Saturday, 24 December 2011

मंहगी हुई चीनी की मिठास पर सरकारी मिल रही ठंडी, issues, punjab election, 2012, patiala,


मुद्दा:- कोआपरेटिव चीनी मिल
-कर्मियों को नहीं मिला 23 महीनों से वेतन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
नाभा रोड़ स्थित जिले की इकलौती  कोआपरेटिव शुगर मिल पिछले चुनावों में समाना विधान सभा क्षेत्र के लिए खासी महत्वपूर्ण थी कारण था ढ़ाई सौ से च्यादा कर्मियों के परिवारों की वोटें, जिन्हें उन दिनों वेतन नहीं मिल रहा था, हालांकि गेहूं-धान से अलग हट गन्ना उत्पादन करने वाले किसानों के बारे में किसी ने नहीं सोचा पर कर्मियों के धरने प्रदर्शन पर वायदे होते रहे। दिलचस्प है कि कोआपरेटिव क्षेत्र की रखड़ा शुगर मिल समाना विधान सभा क्षेत्र से बाहर हो कर पटियाला ग्रामीण का हिस्सा हो गई और चीनी की मिठास भी मंहगी होती रही पर सहकारी क्षेत्र की यह मिल ठंडी ही रही।
मिल के कर्मियों का 23 महीनों से वेतन अब भी बकाया है। ऐसा भी नहीं है कि सरकार ने काम नहीं किया पर मिल फिर भी नहीं चल पाई।

कब क्या हुआ?
 इसी सरकार के सहकारी मंत्री स्व. कैप्टन कंवलजीत सिंह 19 जनवरी 2008 को हुई बैठक में रखड़ा सहित राच्य की तीन मिलों को लीज पर देने निर्णय लिया था 30 सितंबर 2009 तक काम निपटा देना था। इसी साल कर्मियों को वेतन व दिवाली का बोनस भी मिला और यह इआदेश भी दजारी हुआ कि पुराने लोन की किश्त इसमें से ना काटी जाए। मिलों को शुगर हाउस बना कर यहां से एथनाल बाजार में बेचने और इनकी क्षमता को बढ़ाने का निर्णय हुआ। लेकिन कैप्टन कंवलजीत की 29 मार्च 2009 को मृत्यु के बाद मिलें एक बड़े अकाली नेता के हवाले हो गई और अब फिर बीओटी के आधार पर देने का निर्णय इसी दिसंबर में कैबिनेट की बैठक में लिया गया है।

बीओटी आधार पर देने का हुआ है निर्णय : रखड़ा

पूर्व विधायक व जिला योजना बोर्ड के चेयरमैन सुरजीत सिंह रखड़ा कहते हैं कि वे इस मिल के चेयरमैन रहे हैं और 2002 में कांग्रेस सरकार आने तक यही मिल डेढ़ सौ फीसदी क्षमता पर लाभ में काम कर रही थी लेकिन कांग्रेस सरकार के आने के बाद गन्ना गायब हो गया और मिल ठप्प हो गई। अब अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार ने कर्मियों को वीआरएस दे कर इस मिल को बिल्ट ओन आपरेट के सिद्यांत पर देने का निर्णय लिया है। कर्मियों के वेतन के सवाल पर वे कहते हैं कि करीब सौ लोगों का एक मामला न्यायालय में चल रहा है, जो बीओटी में तकनीकि अड़ंगा नहीं है।


दो बार उठाया विधान सभा में मुद्दा: ब्रहम महिंदरा

कांग्रेस के समाना से विधायक ब्रहम महिंदरा कहते हैं कि सरकार को चाहिए कि किसानों को गन्ने पर अधिक समर्थन मूल्य दें जिससे किसानों का भला हो और चीनी मिलों को भली प्रकार से चलाए जाने के अलावा आम आदमी को सस्ती चीनी मिलने का रास्ता भी कुछ कदम तय हो। वे कहते हैं कि उन्हें समझ नहीं आता कि प्राइवेट सेक्टर में चीनी मिलें आराम से चल रही हैं जबकि कोआपरेटिव सेक्टर में कर्मियों को महीनों से वेतन ही नहीं दिया जा सका है। विधान सभा में कर्मियों के वेतन ना मिलने और मिल के बंद होने का मुद्दा वे दो बार उठा चुके हैं। क्षेत्र कि रखड़ा मिल पर पे कहते हैं कि इसे तो बेचने का प्रावधान भी सरकार ने एकबार कर दिया था, फिर ना जाने क्या हुआ कि ना मिल चली ना बिकी।

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