विधान सभा क्षेत्र:- नाभा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
कभी बेल्जियम के बाद हरे कांच की बोतलों का उत्पादन करने में विश्व भर में विख्यात रहे एतिहासिक शहर नाभा की आबादी चाहे कम रही है, रेलवे व सड़क के लिहाज से भी यह प्रमुख मार्ग पर नहीं है, लेकिन साथ लगते फतेहगढ़ साहिब, बरनाला व मानसा जैसे गांवों व कस्बों के जिला बनने के बाद से इसे जिला बनाए जाने की मांग हर बार जिस तरह से उठती है ठीक उसी तरह से बैठती भी रही है। जिला मुख्यालय से मात्र 26 किलोमीटर की दूरी के चलते तकनीकि रूप से इसे खारिज भी कर दिया जाता है। हालांकि अन्य मामलों में ऐसा नहीं हुआ है। नाभा इकलौती रियासत है जो जिला नहीं बनी है। इतना ही नहीं देश की यह इकलौती पूर्व रियासत है जिसे परिसीमन के बाद आरक्षित क्षेत्र बना दिया गया है।
इस विधान सभा क्षेत्र में विकास का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता हैं कि यहां आटो एलपीजी का प्लांट लगा है, आईओसी का बाटलिंग प्लांट है, पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी नगर परिषद के पास नहीं है। आग लगने की स्थिति में इसे बाहर से मंगवाना पड़ता है। सीवरेज सिस्टम दुरुस्त नहीं हो पाया है तो मूलभूत सुविधाओं के नाम पर सड़कों की हालत खस्ता है। जहां कहीं इंटर लाकिंग टाइलें लगी हैं वहां विजीलेंस ने नमूने ले रखे हैं।
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जो विकास हुआ उन्हीं के कार्यकाल में हुआ: विधायक काका रणदीप
नाभा से दो बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने काका रणदीप सिंह के पास कहने को काफी कुछ है। उनके रियासती परिवार ने आजादी के बाद से आठ एमएलए दिए हैं। नेहरू से राजीव गांधी तक पीढ़ी दर पीढ़ी संबंध रखने वाले काका रणदीप कहते हैं कि जो विकास हुआ उन्हीं के समय में हुआ। पहले सैंट्रल रोड फंड और फिर बीओटी के माध्यम से सभी बाहरी सड़कें बनवाई, शहर मेंं आरओबी व रोहटी के पुल बनाए। परिषद को कर्ज मुक्त कर सीवरेज का प्रोजेक्ट लाए जबकि आरोप लगाते हैं कि अकाली सरकार वायदे कर भूलती रही है।
दिलचस्प पहलु
-पंजाब की इकलौती रियासत है जो जिला नहीं बनी
-देश की इकलौती पूर्व रियासत है जिसे परिसीमन के बाद आरक्षित क्षेत्र बनाया गया
क्या नहीं हुआ
-जिला नहीं बन पाया
-सीवरेज सिस्टम नहीं हुआ दुरुस्त
-फायर ब्रिगेड नहीं है
-शहर के भीतर की सभी सड़कें नहीं बन पाई
-सैटेलाइट टाउन में शामिल नहीं हो पाया
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