधाएं विकसित करने बुकिंग के पैसों का उपयोग करने की बात हो रही पर इन दिनों में डेयरी एसोसिएशन का दवाब समूह भी काम कर रहा है। इस पर भी पार पाना होगा।
नक्शा तैयार है जल्द मिलेंगे प्लाट: मेयर
शहर के वर्तमान मेयर अजीतपाल सिंह कोहली कहते हैं कि पूरे प्रोजेक्ट का नक्शा तैयार है, 100 से 500 गज के प्लाट जल्द मिलने शुरु हो जाएंगे। इससे मिली राशि से ही क्षेत्र विकसित किया जाएगा। वन विभाग से विवाद वाली जमीन को अलग कर लिया गया है। पहले चरण में शहर की बाहरी कालोनियों की डेयरियों को अबलोवाल में शिफ्ट कर, इसे 107 करोड़ के सीवरेज प्रोजेक्ट के साथ जोड़ दिया जाएगा। शेष के लिए अलग जगह तलाशी जाएगी। देरी पर वे कहते हैं कि पीने का पानी उपलब्ध करवाना च्यादा जरूरी था और आप विवादास्पद जमीन पर नया प्रोजेक्ट नहीं लगा सकते थे।
...पर सरकार बदल गई: पूर्व मेयर
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मेयर रहे विष्णु शर्मा कहते हैं कि उनके समय में जमीन आदि लेकर प्रोजेक्ट का शिलान्यास कर दिया गया था पर सरकार बदल गई और इन लोगों ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। अब इतने दिन ही नहीं बचे हैं कि कुछ किया जा सके, आदर्श चुनाव आचार संहिता लगने को है।
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